चंडीगढ़ : हरियाणा विधानसभा में शुक्रवार को महिला सशक्तीकरण विषय पर केंद्रित युवा संवाद का आयोजन किया गया। शहीद ऊधम सिंह के शहीदी दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम में देश के 14 से अधिक राज्यों से आए करीब 90 युवा प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। हरियाणा विधान सभा और स्वयंसेवी संस्था 'राजधानी युवा संसद', नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित इस संवाद का उद्देश्य युवाओं में लोकतांत्रिक मूल्यों, राष्ट्र निर्माण और महिला सशक्तीकरण के प्रति जागरूकता विकसित करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए हरियाणा विधान सभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने युवाओं का आह्वान किया कि वे अपने व्यक्तिगत और पारिवारिक हितों के साथ-साथ देशहित को भी समान प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार प्रत्येक व्यक्ति अपने और अपने परिवार के भविष्य के लिए योजनाएं बनाता है, उसी प्रकार राष्ट्र के विकास और प्रगति के बारे में भी गंभीरता से सोचना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण का संकल्प तभी साकार होगा, जब युवा अपनी ऊर्जा, प्रतिभा और क्षमता को राष्ट्रहित में समर्पित करेंगे। विधान सभा अध्यक्ष ने प्रतिभागियों को कैपिटल कॉम्पलेक्स और हरियाणा विधान सभा के इतिहास से परिचित करवाते हुए संसदीय लोकतंत्र में विधायिका की महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि देश विभाजन के बाद पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की संयुक्त राजधानी शिमला रही। बाद में चंडीगढ़ को पंजाब और हरियाणा की राजधानी बनाया गया तथा 6 मार्च, 1961 को पहली बार कैपिटल कॉम्पलेक्स स्थित इस ऐतिहासिक विधान भवन में सदन की बैठक आयोजित हुई। उन्होंने कहा कि यह भवन अनेक ऐतिहासिक निर्णयों, दूरदर्शी नीतियों और महान नेताओं के विचार-विमर्श का साक्षी रहा है।
शहीद ऊधम सिंह के बलिदान को नमन करते हुए विस अध्यक्ष ने कहा कि उनका अदम्य साहस, राष्ट्रभक्ति और सर्वोच्च बलिदान आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि ऐसे महान क्रांतिकारियों के जीवन से प्रेरणा लेकर प्रत्येक युवा को राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करना चाहिए।
महिला सशक्तीकरण पर अपने विचार रखते हुए विधान सभा अध्यक्ष ने कहा कि भारतीय संस्कृति में आदिकाल से मातृशक्ति को सर्वोच्च सम्मान दिया गया है। पराधीनता के लंबे कालखंड में समाज में कुछ विकृतियां अवश्य आईं, लेकिन स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद महिलाओं के सम्मान, शिक्षा, अधिकारों और समान अवसरों की दिशा में निरंतर प्रभावी प्रयास किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि आज का भारत महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना विकसित भारत का लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सकता। उन्होंने युवाओं से केवल अपने अधिकारों के प्रति ही नहीं, बल्कि नागरिक कर्तव्यों के प्रति भी समान रूप से सजग रहने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके जागरूक, अनुशासित और कर्तव्यनिष्ठ नागरिक होते हैं। जब नागरिक अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक पालन करते हैं, तभी लोकतंत्र मजबूत होता है और राष्ट्र निरंतर प्रगति करता है।
जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए विस अध्यक्ष कल्याण ने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति जनता के हाथों में निहित है। जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि जितने अधिक जागरूक, उत्तरदायी और संवेदनशील होंगे, लोकतांत्रिक व्यवस्था उतनी ही सुदृढ़ होगी। उन्होंने कहा कि विधान सभा वह सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच है जहां सरकार जनता की मेहनत की कमाई के प्रत्येक रुपये का जवाब देती है। नियमों और संसदीय परंपराओं के अनुरूप सदन का प्रभावी संचालन ही जनकल्याणकारी शासन की आधारशिला है।
युवा संवाद के दौरान प्रतिभागियों ने महिला सशक्तीकरण, लोकतांत्रिक मूल्यों, नागरिक दायित्वों और विकसित भारत-2047 के लक्ष्य पर विचार साझा किए तथा संसदीय कार्यप्रणाली के विभिन्न पहलुओं की जानकारी भी प्राप्त की। विषय प्रस्तुति के आधार पर प्रथम स्थान पर मनस्वी, द्वितीय स्थान पर तनिक, तृतीय स्थान पर ओसीन शर्मा तथा चौथे स्थान पर भूमिका त्यागी रही। कार्यक्रम में राजधानी युवा संसद की सह-संस्थापक अधिवक्ता ईशा कपूर तथा सह-संस्थापक अधिवक्ता जय सैनी समेत अनेक अधिकारी उपस्थित रहे।