केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने मंगलवार को नई दिल्ली में इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (आईएलबीएस) के 10वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। नड्डा ने संस्थान से उपाधि प्राप्त करने वाले छात्रों को संबोधित करते हुए दीक्षांत समारोह को उनकी शैक्षणिक और व्यावसायिक यात्रा का महत्वपूर्ण अवसर बताया।
उन्होंने छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि उन्हें यकृत एवं पित्त विज्ञान संस्थान (आईएलबीएस) जैसे विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त और प्रतिष्ठित संस्थान से डिग्री प्राप्त करने का सौभाग्य मिला है जिसे रोगी देखभाल, चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार में उत्कृष्टता के लिए विशिष्टता हासिल है।
नड्डा ने लोक स्वास्थ्य के क्षेत्र में संस्थान के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि आईएलबीएस देश भर के घर-परिवारों में फैटी लिवर रोग के बारे में जागरूकता पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। संस्थान ने अपनी अग्रणी नैदानिक सेवाओं, अनुसंधान और जन जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से फैटी लिवर रोग, इसके जोखिम से संबंधित कारकों, रोकथाम और स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभावों की समझ को काफी हद तक बढ़ाया है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इस बात पर बल दिया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में सरकार ने चिकित्सा शिक्षा को मजबूत करने के लिए इसके “हार्डवेयर” और “सॉफ्टवेयर” दोनों पर ध्यान केंद्रित करते हुए व्यापक दृष्टिकोण अपनाया है।
उन्होंने इस दृष्टिकोण की व्याख्या करते हुए कहा कि “हार्डवेयर” में जहां विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचा, चिकित्सा संस्थान और स्वास्थ्य सुविधाएं शामिल हैं। वहीं, “सॉफ्टवेयर” में कामकाज के अनुकूल वह विशेष परिवेश, नीतिगत ढांचा और शैक्षणिक वातावरण शामिल है जो छात्रों, शोधकर्ताओं और स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने वाले पेशेवरों को उत्कृष्टता प्राप्त करने में सक्षम बनाता है।
उन्होंने कहा कि किसी राष्ट्र की स्वास्थ्य प्रणाली की वास्तविक शक्ति केवल संस्थानों के निर्माण में नहीं बल्कि एक ऐसे अनुकूल परिवेश के निर्माण में निहित है जहां उत्कृष्टता फल-फूल सके।
केंद्रीय मंत्री नड्डा ने नीतिगत सुधारों के परिवर्तनकारी प्रभाव पर बल देते हुए कहा कि छात्रों को यह समझना चाहिए कि दूरदर्शी नीति निर्माण और सहायक वातावरण मिलकर किस प्रकार से स्थायी परिवर्तन लाते हैं। उन्होंने बताया कि बीसवीं शताब्दी के अंत में भारत में केवल एक एम्स था।
उन्होंने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में छह और एम्स को स्वीकृति दी गई। तब से अब तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सोलह नए एम्स चालू हो चुके हैं। इसके साथ ही देश में एम्स की कुल संख्या तेईस हो गई है।