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हिमाचल

सुक्खू सरकार पर चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप, भाजपा ने राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन, रखी ये मांगें

25 मई, 2026 08:04 PM

शिमला : हिमाचल प्रदेश भाजपा ने सुक्खू सरकार पर चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाया है। आचार संहिता उल्लंघन की शिकायत को लेकर हिमाचल प्रदेश भाजपा ने प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल के नेतृत्व में राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा है। राज्यपाल को दिए गए ज्ञापन में भाजपा ने आरोप लगाते हुए कहा है कि सत्ता पक्ष चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग करने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास कर रहा है। चुनावी प्रक्रिया के बीच चेयरमैन एवं वाइस चेयरमैन के चुनावों को प्रभावित करने हेतु नियमों एवं अधिसूचनाओं में बदलाव की चर्चाएं एवं प्रयास लोकतंत्र की मूल भावना पर सीधा हमला है। चुनाव प्रक्रिया प्रारंभ होने के बाद नियम बदलना न केवल जनादेश का अपमान है बल्कि यह संविधान की आत्मा एवं लोकतांत्रिक परंपराओं के भी विपरीत है।


याचिका में यह स्पष्ट कहा गया है कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को समय पर अधिकार न देना तथा गजट अधिसूचना जारी करने में देरी करना संविधान की मूल भावना के विपरीत है। साथ ही यह भी कहा गया है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के स्थान पर अप्रत्यक्ष नौकरशाही नियंत्रण को जारी रखना संविधान के भाग IX-A की भावना का उल्लंघन है।


याचिका में आगे कहा गया कि आचार संहिता लागू होने के बावजूद 22 मई 2026 को राज्य सरकार द्वारा कैबिनेट बैठक आयोजित की गई। यह अपने आप में गंभीर प्रश्न खड़े करता है। चुनावी प्रक्रिया के दौरान ऐसी कैबिनेट बैठक आयोजित करने और उसमें मतदाताओं को प्रभावित करने वाले फैसले लेना चुनावी निष्पक्षता की भावना के विपरीत है।


कैबिनेट में सरकार ने लिए ये फैसले

  • इंदिरा गांधी प्यारी बहना योजना में बदलाव किया
  • 2 लाख से कम वार्षिक आय वाली महिलाओं को प्रतिमाह 1500 रुपए देने का फैसला
  • विभिन्न विभागों में 2215 पद भरने की मंजूरी
  • CBSE स्कूलों में 1500 शिक्षकों की भर्ती को मंजूरी
  • कॉलेज प्रोफेसरों की सेवानिवृत्ति आयु 62 से बढ़ाकर 63 वर्ष की गई
  • PWD के मल्टी टास्क वर्करों का वेतन 5500 से बढ़ाकर 6000 रुपए किया गया।
  • सिलाई अध्यापिकाओं के मानदेय में 1000 रुपए की बढ़ोतरी की गई।
  • हिम चंडीगढ़ परियोजना के लिए 8000 बीघा भूमि उपलब्ध करवाने का निर्णय लिया गया।
  • शिक्षा बोर्ड के 300 स्कूलों में CBSE जैसी सुविधाएं उपलब्ध करवाने का फैसला लिया गया।
  • फिशिंग रॉयल्टी 7 प्रतिशत से घटाकर 1 प्रतिशत करने का फैसला लिया गया।
  • परागपुर में नए SDM कार्यालय को मंजूरी दी गई।
  • प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के लिए आयोग का गठन करने का फैसला लिया गया।
  • आयोग को उपमंडलों, तहसीलों, उपतहसीलों एवं विकास खंडों की समीक्षा का अधिकार दिया गया।
  • प्रदेश की वर्तमान प्रशासनिक संरचना- 12 जिले 81 उपमंडल, 92 विकास खंड एवं 193 तहसील-उपतहसीलों की समीक्षा करने का फैसला लिया गया।
  • आवश्यकता अनुसार नई प्रशासनिक इकाइयों के गठन की संभावना व्यक्त की गई।


भाजपा ने ज्ञापन के जरिए राज्यपाल से कहा कि सरकार द्वारा लिए गए ये सभी फैसले सीधे तौर पर मतदाताओं, कर्मचारियों, महिलाओं, युवाओं एवं विभिन्न वर्गों को प्रभावित करने वाले हैं। चुनाव प्रक्रिया के दौरान भर्ती, मानदेय बढ़ोतरी, प्रशासनिक इकाइयों का गठन, नई घोषणाएं एवं वित्तीय लाभों से जुड़े फैसले करना चुनाव आचार संहिता की भावना के विपरीत है। इससे यह स्पष्ट रूप से प्रतीत होता है कि चुनावी लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से योजनाबद्ध तरीके से घोषणाएं की गईं ताकि मतदाताओं को प्रभावित किया जा सके।

भाजपा ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में प्रदेश की लोकतांत्रिक व्यवस्था एवं चुनावी निष्पक्षता गंभीर चुनौती का सामना कर रही है। भाजपा लोकतंत्र, संविधान एवं स्वतंत्र चुनाव प्रक्रिया की रक्षा के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। अत: भाजपा आपकी सेवा में ये मांगें करती है-

  • चुनाव आचार संहिता लागू होने के दौरान की गई कैबिनेट बैठक एवं उसमें लिए गए फैसलों की तत्काल संवैधानिक एवं प्रशासनिक समीक्षा करवाई जाए।
  • चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक ऐसे सभी फैसलों, घोषणाओं एवं अधिसूचनाओं के क्रियान्वयन पर तत्काल रोक लगाई जाए।
  • चुनाव प्रक्रिया के दौरान नियमों एवं अधिसूचनाओं में बदलाव कर चुनाव प्ररिणामों को प्रभावित करने के प्रयासों की न्यायिक एवं प्रशासनिक जांच करवाई जाए।
  • चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने हेतु सरकारी मशीनरी एवं प्रशासनिक संसाधनों के उपयोग की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच करवाई जाए।
  • निर्वचित जनप्रतिनिधियों को प्रभावित करने, दबाव बनाने एवं लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच करवाई जाए।
  • हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए।
  • नगर निकाय एवं पंचायती राज चुनावों को पूर्णत स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी वातावरण में संपन्न कराने हेतु आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं।
  • चुनावों की प्रभावित करने के उद्देश्य से की गई घोषणाओं एवं निर्णयों को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।

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