हमीरपुर/सुजानपुर : प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने हिमाचल प्रदेश की मौजूदा कांग्रेस सरकार को 'लॉबिंग सरकार' करार देते हुए आरोप लगाया है कि सरकार की आपसी खींचतान और कुर्सी की लड़ाई ने प्रदेश की पूरी व्यवस्था को चौपट कर दिया है। राणा ने कहा कि मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री तक दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं और जनता की समस्याओं को हाशिए पर धकेल दिया गया है।
कांग्रेस में चल रहे अलग-अलग लॉबिंग सैल
बुधवार को जारी एक प्रैस विज्ञप्ति में राजेंद्र राणा ने कहा कि कांग्रेस के भीतर अलग-अलग 'लॉबिंग सैल' सक्रिय हो गए हैं। हर नेता अपनी कुर्सी और मलाईदार महकमे की जुगत में लगा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं का पूरा ध्यान इसी बात पर केंद्रित है कि कोई मुख्यमंत्री बदलवाना चाहता है, कोई मंत्री बनना चाहता है तो कोई अपना पद बचाने की जद्दोजहद में जुटा है।
व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर पुरानी व्यवस्था भी की धराशायी
राणा ने तंज कसते हुए कहा कि विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस ने जनता को बड़ी-बड़ी गारंटियां दी थीं, लेकिन सत्ता में आते ही जनता को भूल गए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने व्यवस्था परिवर्तन का नारा दिया था, लेकिन इस नारे की आड़ में जो व्यवस्था पहले से सुचारू रूप से चल रही थी, उसे भी धराशायी कर दिया गया है। सरकार का कीमती समय केवल आपसी खींचतान में बर्बाद हो रहा है।
अस्पतालों और स्कूलों की हालत पर जताई चिंता
प्रदेश में बुनियादी सुविधाओं की खस्ताहाली का जिक्र करते हुए पूर्व विधायक ने कहा कि पेयजल योजनाएं बदहाल हैं और सड़कों की हालत दयनीय हो चुकी है। प्रदेश में स्कूलों के आलीशान भवन तो हैं, लेकिन पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं हैं। इसी तरह अस्पतालों की इमारतें खड़ी हैं, लेकिन अगर मशीनें हैं तो विशेषज्ञ नहीं, और डॉक्टर हैं तो स्टाफ नदारद है।
वित्तीय कुप्रबंधन से कर्ज तले दबा हिमाचल
राजेंद्र राणा ने सरकार की आर्थिक नीतियों को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि गलत नीतियों और वित्तीय कुप्रबंधन ने हिमाचल को भारी कर्ज तले दबा दिया है। अब हालात ये हैं कि राज्य सरकार केंद्र से अपनी कर्ज सीमा बढ़ाने की गुहार लगा रही है। राणा ने कहा कि प्रदेश में नई योजनाएं शुरू करना तो दूर की बात है, पुरानी योजनाओं का भी बंटाधार हो रहा है।
'कुर्सी बचाओ' छोड़ 'हिमाचल बचाओ' अभियान चलाए सरकार
राणा ने कहा कि राज्य में स्थिति ऐसी हो गई है कि योजनाएं बंद, विकास ठप्प और लॉबिंग चालू है। उन्होंने कांग्रेस सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि अब उन्हें अपना 'कुर्सी बचाओ' अभियान बंद करके 'हिमाचल बचाओ' अभियान शुरू करना चाहिए। साथ ही, सरकार को जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि चुनाव से पहले दी गई गारंटियों, सड़कों, स्कूलों और अस्पतालों के विकास का आखिर क्या हुआ।