Friday, October 02, 2026
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बाज़ार

वैश्विक तनावों के बीच बाजार में गिरावट की लहर, सेंसेक्स 300 अंक फिसला, निफ्टी मेटल पर सबसे ज्यादा दबाव

14 अगस्त, 2026 11:52 AM

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में खुला। यह लगातार पांचवां सत्र है जब घरेलू बाजार दबाव में ट्रेड करता नजर आया। अमेरिका द्वारा अनिश्चितकालीन नौसैनिक नाकाबंदी की धमकी के बाद तेल की कीमतों में स्थिरता आने से प्रमुख बेंचमार्क, निफ्टी50 और सेंसेक्स में गिरावट आई।

इस बीच, 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 78,079.96 से 0.22 प्रतिशत यानी 176.53 अंक गिरकर 77,903.43 पर खुला, तो वहीं एनएसई निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 24,395.85 से 0.13 प्रतिशत यानी करीब 34 अंक गिरकर 24,361.90 पर खुला।

खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स करीब 320 अंक यानी 0.41 प्रतिशत लुढ़ककर 77,760.40 पर ट्रेड करता नजर आया, जबकि 74.90 (0.31 प्रतिशत) अंक फिसलकर 24,320.95 पर कारोबार करता दिखाई दिया।

इस दौरान, व्यापक बाजारों का प्रदर्शन भी कमजोर रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.39 प्रतिशत, तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.18 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली।

सेक्टरवार देखें तो, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स को छोड़कर, जिसमें 0.32 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, बाकी सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में ट्रेड करते नजर आए। निफ्टी मेटल सबसे ज्यादा दबाव में दिखाई दिया, जिसमें 1.18 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा, निफ्टी ऑटो में 0.87 प्रतिशत, निफ्टी आईटी में 0.58 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी में 0.53 प्रतिशत और निफ्टी एफएमसीजी में 0.51 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, तकनीकी रूप से निफ्टी के लिए 24,250 से 24,300 का स्तर निकटतम सपोर्ट और 24,500 से 24,550 का स्तर प्रमुख रेजिस्टेंस माना जा रहा है।

पिछले सत्र में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 510 करोड़ के शेयर बेचे और वे नेट सेलर बने रहे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने मजबूत खरीदारी जारी रखी और 4,353 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे, जिससे विदेशी बिकवाली के दबाव से बाजार को सहारा मिला।

एक्सपर्ट्स के अनुसार, निकट भविष्य में बाजार का माहौल सावधानी के साथ सकारात्मक बना हुआ है; कच्चे तेल की कम कीमतें और मजबूत ग्लोबल इक्विटीज से कुछ राहत मिल रही है। हालाकि, जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितता और अहम स्तरों के पास हालिया कंसोलिडेशन (बाजार का एक दायरे में घूमना) के कारण बढ़त सीमित रह सकती है। उतार-चढ़ाव के अपेक्षाकृत नियंत्रित रहने के कारण, सेक्टर रोटेशन और खास शेयरों में खरीदारी अहम कारक बने रहने की संभावना है, जिससे बाजार का कुल रुख एक दायरे में या थोड़ा सकारात्मक रह सकता है।

एक्सपर्ट ने आगे कहा कि निकट भविष्य में बाजार के एक दायरे में रहने की संभावना है। निफ्टी 23,800 और 24,400 के बीच कंसोलिडेट कर रहा है और ऊपरी या निचले स्तर को तोड़ने (ब्रेकआउट) के लिए कोई खास ट्रिगर नहीं मिला है। निफ्टी ऊपरी स्तर को तोड़ने के लिए तैयार था, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच अपेक्षित डील न होने के कारण कच्चे तेल की कीमतें 91 डॉलर के पार चली गईं, जिससे यह कोशिश नाकाम हो गई।

एक्सपर्ट ने बताया कि अब ब्रेंट क्रूड की कीमतें गिरकर 87 डॉलर से नीचे आ गई हैं, जो बाजार के लिए थोड़ी सकारात्मक बात है। हालांकि एफपीआई की बिकवाली कम हो गई है और हाल ही में वे खरीदार बन गए हैं, फिर भी एफआईआई की गतिविधियों में कोई स्पष्ट ट्रेंड अभी तक नहीं दिखा है। अब ज्यादातर गतिविधियां मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में हो रही हैं। यह ट्रेंड जारी रहने की संभावना है। कुछ चुनिंदा प्राइवेट सेक्टर बैंक लंबे समय के लिए 'वैल्यू बाइंग' (सही कीमत पर खरीदारी) के मौके दे रहे हैं।

 

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