ऊना : पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि जो कांग्रेस सरकार पंचायत और स्थानीय निकाय के चुनाव करवाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी, वह विस चुनावों में जाने की हिम्मत कैसे जुटाएगी। ऊना में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए सांसद ने कहा कि लोगों को चुनाव करवाने के लिए कोर्ट का सहारा लेना पड़ा। इस चुनावी प्रक्रिया के दौरान अनेक प्रकार के अड़ंगे लगाए गए, कई नोटीफिकेशन जारी कर उलटे-सीधे हथकंडे अपनाए गए।
नतीजे आए तो दिग्गजों के क्षेत्रों में भी कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। यहां तक कि सीएम और डिप्टी सीएम सहित कई अन्य बड़े नेताओं के क्षेत्रों में भी कांग्रेस हार गई। डिप्टी सीएम के क्षेत्र हरोली में बीडीसी के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद सहित एनएसी पर भी भाजपा ने जीत दर्ज की। सी.एम. के क्षेत्र हमीरपुर में भाजपा को सफलता मिली। उन्होंने कहा कि लोगों में सरकार के खिलाफ आक्रोश है।
जो गारंटियां दी गई थीं वे पूरी नहीं हुईं, उलटा प्रदेश को 1 लाख 20 हजार करोड़ के कर्जे में दबा दिया गया है। इस प्रदेश की खस्ता हालत कर दी गई है और उसे कंगाली की राह पर ले जाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार 25 जून, 1975 को इंदिरा गांधी ने जनता के आक्रोश, नागरिक अशांति और देश में कांग्रेस के खिलाफ उपजे रोष को देखते हुए आपातकाल लागू कर लोकतंत्र की हत्या की थी, उसी प्रकार कांग्रेस प्रदेश में भी लोकतंत्र की हत्या कर रही है।
इसी दृष्टि से पंचायत चुनावों में विलम्ब किया गया, बहाने लगाए गए और विभिन्न प्रकार के अड़ंगे पेश किए गए। जब कोर्ट ने निर्देश दिया तब जाकर चुनावी प्रक्रिया शुरू हुई लेकिन उसमें भी कई प्रकार की दखलंदाजी की गई। चुनाव नतीजे भाजपा के पक्ष में आए तो कई नोटीफिकेशन जारी कर अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के चुनावों को बदलने का प्रयास किया गया। अधिकारियों के जरिए सत्ता दबाव बनाया जा रहा है। खरीदो फरोख्त को बढ़ावा दिया जा रहा है। कांग्रेस सत्ता के बल पर अपने पक्ष में जनमत करने में जुटी हुई है लेकिन यह प्रयास सफल नहीं हुआ है।
अपने हकों के लिए आंदोलन कर रहे कर्मचारी
अनुराग ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस ने झूठी गारंटियां दी थी। युवा रोजगार का इंतजार कर रहे हैं, दूध 100 रुपए लीटर खरीदने और गोबर 2 रुपए किलो खरीदने जैसी अनेक गारंटियां दी गई थी परन्तु उन्हें पूरा नहीं किया गया। प्रदेश में उलटे बिजली महंगी कर दी गई है। अनेक प्रकार के सैस लगाए गए हैं। कर्मचारी और सेवानिवृत्त कर्मचारी अपने हकों को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं। वर्षों से डीए की किश्त नहीं मिल रही है, एचआरटीसी के कर्मियों को अपने हकों के लिए सड़कों तक आना पड़ा। हर वर्ग इस समय हताश और परेशान है।