शिमला : केंद्र सरकार के आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा संचालित अमृत 2.0 मिशन के तहत अमृत मित्र योजना को जमीनी स्तर पर तेजी से लागू किया जा रहा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में हर घर तक स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। योजना के तहत वूमन फार वाटर पहल के माध्यम से महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई जा रही है, जिससे जल प्रबंधन को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया जा सके। प्रदेश के शहरी निकायों में चंबा, रामपुर, हमीरपुर, डलहौजी, पालमपुर, मंडी, सुन्नी, नादौन में अलग-अलग वार्डों में विभिन्न कार्यों को अंजाम दिया जा रहा है। इन कार्यों में जल स्रोतों की सफाई और रखरखाव, जल गुणवत्ता की नियमित जांच, पानी के बिलों का वितरण और संग्रहण तथा जल उपचार संयंत्रों की देखरेख प्रमुख रूप से शामिल है। योजना के तहत कार्यों को तकनीकी और गैर-तकनीकी श्रेणियों में विभाजित किया गया है।
तकनीकी कार्यों में जल उपचार संयंत्रों की मरम्मत, संचालन और सपोर्ट गतिविधियां शामिल हैं, जिससे पानी की आपूर्ति व्यवस्था सुचारू बनी रहे। वहीं गैर-तकनीकी कार्यों में पानी की गुणवत्ता की जांच, उपभोक्ताओं को जागरूक करना, बिल वितरण और संग्रहण जैसे कार्य किए जा रहे हैं। शहरी विकास विभाग के निदेश डा. नीरज कुमार ने बताया कि 14 शहरी क्षेत्रों में अमृत मित्र योजना शुरू करने का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। सरकार से मंजूरी मिलने के बाद इन 14 शहरी निकायों में भी अमृत मित्र योजना शुरू की जाएगी।
97 स्वयं सहायता समूह जोड़े
अभी तक इस योजना के तहत 97 स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की इस योजना से जोड़ा गया है। इस योजना की खास बात यह है कि इसमें स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें इन कार्यों में शामिल किया गया है। बड़ी संख्या में महिलाओं को पानी की गुणवत्ता जांच और बिलिंग सिस्टम के लिए ट्रेनिंग दी गई है, जबकि दर्जनों स्वयं सहायता समूह सक्रिय रूप से इस अभियान से जुड़े हुए हैं। इससे महिलाओं को रोजगार के अवसर मिलने के साथ-साथ उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो रही है।