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राष्ट्रीय

जनजातीय समाज के नेतृत्व और आत्मविश्वास का केंद्र बने केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय: राष्ट्रपति मुर्मु

30 जून, 2026 07:56 PM

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मंगलवार को आंध्र प्रदेश के विजयनगरम में केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में हिस्सा लिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को जनजातीय समाज के आत्मविश्वास, नेतृत्व और नीति निर्माण क्षमताओं को बढ़ावा देने वाला प्रमुख केंद्र बनना चाहिए तथा शिक्षा के माध्यम से जनजातीय समुदायों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए।

जनजातीय समाज के विकास की जिम्मेदारी
राष्ट्रपति ने कहा कि केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय पर अनेक विशेष जिम्मेदारियां हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय के उद्देश्य से स्थापित ऐसे संस्थानों का दायित्व केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें जनजातीय समाज की शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, आजीविका और वनाधिकारों के क्षेत्र में भी जमीनी स्तर पर कार्य करना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि विश्वविद्यालय आने वाले वर्षों में जनजातीय युवाओं के सर्वांगीण विकास और क्षेत्र के समग्र उत्थान के लिए सार्थक प्रयास करेगा।

स्थानीय संसाधनों और उद्यमिता को मिले बढ़ावा
द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि प्रत्येक विश्वविद्यालय, विशेषकर जनजातीय विश्वविद्यालयों में, ऐसी नवाचारी व्यवस्थाएं विकसित की जानी चाहिए, जिनसे वन उपज, हस्तशिल्प, मिलेट, औषधीय पौधों, इको-टूरिज्म और स्थानीय उद्यमिता जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा मिल सके। इससे जनजातीय समाज की आजीविका मजबूत होगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।

कौशल विकास और संस्कृति से जुड़े रहने की सलाह
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव होता है, जो उन्हें भविष्य के लिए नए संकल्प लेने की प्रेरणा देता है। उन्होंने विद्यार्थियों से तेजी से बदलते दौर में स्वयं को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए नए कौशल विकसित करने पर ध्यान देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ अपने परिवेश से सीखते हुए व्यावहारिक कौशल विकसित करने चाहिए। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों से अपने समुदाय, संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहते हुए समाज और देश के भविष्य को बेहतर बनाने में योगदान देने का आह्वान किया।

आधुनिक विज्ञान और परंपरा का समन्वय जरूरी
राष्ट्रपति ने कहा कि विकसित हो रहे भारत में सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहते हुए आधुनिक विज्ञान के लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से विश्वविद्यालय उत्तरी आंध्र प्रदेश के जनजातीय समुदायों के सशक्तिकरण के लिए ‘साइंस एंड टेक्नोलॉजी हब’ का संचालन कर रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय जनजातीय कल्याण, सार्वजनिक स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा तथा ऊर्जा संरक्षण जैसे विषयों पर अकादमिक और जमीनी स्तर पर कार्य कर रहा है, जो विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

विकसित भारत-2047 के लक्ष्य में निभाएगा अहम भूमिका
द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने के लक्ष्य की प्राप्ति में केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समावेशी, व्यावहारिक और पर्यावरण संरक्षण पर आधारित शिक्षा के माध्यम से यह विश्वविद्यालय जनजातीय युवाओं को आधुनिक शिक्षा से जोड़ते हुए देश के समतापरक विकास में उनकी प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करेगा।

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