Friday, September 04, 2026
BREAKING
17 घंटे 39 मिनट चली हरियाणा विधानसभा की कार्यवाही, 15 विधेयक और 2 सरकारी संकल्प पारित हरियाणा सरकार ने गन्ना किसानों के लिए सब्सिडी योजनाओं का किया ऐलान शिक्षकों की भूमिका केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं, विद्यार्थियों के मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत बनें : राज्यपाल घोष कैग रिपोर्ट ने खोली भाजपा सरकार के ‘पारदर्शी सुशासन’ की पोल: राव नरेंद्र सिंह दलित सम्मान और संवैधानिक अधिकारों से समझौता स्वीकार नहीं : कुमारी सैलजा हरियाणा: सोनीपत के खरखौदा में केएमपी एक्सप्रेसवे ट्रक से टकराई इको कार, तीन लोगों की मौत हरसिमरत कौर बादल ने 'आप' सरकार पर लगाए गंभीर आरोप, कहा-पंजाब में आवाज उठाने वालों को दबाया जा रहा मोहाली में CP-67 मॉल के बाहर चली गोलियां, इलाके में दहशत का माहौल Golden Temple में बेअदबी से मचा हड़कंप! माथा टेकने पहुंचा युवक, फिर कर दी ऐसी हरकत... Shimla: सस्ते राशन डिपुओं में सिर्फ 33 रुपए मिलेगी चीनी, बाजार में 70-75 रुपए दाम

हिमाचल

हिमाचल में जल संरक्षण का नया मॉडल बन रहे हरोली के तालाब, आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के सहारे पा रहे जीवन

28 जून, 2026 07:28 PM

हिमाचल प्रदेश में पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण की दिशा में हरोली एक नई मिसाल बन रहा है। वर्षों से गाद जमने, बरसाती बहाव और बदलती परिस्थितियों के कारण अपनी उपयोगिता खो रहे तालाब अब आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के सहारे नया जीवन पा रहे हैं। 11.75 करोड़ रुपये की परियोजना के तहत जल शक्ति विभाग पुबोवाल, दुलैहड़, गोंदपुर जयचंद समेत विभिन्न तालाबों का वैज्ञानिक तरीके से पुनर्जीवन कर रहा है। इसका उद्देश्य वर्षा जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण, जल गुणवत्ता में सुधार और भविष्य की जल जरूरतों के लिए टिकाऊ जल प्रबंधन व्यवस्था विकसित करने के साथ ही तालाबों का सौंदर्यीकरण भी है।


परियोजना के तहत तालाबों से गाद हटाने, तटबंध मजबूत करने तथा भूजल पुनर्भरण (जमीन के भीतर पानी का दोबारा संग्रह) की संरचनाएं विकसित की जा रही हैं। साथ ही जलग्रहण क्षेत्रों (जहां से वर्षा का पानी तालाब तक पहुंचता है) में सुधार किया जा रहा है। जहां आवश्यकता है, वहां निर्मित आर्द्रभूमि (पौधों और प्राकृतिक प्रक्रियाओं से पानी साफ करने वाली व्यवस्था), इन-सीटू ट्रीटमेंट सिस्टम (तालाब के भीतर ही पानी को साफ करने की तकनीक) तथा एरेशन सिस्टम (पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने वाली व्यवस्था) का उपयोग कर जल गुणवत्ता सुधारी जा रही है। वहीं कैस्केड संरचनाओं (बरसाती पानी के साथ आने वाली गाद और ठोस अपशिष्ट को रोकने वाली चरणबद्ध संरचनाएं) के माध्यम से तालाबों की प्राकृतिक क्षमता को भी बढ़ाया जा रहा है।


हर तालाब के लिए अलग वैज्ञानिक योजना
जल शक्ति विभाग ऊना के अधीक्षण अभियंता नरेश धीमान के अनुसार इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि सभी तालाबों के लिए एक जैसी योजना नहीं बनाई गई। प्रत्येक तालाब की भौगोलिक स्थिति, जलग्रहण क्षेत्र, जल स्रोत, प्रदूषण की स्थिति और स्थानीय आवश्यकताओं का अलग-अलग अध्ययन कर उसके अनुरूप तकनीकी समाधान तैयार किए गए हैं। यही वैज्ञानिक दृष्टिकोण इस परियोजना को अन्य योजनाओं से अलग बनाता है।


