शिमला : हिमाचल प्रदेश में साढ़े चार माह में 814 सडक़ हादसों में 363 लोगों ने जान गवाई है, जबकि 1029 लोग घायल हुए हैं। पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष सडक़ हादसों और उनमें मरने वाले लोगों की संख्या में वृद्धि हुई है। प्रदेश में बढ़ रहे सडक़ हादसों को कम करने के लिए ट्रैफिक टूरिस्ट रेलवे पुलिस ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है। राज्य भर में ईडार प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू कर दिया गया है। इस डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से दुर्घटनाओं का न केवल पंजीकरण होगा, बल्कि उनके कारणों और पैटर्न का वैज्ञानिक विश्लेषण कर समय रहते रोकथाम भी की जाएगी। हिमाचल प्रदेश में जनवरी से 15 मई तक साढ़े चार महीने में हिमाचल प्रदेश में विभिन्न जगहों पर पेश आए 814 सडक़ हादसों में 363 लोगों ने जान गवाई है। इसके अलावा 1029 लोग इन सडक़ हादसों में घायल हुए हैं। इसके अलावा 279 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
पुलिस का उद्देश्य ईडार के जरिए इन आंकड़ों को जड़ से कम करना है। यह प्रणाली दुर्घटना के समय, स्थान, कारण, वाहन और पीडि़त से जुड़ी हर जानकारी को डिजिटल रूप से दर्ज करती है, जिससे भविष्य की रणनीति तय की जा सके। डीआईजी टीटीआर संजीव गांधी ने कहा कि ईडार केवल रिपोर्टिंग का माध्यम नहीं है, बल्कि यह ब्लैक स्पॉट्स की पहचान कर वहां पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित करता है। इसका उद्देश्य दुर्घटना होने के बाद कार्रवाई नहीं, बल्कि दुर्घटना से पहले जान बचाना है।
शाम छह से नौ बजे तक ज्यादा हादसे
प्रदेश में शाम छह से नौ बजे तक डेंजर विंडो घोषित की गई है, इस समय सबसे ज्यादा हादसे होते हैं। ट्रैफिक, टूरिस्ट एवं रेलवे विंग के डीआईजी संजीव गांधी ने बताया कि वैज्ञानिक अध्ययन में शाम छह से नौ बजे का समय सबसे अधिक जोखिम वाला पाया गया है। इस दौरान ट्रैफिक दबाव, कम दृश्यता और चालकों की थकान हादसों की बड़ी वजह बनती है। इसी कारण इस समयावधि में राजमार्गों पर विशेष इंटरसेप्टर वाहन और अतिरिक्त गश्ती दल तैनात किए गए हैं।
1.5 लाख रुपए तक कैशलेस इलाज
आम लोगों के लिए ईडार के तीन बड़े फायदे हैं, जिसमें डिजिटल रिपोर्टिंग से सीधे मदद मिलेगी और 1.5 लाख तक कैशलेस इलाज, दुर्घटना की जानकारी ईडार पर दर्ज होने पर पीडि़त को तुरंत कैशलेस उपचार की सुविधा मिलेगी। फास्ट-ट्रैक बीमा दावा डिजिटल रिपोर्ट सीधे मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण को भेजी जाती है, जिससे बीमा क्लेम जल्दी निपटता है।
घायलों की मदद करने पर इनाम
‘राह-वीर’ योजना का लाभ जिसमें दुर्घटना पीडि़तों की मदद करने वाले नागरिकों को इनाम और कानूनी सुरक्षा तभी मिलेगी, जब घटना ईडार में दर्ज होगी। डीआईजी टीटीआर संजीव गांधी का कहना है कि यातायात प्रबंधन में, विशेष रूप से राजधानी क्षेत्र में, ट्रैफिक टूरिस्ट रेलवे पुलिस अधिकारी अत्यंत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं ।
दुर्घटना रोकने की कार्ययोजना
तकनीक, सख्ती और सुधार, शाम छह से नौ बजे तक सघन पुलिस गश्त, स्पीड कैमरों और अल्को-सेंसर से निगरानी, अवैध पार्किंग पर तुरंत कार्रवाई, खतरनाक पहाड़ी मोड़ों पर हाई-विजिबिलिटी साइन बोर्ड, सुरक्षित ड्राइविंग का संदेश आज सतर्क, तो कल सुरक्षित, सतर्क रहें आज, जीवित रहें कल, रफ्तार रोमांच देती है, पर जान भी ले सकती है।