धर्मशाला : हिमाचल प्रदेश सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा गत माह प्री-प्राइमरी से कक्षा प्रथम तक प्रवेश के लिए निर्धारित आयु मानदंड को लेकर स्थिति स्पष्ट की गई थी। विभाग ने स्पष्ट किया था कि जो छात्र 2026-27 सत्र के 30 सितंबर तक बालवाटिका-1 के लिए तीन वर्ष तथा पहली कक्षा हेतु छह वर्ष की आयु सीमा पूरी कर रहा है उसे उस कक्षा में एडमिशन दी जाए। अधिसूचना के अनुसार अगर कोई छात्र बालवाटिका-3 में अध्ययनरत है लेकिन 30 सितंबर तक कक्षा एक की आयु सीमा पूर्ण करता है तो उसे पहली कक्षा में एडमिशन दी जाए, लेकिन विभाग की स्पष्ट अधिसूचना के बावजूद कई स्कूलों द्वारा ऐसे छात्रों को अगली कक्षा में प्रोमोट करने में हिचकिचाहट दिखाई जा रही है, जो निर्धारित आयु सीमा पूरी कर रहे हैं।
इससे अभिभावकों में असमंजस की स्थिति बन रही है तथा छात्रों का एक वर्ष व्यर्थ होने का भी डर उन्हें सता रहा है। गौरतलब है कि विभाग ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत यह स्पष्ट किया था कि नर्सरी/ बालवाटिका-1 से कक्षा प्रथम तक प्रवेश के लिए बच्चे को संबंधित शैक्षणिक सत्र की 30 सितंबर तक निर्धारित आयु पूरी करना अनिवार्य होगा।
अभिभावक परेशान
कुछ विद्यालयों द्वारा ऐसे छात्रों को अगली कक्षा में बिठाने से परहेज किया जा रहा है। कई स्कूल प्रबंधन शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी अधिसूचना का हवाला देते हुए तर्क दे रहे हैं कि जारी अधिसूचना में अगली कक्षा में एडमिशन देने की बात कही गई थी न कि किसी कक्षा में अध्ययनरत छात्र को अगली कक्षा में प्रोमोट करने की। अभिभावकों की टेंशन फिर बढ़ गई है।
शिकायत करवाएं दर्ज
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई विद्यालय इन निर्देशों का पालन नहीं करता है, तो अभिभावक संबंधित जिला के उपनिदेशक, स्कूल शिक्षा (प्राथमिक) के समक्ष शिकायत दर्ज करा सकते हैं। उपनिदेशक द्वारा लिया गया निर्णय अंतिम और सभी विद्यालयों पर बाध्यकारी होगा। विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे इस नीति के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करें और किसी भी प्रकार की लापरवाही या उल्लंघन पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।