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साक्ष्य आधारित शिक्षा सुधारों की ओर बढ़ा उत्तर प्रदेश, कक्षा-कक्ष के अनुभवों से तय होगी नई रणनीति

30 जून, 2026 07:54 PM

उत्तर प्रदेश सरकार ने बुनियादी शिक्षा सुधारों को नई दिशा देते हुए कक्षा-कक्ष में होने वाले वास्तविक अधिगम को शिक्षा नीति का केंद्र बनाया है। पहली बार शिक्षकों के अनुभव, बच्चों के सीखने के साक्ष्य, परख के निष्कर्ष, टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेज (टीएलपीएस) अध्ययन तथा निपुण भारत मिशन के जमीनी अनुभवों को एक मंच पर लाकर भविष्य की शैक्षणिक रणनीति पर व्यापक मंथन किया गया।

नीति-निर्माताओं और शिक्षाविदों ने किया मंथन
बेसिक शिक्षा विभाग और लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (एलएलएफ) के संयुक्त तत्वावधान में लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के प्लूटो ऑडिटोरियम में ‘पॉलिसी टू प्रैक्टिस डायलॉग’ तथा टीएलपीएस उत्तर प्रदेश राज्य रिपोर्ट-2025 के विमोचन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने की। इसमें नीति-निर्माताओं, वरिष्ठ शिक्षा अधिकारियों, राष्ट्रीय एवं राज्य शिक्षक पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों, एसआरजी, एआरपी, बीईओ, डायट विशेषज्ञों तथा शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने विद्यालयी शिक्षा को अधिक गुणवत्तापूर्ण, साक्ष्य आधारित और परिणामोन्मुख बनाने की भावी रणनीति पर विचार-विमर्श किया।

निपुण भारत मिशन की प्रगति पर हुई चर्चा
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा महानिदेशक एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी, एससीईआरटी के निदेशक गणेश कुमार, बेसिक शिक्षा निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और एलएलएफ के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। प्रारंभिक सत्र में निपुण भारत मिशन की प्रगति, शिक्षा सुधारों के प्रभाव, कक्षा-कक्ष में आए बदलाव तथा अधिगम गुणवत्ता सुधार के लिए अपनाई गई रणनीतियों का प्रस्तुतीकरण किया गया। परख के निष्कर्ष, प्रभावी शिक्षण की 10 प्रमुख पद्धतियां, 15 कैच-अप रणनीतियां, हॉलीस्टिक प्रोग्रेस कार्ड, अकादमिक कैलेंडर तथा निपुण उत्तर प्रदेश 2.0 की रूपरेखा पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

टीएलपीएस-2025 रिपोर्ट का हुआ विमोचन
क्वालिटी यूनिट के प्रभारी आनंद कुमार पाण्डेय ने प्रस्तुतीकरण किया। इस दौरान टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेज सर्वे (टीएलपीएस)-2025 उत्तर प्रदेश रिपोर्ट का विमोचन भी किया गया। रिपोर्ट में आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता (एफएलएन) को मजबूत बनाने के लिए कक्षा-कक्ष में हो रहे वास्तविक बदलावों का साक्ष्य आधारित विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। इसमें कक्षा 1 और 2 में भाषा एवं गणित शिक्षण, कक्षा का वातावरण, पाठ योजना, शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाएं, शिक्षण समय के उपयोग, शिक्षक प्रशिक्षण, अकादमिक सहयोग तथा निपुण भारत मिशन के प्रभाव का विस्तृत अध्ययन शामिल है।

कक्षा-कक्ष में बदलाव को माना सफलता का पैमाना
रिपोर्ट के अनुसार शिक्षा सुधारों की वास्तविक सफलता का आधार कक्षा-कक्ष में दिखाई देने वाला परिवर्तन और बच्चों के सीखने के स्तर में सुधार है। नवंबर-दिसंबर 2024 के दौरान बहराइच, रायबरेली, मिर्जापुर और बरेली के 200 विद्यालयों में किए गए अध्ययन के आधार पर प्रभावी शिक्षण पद्धतियों, बच्चों की सहभागिता, शिक्षक क्षमता विकास, सतत अकादमिक मेंटरिंग तथा विद्यालय स्तर पर आवश्यक सुधारों की पहचान की गई है। रिपोर्ट भविष्य की शैक्षणिक रणनीतियों को अधिक साक्ष्य आधारित, परिणामोन्मुख और बच्चों की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने का मार्ग भी सुझाती है।

प्रशिक्षण और मेंटरिंग को मजबूत बनाने पर जोर
‘स्ट्रेंथनिंग क्लासरूम प्रैक्टिसिज फॉर फाउंडेशनल लर्निंग’ विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अधिक डेमो आधारित और व्यावहारिक बनाने, अधिगम में पीछे रह गए बच्चों के लिए प्रभावी कैच-अप रणनीतियां अपनाने, शिक्षकों की सतत मेंटरिंग को मजबूत करने तथा बच्चों में प्रश्न पूछने की झिझक दूर कर जिज्ञासापूर्ण शिक्षण वातावरण विकसित करने पर जोर दिया गया। साथ ही एसआरजी, एआरपी और शिक्षकों के उत्कृष्ट कार्यों की सराहना करते हुए ब्लॉक स्तर पर नियमित शैक्षणिक समीक्षा और प्रभावी अकादमिक सहयोग को शिक्षा सुधारों की सफलता का महत्वपूर्ण आधार बताया गया।

शिक्षकों के अनुभवों से बनेगी आगे की रणनीति
पैनल चर्चा में डायट वाराणसी के प्राचार्य उमेश कुमार शुक्ला, गाजीपुर के खंड शिक्षा अधिकारी राजीव यादव, गौतम बुद्ध नगर की एसआरजी सदस्य रश्मि त्रिपाठी तथा पीएम श्री प्राथमिक विद्यालय मूरघाट, बस्ती के प्रधानाध्यापक सर्वेष्ठ कुमार ने अपने अनुभव साझा किए। इसके बाद अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने राष्ट्रीय एवं राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों, एसआरजी, एआरपी और बीईओ के साथ संवाद किया। उन्होंने प्रभावी अकादमिक कैलेंडर, पठन अभियान, आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता, कैच-अप लर्निंग, हॉलीस्टिक प्रोग्रेस कार्ड, शिक्षक-नेतृत्व वाले नवाचार, बहुस्तरीय कक्षाओं के शिक्षण तथा कक्षा 3 से 5 तक निपुण लक्ष्यों के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की।

साक्ष्य आधारित नीति निर्माण पर रहेगा फोकस
समापन सत्र में प्रतिभागियों ने विद्यालयी शिक्षा को अधिक परिणामोन्मुख बनाने के लिए अपने सुझाव साझा किए। कार्यक्रम में यह स्पष्ट संदेश उभरकर सामने आया कि उत्तर प्रदेश में शिक्षा सुधारों का अगला चरण साक्ष्य आधारित नीति निर्माण, शिक्षक क्षमता विकास, सतत अकादमिक सहयोग, प्रभावी मेंटरिंग और कक्षा-कक्ष केंद्रित नवाचारों पर आधारित होगा। विशेषज्ञों ने कहा कि किसी भी शिक्षा नीति की सफलता का वास्तविक आकलन तभी होगा, जब उसका प्रभाव प्रत्येक बच्चे के अधिगम स्तर में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

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