चंडीगढ़ : पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने हरियाणा में बढ़ती बेरोजगारी पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बेरोजगारी दर 15.4 प्रतिशत से ऊपर जा चुकी है और ग्रामीण बेरोजगारी दर 17.5 प्रतिशत हो चुकी है। ये देश के कई पिछड़े और बड़े राज्यों के मुकाबले बहुत अधिक है।
इससे बड़ी चिंता की बात यह है कि सरकार बेरोजगारी पर काबू पाने के लिए कोई कदम नहीं उठा रही। सरकार नौकरी देना तो दूर, कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट(सीईटी) तक नहीं करवा रही है। सीईटी और भर्तियों के इंतजार में युवा ओवर होते जा रहे हैं। सीईटी, भर्ती, रिजल्ट और ज्वाइनिंग जैसी मांगों को लेकर हर बार हरियाणा के युवाओं को आंदोलन करना पड़ता है। हर बार सरकार उन्हें झूठे वादे का झुंझुना पकड़ाकर टरका देती है। सरकार के इस रवैये के चलते प्रदेश के युवा अब पूरी तरह नाउम्मीद हो चुके हैं।
हुड्डा ने कहा कि भाजपा 2 लाख पक्की नौकरियां देने का वादा करके सत्ता में आई थी। लेकिन अबतक इस सरकार ने हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन के तहत कोई भर्ती नहीं की। हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन के तहत जो छुटपुट भर्तियां हुईं, उनमें 35 प्रतिशत का अतिरिक्त मानदंड जोड़कर जानबूझकर ज्यादातर पद खाली छोड़ दिए गए। जिन इक्का-दुक्का पदों पर भर्ती हुई, उनमें भी हरियाणा के बजाय अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों को तरजीह दी गई।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने हरियाणा को बेरोजगारी के दलदल में धकेल दिया है। कांग्रेस सरकार के दौरान पक्की सरकारी नौकरियों की संख्या बढ़ाकर 4 लाख की गई थी, लेकिन आज उनमें से करीब 2 लाख पद खाली पड़े हैं। सरकार भर्ती करने के बजाय युवाओं को कौशल निगम की ठेका प्रथा के हवाले कर रही है। इसी कारण उच्च शिक्षा हासिल करने के बावजूद युवाओं को दिहाड़ी मजदूरी और चाय बेचकर गुजारा करना पड़ रहा है। NET, PhD, B.Ed, JBT, MA, HTET और CTET क्वालीफाइड युवा दुकानों पर नींबू-मिर्च टांगने का काम करने को मजबूर हैं।
उन्होंने आगे कहा कि बड़ी संख्या में हरियाणा के युवा बेरोजगारी से निराश होकर अपराध और नशे की दलदल में फंस रहे हैं। हरियाणा बेरोजगारी ही नहीं, अपराध के मामले में भी देश में शीर्ष पर पहुंच चुका है। इसी वजह से प्रदेश में नया निवेश नहीं आ रहा और रोजगार सृजन भी नहीं हो रहा। भाजपा ने हरियाणा के युवाओं को बेरोजगारी, अपराध और नशे के दुष्चक्र में फंसा दिया है।