शिमला : हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2025-26 के दौरान नाबार्ड ने कृषि और ग्रामीण विकास को मजबूत करने के लिए रिकॉर्ड वित्तीय सहायता प्रदान की है। इस दौरान करीब 5063 करोड़ रुपए की मदद दी गई, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत अधिक है। राज्य में कृषि परिसंपत्तियों को बढ़ाने के लिए फसल और निवेश ऋण के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया गया। इसके तहत सहकारी बैंकों और हिमाचल प्रदेश ग्रामीण बैंक को लगभग 3303 करोड़ रुपए की पुनर्वित्त सहायता दी गई, जिससे किसानों को आसानी से ऋण मिल सके। इसके अलावा, प्रत्यक्ष पुनर्वित्त सहायता योजना के तहत सहकारी बैंकों को 910 करोड़ रुपए दिए गए।
इस राशि का उपयोग किसानों और प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों को कार्यशील पूंजी, कृषि उपकरणों की मरम्मत, भंडारण, पैकेजिंग और विपणन जैसी सुविधाएं देने में किया जाएगा, ताकि किसानों की आय बढ़ सके और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो। बुनियादी ढांचे के विकास के लिए भी नाबार्ड ने कई अहम परियोजनाएं मंजूर की हैं। आरआईडीएफ ट्रेंच-31 के तहत 78 परियोजनाओं को करीब 783 करोड़ रुपए की सहायता दी गई है। इनमें 50 ग्रामीण सडक़ परियोजनाएं शामिल हैं, जिनसे लगभग 398 किलोमीटर सडक़ नेटवर्क का विकास होगा। इसके अलावा 5 पुल परियोजनाएं, 9 सिंचाई योजनाएं, 12 पेयजल योजनाएं और बाढ़ सुरक्षा व सीवरेज से जुड़ी योजनाओं को भी मंजूरी दी गई है। इन योजनाओं से हजारों लोगों को लाभ मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं बेहतर होंगी।
सडक़ों संग ई-वाहन चार्जिंग जैसी कई योजनाएं स्वीकृत
नाबार्ड ने ग्रामीण सडक़ परियोजनाओं के साथ इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर पर भी जोर दिया है। हिमाचल पथ परिवहन निगम के लिए राज्य भर में 80 स्थानों पर ई-चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए 110 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही राज्य सरकार ने अपनी 850 करोड़ रुपए की उधारी क्षमता का पूरा उपयोग करते हुए विभिन्न परियोजनाओं को आगे बढ़ाया है। कुल मिलाकर, नाबार्ड की इन पहलों से हिमाचल प्रदेश में कृषि, ग्रामीण विकास और बुनियादी ढांचे को नई गति मिलने की उम्मीद है, जिससे किसानों और ग्रामीण आबादी को बड़ा लाभ मिलेगा।