नई दिल्ली:वैश्विक चुनौतियों और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था तेज विकास दर्ज कर रही है। शुक्रवार को जारी आरबीआई की ताजा बुलेटिन में कहा गया कि यूरोपीय संघ के साथ हालिया व्यापार समझौता और अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते का ढांचा भारत की विकास गति को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखने में सहायक होगा।
नियंत्रित महंगाई से विकास को समर्थन
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार नियंत्रित महंगाई दर से विकास को समर्थन देने की गुंजाइश मिलती है और वित्तीय स्थिरता भी बनी रहती है। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था की उत्पादक जरूरतों को पूरा करने और विकास की रफ्तार बनाए रखने के लिए केंद्रीय बैंक प्रतिबद्ध है।
मजबूत संकेतक, 7.4% जीडीपी वृद्धि का अनुमान
उच्च आवृत्ति वाले आर्थिक संकेतक 2025-26 की तीसरी तिमाही और उसके बाद भी मजबूत विकास का संकेत देते हैं। वर्ष 2025-26 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.4% रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है। निजी उपभोग और स्थायी निवेश ने विकास को सहारा दिया, हालांकि आयात निर्यात से अधिक रहने के कारण शुद्ध बाहरी मांग कमजोर रही।
सेवा और विनिर्माण क्षेत्र से जीवीए वृद्धि को बल
आपूर्ति पक्ष पर सेवा क्षेत्र के मजबूत योगदान और विनिर्माण गतिविधियों में सुधार से 2025-26 में वास्तविक जीवीए वृद्धि 7.3% रहने का अनुमान है। कॉरपोरेट क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन और असंगठित क्षेत्र की मजबूती से विनिर्माण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जबकि निर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर भी मजबूत रहने की संभावना है।
कृषि और ग्रामीण मांग से आर्थिक गतिविधियों को सहारा
आगे 2026-27 में आर्थिक गतिविधियां मजबूत रहने की उम्मीद है। अच्छे जलाशय स्तर, मजबूत रबी बुवाई और बेहतर फसल स्थिति से कृषि क्षेत्र को समर्थन मिलेगा। बेहतर कृषि गतिविधियों और ग्रामीण श्रम बाजार में सुधार के चलते ग्रामीण मांग स्थिर बनी हुई है, जबकि घरेलू मांग के मजबूत रहने से सेवा क्षेत्र में स्थिरता बनी रहेगी।