करटोली/दौलतपुर चौक : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जालंधर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बहुप्रतीक्षित नंगल-तलवाड़ा रेल परियोजना के तहत तैयार एक अहम हिस्से को राष्ट्र को समर्पित किया। प्रधानमंत्री ने हिमाचल प्रदेश के दौलतपुर चौक से पंजाब के करटोली तक नवनिर्मित रेल लाइन का विधिवत उद्घाटन किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर उन्होंने 'करटोली-अंबाला एक्सप्रेस' ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना भी किया, जिससे क्षेत्र के लोगों को बेहतरीन यातायात सुविधा मिलेगी।
677 करोड़ की लागत और इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट नमूना है 10.55 KM लंबा ट्रैक
दौलतपुर चौक से करटोली के बीच तैयार किया गया यह नया ब्रॉडगेज रेलखंड लगभग 10.55 किलोमीटर लंबा है। करीब 677 करोड़ रुपए की भारी-भरकम लागत से बनी यह परियोजना सिविल इंजीनियरिंग का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरी है। इस रेलखंड की सबसे बड़ी खासियत इसका 7.80 किलोमीटर लंबा वायाडक्ट (पुलों की शृंखला) है, जिसे उत्तर भारत के सबसे लंबे रेलवे वायाडक्ट्स में गिना जा रहा है।
हजारों टन स्टील का इस्तेमाल, बनाए गए कई ब्रिज और ओवरब्रिज
इस विशाल वायाडक्ट और रेलखंड के निर्माण में मजबूती का विशेष ध्यान रखा गया है। इसके स्ट्रक्चर में लगभग 16,000 मीट्रिक टन स्ट्रक्चरल स्टील और 19,000 मीट्रिक टन टीएमटी सरिया का इस्तेमाल किया गया है। रेलवे प्रशासन के अनुसार इस पूरे खंड पर 3 बड़े पुल, 4 छोटे पुल और 2 ओवरब्रिज बनाए गए हैं। इस परियोजना के लिए कुल 38.37 हैक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया था, जिस पर करीब 12.25 ट्रैक किलोमीटर तक पटरी बिछाने का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।
अमृत भारत योजना से संवरा करटोली स्टेशन, तलवाड़ा तक का काम अगले साल होगा पूरा
रेलवे ट्रैक के विस्तार के साथ-साथ करटोली रेलवे स्टेशन को अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत आधुनिक सुख-सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। इस नए ट्रैक के चालू होने से अब करटोली से तलवाड़ा की दूरी महज 14 किलोमीटर रह गई है। रेलवे ने इस शेष हिस्से को आगामी वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
दूसरे चरण का काम तेज, भविष्य में पठानकोट-जम्मू नेटवर्क से जुड़ेगी लाइन
नंगल-तलवाड़ा रेल परियोजना के दूसरे चरण के तहत तलवाड़ा से मुकेरियां तक 28.7 किलोमीटर लंबे रेलखंड पर भी निर्माण कार्य युद्धस्तर पर जारी है। इस हिस्से में करीब 70 प्रतिशत पुलों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। रणनीतिक और यातायात की दृष्टि से यह रेल लाइन बेहद अहम है, क्योंकि भविष्य में यह ट्रैक सीधा पठानकोट-जम्मू रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगा, जो इस क्षेत्र के विकास में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा।