भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सभी विनियमित संस्थाओं के लिए कर्ज की ब्याज दरों से जुड़े नियमों को एक समान बनाने के लिए नए मसौदा दिशानिर्देश जारी किए हैं। इनका उद्देश्य मौद्रिक नीति का लाभ कर्ज लेने वालों तक बेहतर तरीके से पहुंचाना, कर्ज के जोखिम के अनुसार उचित ब्याज तय करना और कर्जदारों के साथ उचित व्यवहार सुनिश्चित करना है।
RBI ने बुधवार को ‘रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (इंटरेस्ट रेट्स ऑन लोन्स एंड एडवांसेज) डायरेक्शंस, 2026’ नाम से मसौदा जारी किया। यह मसौदा RBI की 5 अगस्त 2026 को जारी विकासात्मक और नियामकीय नीतियों से जुड़ा है।
प्रस्तावित नियमों में स्थिर और बदलती ब्याज दर वाले कर्ज के लिए एक समान व्यवस्था बनाने की बात कही गई है। इसके तहत 1 अप्रैल 2027 से सभी बदलती ब्याज दर वाले कर्ज की ब्याज दर अधिकतम तीन महीने के भीतर बदली जा सकेगी।
मसौदे के अनुसार, MCLR तय करने के लिए नए जमा और नए कर्ज की भारित लागत के तीन महीने के औसत का इस्तेमाल किया जाएगा।
RBI ने कहा कि फिलहाल ब्याज दरों से जुड़े नियम मुख्य रूप से वाणिज्यिक बैंकों पर लागू होते हैं। इनमें छोटी वित्तीय बैंक और स्थानीय क्षेत्र के बैंक भी शामिल हैं। वहीं, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों, अखिल भारतीय वित्तीय संस्थानों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और सहकारी बैंकों के लिए ब्याज दरों से जुड़े नियम काफी हद तक कर्जदारों के साथ व्यवहार तक सीमित हैं।
केंद्रीय बैंक ने कहा कि अलग-अलग वाणिज्यिक बैंकों में MCLR जैसे आंतरिक मानकों को तय करने की प्रक्रिया में अंतर देखा गया है। वहीं, स्थिर ब्याज दर वाले कर्ज के लिए भी मौजूदा नियम सीमित हैं।
मसौदे में कहा गया है कि बदलती ब्याज दर वाले कर्ज में क्रेडिट जोखिम से जुड़े प्रीमियम को छोड़कर अन्य जोखिम से जुड़े हिस्सों में तीन साल तक बदलाव नहीं किया जा सकेगा। क्रेडिट जोखिम प्रीमियम में बदलाव तभी किया जा सकेगा, जब कर्जदार की जोखिम स्थिति में बदलाव आए।
मौजूदा बदलती ब्याज दर वाले कर्ज को 1 अप्रैल 2029 तक नई व्यवस्था में लाना होगा। इसके लिए कर्जदार की सहमति जरूरी होगी और इसके लिए कोई अतिरिक्त शुल्क या ब्याज दर में बढ़ोतरी नहीं की जा सकेगी।
RBI ने मसौदा नियमों पर 11 सितंबर 2026 तक सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। लोग RBI की वेबसाइट पर ‘कनेक्ट 2 रेगुलेट’ पोर्टल या ईमेल के जरिए अपनी प्रतिक्रिया भेज सकते हैं।
प्राप्त सुझावों की समीक्षा के बाद RBI प्रत्येक श्रेणी की विनियमित संस्था के लिए अंतिम दिशानिर्देश अलग से जारी करेगा।