Friday, April 17, 2026
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हिमाचल

Himachal : हर साल एक से 17 MM उठ रहा हिमालय, विकास के नाम पर प्रकृति से खिलवाड़

17 अप्रैल, 2026 06:18 PM

हिमालय हर वर्ष लगभग एक से 17 मिलीमीटर तक ऊपर उठ रहा है, जो क्षेत्र में सक्रिय भू-वैज्ञानिक प्रक्रियाओं का संकेत है। इसके साथ-साथ जलवायु परिवर्तन और मानव गतिविधियों के कारण प्राकृतिक संतुलन भी प्रभावित हो रहा है। यह खुलासा मनाली में आयोजित राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक के दौरान हुआ। इस दौश्रान हिमालय क्षेत्र में हो रहे भू-वैज्ञानिक बदलावों और बढ़ते जलवायु जोखिमों को लेकर विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता जताई है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की टीम ने लाहुल घाटी के सिस्सू में प्रस्तावित ग्लेशियल लेक आउटबस्र्ट फ्लड अर्ली वार्निंग सिस्टम का निरीक्षण करने के बाद मनाली में उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की। बैठक के दौरान एनडीएमए सदस्य डा. दिनेश कुमार असवाल ने बताया कि हिमालय हर वर्ष लगभग एक से 17 मिलीमीटर तक ऊपर उठ रहा है। डा. असवाल ने स्पष्ट किया कि आधुनिक विकास की गति कई बार प्रकृति के नियमों के विपरीत जा रही है, जिसके दूरगामी दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अचानक बाढ़ और बढ़ता नुकसान इसी असंतुलन का परिणाम है।


उन्होंने बताया कि इस दौरे का मुख्य उद्देश्य सिस्सू झील क्षेत्र में स्थापित किए जा रहे ग्लेशियल लेक आउटबस्र्ट फ्लड अर्ली वार्निंग सिस्टम के प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट का निरीक्षण करना और इसकी तकनीकी कार्यप्रणाली को समझना था। यह प्रणाली ग्लेशियर झीलों के फटने से उत्पन्न होने वाली अचानक बाढ़ से पहले ही चेतावनी जारी करने में सक्षम होगी। विशेषज्ञों के अनुसार लाहुल-स्पीति क्षेत्र में स्थित घेपन झील जैसे संवेदनशील स्थलों पर यह तकनीक आपदा जोखिम को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती है। इस अवसर पर उपायुक्त लाहुल-स्पीति किरण भड़ाना, एसडीएम मनाली गुंजीत सिंह चीमा आदि अधिकारी उपस्थित रहे।


पर्यावरण संरक्षण के लिए सभी को मिलकर करना होगा काम
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य डा. दिनेश कुमार असवाल ने प्रदेश के स्तर पर राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण बेहतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि आज के युग में हम वैज्ञानिक तरक्की भी प्रकृति के नियमों विपरीत कर रहे हैं, जिसका दूरगामी प्रभाव पड़ रहा है। इसके लिए विभागीय कार्यों एवं प्रयासों के साथ जनभागीदारी, वृक्षारोपण आदि के कार्य भी आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि सरकार, मीडिया, सिविल सोसायटी के प्रयास ही इसमें प्रत्याशित सफलता प्रदान कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस दौरे के माध्यम से आपदा प्रबंधन की दिशा में नई तकनीकों को साझा किया जा रहा है। आपदा प्रबंधन एक्ट 2005 के बाद 20 सालों में इस पर तेजी से कार्य हुआ है।

बैठक में जानकारी देते हुए अतिरिक्त सचिव राजस्व एवं डीएमसी निशांत ठाकुर ने इसके अंतर्गत किए जा रहे कार्यों के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की। इस अवसर पर मुख्य अभियंता जल शक्ति विभाग मंडी जोन द्वारा एक विस्तृत पीपीटी की प्रस्तुति दी गई।

 

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