चंडीगढ़ : पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनाए गए कर्मचारियों के नियमितीकरण वाले ऐतिहासिक फैसले का स्वागत किया है। आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने भी हुड्डा के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार द्वारा 16 जून 2014 और 18 जून 2014 को बनाई गई नियमितीकरण (Regularization) नीतियों पर अपनी मुहर लगा दी है। कोर्ट ने दोनों नीतियों को पूरी तरह वैध (Valid) करार दिया है और इन्हें बरकरार रखा है। इस फैसले से हरियाणा के हजारों कच्चे कर्मचारियों की नौकरी अब पूरी तरह सुरक्षित हो गई है। लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता और असमंजस की स्थिति समाप्त हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद कर्मचारियों पर मंडरा रहा खतरा अब टल गया है।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार ने 2014 में कच्चे कर्मचारियों के हित में यह बड़ा फैसला लिया था। लेकिन सत्ताधारी बीजेपी ने बार-बार इस नीति पर सवाल उठाए और कर्मचारियों के भविष्य से खिलवाड़ की कोशिश करी। अब खुद सर्वोच्च अदालत के फैसले ने बीजेपी को करारा जवाब दे दिया है। एकतरफ जहां कांग्रेस सरकार की नीति को अदालत ने उचित करार दिया है, वहीं बीजेपी सरकार द्वारा लागू की गई कोई भी नीति अदालत में ठहर नहीं पाई।
ना तो ये सरकार पक्की नौकरियां दे पा रही है और ना ही कौशल निगम के तहत भर्ती किए जा रहे कच्चे कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित कर पा रही है। जबकि बीजेपी ने चुनाव में झूठा वादा करके 1.25 कच्चे कर्मचारियों के परिवारों से वोट लिया था।
हुड्डा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला हरियाणा के प्रशासनिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम है। ये ना केवल कर्मचारियों के हजारों परिवारों के लिए राहत की सांस है, बल्कि न्याय की जीत भी है। मैं सुप्रीम कोर्ट का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं। इस फैसले के बाद पक्के होने वाले कर्मचारियों ने भी पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का आभार व्यक्त किया है।