शिमला : मंडी की भाजपा सांसद कंगना रनौत द्वारा नई पीढ़ी के युवाओं (जेन-जी) को लेकर की गई विवादित टिप्पणी के अब हिमाचल प्रदेश में सियासत गर्मा गई है। प्रदेश के लोक निर्माण विभाग मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कंगना पर तीखा जुबानी हमला बोलते हुए उनके बयानों को देश के युवाओं का घोर अपमान करार दिया है। शिमला में मीडिया से बातचीत में विक्रमादित्य सिंह ने कंगना की भाषा शैली पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं को कीड़े-मकोड़े और गटर छाप कहना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। मंत्री ने तंज कसते हुए पूछा कि कंगना आखिर ऐसे शब्द कहां से लाती हैं? क्या उन्हें ये शब्द व्हाट्सएप के जरिए मिलते हैं? विक्रमादित्य ने भाजपा को भी कटघरे में खड़ा करते हुए याद दिलाया कि जिन लोगों को कंगना गटर छाप बता रही हैं, उन्हीं के साथ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा प्रैस वार्ताएं करते नजर आते हैं। उन्होंने नसीहत दी कि एक निर्वाचित सांसद को अपनी भाषा की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए।
कंगना ने 3 दिन पहले की थी ये पोस्ट
इस पूरे राजनीतिक बवाल की जड़ कंगना रनौत की वह सोशल मीडिया पोस्ट है, जो उन्होंने 3 दिन पहले सांझा की थी। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कंगना ने युवाओं (विशेषकर जेन-जी) के आचरण पर सवाल उठाए थे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के कुछ वीडियो देखकर घिन आने की बात कही और उनकी परवरिश पर भी सवाल खड़े किए थे। उसी पोस्ट में कंगना ने आधुनिक महिलाओं पर पश्चिमी सोच के प्रभाव को लेकर बेहद तल्ख टिप्पणी की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ महिलाएं नशे, शराब और कई पुरुषों के साथ संबंधों को ही अपनी आजादी मान बैठी हैं। कंगना ने इन युवाओं के लिए गटर जेनरेशन और गटर छाप जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए लिखा था कि ऐसी महिलाएं न तो समाज के लिए उपयोगी हैं और न ही कभी अच्छी गृहिणी बन सकती हैं।
कांग्रेस ने बनाया युवाओं के सम्मान का मुद्दा
कंगना की इस टिप्पणी के बाद देश के कई हिस्सों में उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई और पुतले फूंके गए। अब हिमाचल में भी कांग्रेस ने इसे युवाओं के अपमान का मुद्दा बनाकर भाजपा को घेरना शुरू कर दिया है। लोकसभा चुनाव में मंडी सीट से कंगना के मुख्य प्रतिद्वंद्वी रहे विक्रमादित्य सिंह ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए साफ कर दिया है कि युवाओं के खिलाफ ऐसा जहर उगलना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पेलेट गन का इस्तेमाल लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ
वहीं इस विवाद के बीच विक्रमादित्य सिंह ने कानून-व्यवस्था से जुड़ा एक बेहद गंभीर मुद्दा भी उठाया। उन्होंने हालिया प्रदर्शनों के दौरान पुलिस द्वारा पेलेट गन के इस्तेमाल पर गहरी आपत्ति जताई। मंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध-प्रदर्शनों से निपटने के लिए पेलेट गन जैसे हथियारों का इस्तेमाल कतई उचित नहीं ठहराया जा सकता।