58 लाख घन मीटर बढ़ेगी भूजल पुनर्भरण क्षमता
जल शक्ति विभाग हरोली के अधिशासी अभियंता पुनीत शर्मा ने बताया कि पहले चरण में पुबोवाल, दुलैहड़ और गोंदपुर जयचंद सहित प्रमुख तालाबों में कार्य चल रहे हैं। पुबोवाल तालाब के पुनर्जीवन पर लगभग दो करोड़ रुपये तथा दुलैहड़ तालाब पर करीब 1.26 करोड़ रुपये की लागत से कार्य किए जा रहे हैं। कई घटकों में 90 से 100 प्रतिशत तक कार्य पूरा हो चुका है, जबकि शेष कार्य विभिन्न चरणों में प्रगति पर हैं। फरवरी 2025 में तैयार व्यवहार्यता रिपोर्ट के अनुसार परियोजना पूरी होने पर चयनित तालाबों के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 58 लाख घन मीटर भूजल पुनर्भरण क्षमता विकसित होगी। इसके अलावा क्षेत्र में लगभग 0.90 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) अतिरिक्त जल उपलब्ध होने की संभावना है। रिपोर्ट के अनुसार पुबोवाल तालाब की वार्षिक पुनर्भरण क्षमता लगभग 32 लाख घन मीटर तथा छह छोटे तालाबों की संयुक्त क्षमता करीब 26 लाख घन मीटर आंकी गई है।


भविष्य की जल सुरक्षा की तैयारी
अधिकारियों के अनुसार हरोली क्षेत्र में वर्षभर सीमित अवधि तक ही वर्षा होती है। ऐसे में वर्षा की प्रत्येक बूंद का संरक्षण इस परियोजना का प्रमुख उद्देश्य है। केंद्रीय भूजल बोर्ड के अनुसार वर्तमान में क्षेत्र 62 प्रतिशत भूजल दोहन के साथ 'सेफ' श्रेणी में है, लेकिन बढ़ती आबादी, जल की बढ़ती मांग और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुए यह पहल भविष्य की जरूरतों के अनुरूप दीर्घकालिक तैयारी मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़ने का यह मॉडल भविष्य में हिमाचल प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है। जल संरक्षण के साथ-साथ इन तालाबों के पुनर्जीवन से पर्यावरण संरक्षण, जलीय जैव विविधता, प्राकृतिक सौंदर्य और स्थानीय स्तर पर ईको-टूरिज्म की संभावनाओं को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। जल शक्ति विभाग हमीरपुर ज़ोन के मुख्य अभियंता रोहित दूबे का कहना है कि पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण आज की आवश्यकता होने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों की जल सुरक्षा का भी आधार है। इसी सोच के साथ हरोली में विकास और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के बीच संतुलन साधते हुए ऐसा मॉडल विकसित किया जा रहा है, जो वर्षा जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ मजबूती देगा। यह मॉडल भविष्य में प्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी मार्गदर्शक बनेगा।

 

Have something to say? Post your comment

और हिमाचल खबरें

Shimla: सस्ते राशन डिपुओं में सिर्फ 33 रुपए मिलेगी चीनी, बाजार में 70-75 रुपए दाम

Shimla: सस्ते राशन डिपुओं में सिर्फ 33 रुपए मिलेगी चीनी, बाजार में 70-75 रुपए दाम

"हिमाचल की चुनौतियों का तकनीकी समाधान खोजें युवा", दीक्षांत समारोह में बोले राज्यपाल कविंद्र गुप्ता

लोगों को जल्द मिलेगी बड़ी राहत, 50 वर्ष के इंतजार के बाद सुजानपुर में बन रहा बस स्टैंड

लोगों को जल्द मिलेगी बड़ी राहत, 50 वर्ष के इंतजार के बाद सुजानपुर में बन रहा बस स्टैंड

विधानसभा: पुलिस भर्ती के लिए आए 98,719 आवेदन, अब आवेदन तिथि नहीं बढ़ेगी : सुक्खू

विधानसभा: पुलिस भर्ती के लिए आए 98,719 आवेदन, अब आवेदन तिथि नहीं बढ़ेगी : सुक्खू

विधानसभा : सिंगल टीचर वाले स्कूलों के लिए नई नीति लाएंगे : सुक्खू

विधानसभा : सिंगल टीचर वाले स्कूलों के लिए नई नीति लाएंगे : सुक्खू

Shimla: बिना मंत्रिमंडल गठन के सीएम सुक्खू ने की तालाबंदी, आज भी 3214 स्कूलों में एक ही शिक्षक : जयराम

Shimla: बिना मंत्रिमंडल गठन के सीएम सुक्खू ने की तालाबंदी, आज भी 3214 स्कूलों में एक ही शिक्षक : जयराम

विधानसभा : सरकारी विश्वविद्यालयों में लोक सेवा आयोग से होगी शिक्षकों की भर्ती

विधानसभा : सरकारी विश्वविद्यालयों में लोक सेवा आयोग से होगी शिक्षकों की भर्ती

Shimla: हिम चंडीगढ़ अति आधुनिक और टिकाऊ शहरी केंद्र के रूप में होगा विकसित : सीएम

Shimla: हिम चंडीगढ़ अति आधुनिक और टिकाऊ शहरी केंद्र के रूप में होगा विकसित : सीएम

विधानसभा : जनगणना के बाद ओबीसी आरक्षण पर होगा फैसला : सुक्खू

विधानसभा : जनगणना के बाद ओबीसी आरक्षण पर होगा फैसला : सुक्खू

विधानसभा: पात्र पंचायत चौकीदार होंगे नियमित : सुक्खू

विधानसभा: पात्र पंचायत चौकीदार होंगे नियमित : सुक्खू