चंडीगढ़, : पंजाब, जिसे भारत का अन्न का कटोरा कहा जाता है, आज इतिहास की सबसे भीषण 'जल प्रलय' का सामना कर रहा है। यह सिर्फ बाढ़ नहीं, बल्कि प्रकृति का वह रौद्र रूप है जिसने 1988 की तबाही की यादों को भी धुंधला कर दिया है। सतलुज, ब्यास और रावी का विकराल रूप, दशकों बाद एक साथ आई बाढ़ का ऐसा जलजला है जिसने खेतों की हरियाली को गहरे पानी में दफ्न कर दिया है और गांवों की जिंदगियों को अनिश्चितता के भंवर में फंसा दिया है। चारों ओर सिर्फ पानी है, सिसकियां हैं, और अपनी मेहनत को आंखों के सामने डूबता देखने की बेबसी है।
यह संकट सिर्फ नदियों के उफान तक सीमित नहीं है। आसमान से बरसती आफत ने इस त्रासदी को और भी गहरा कर दिया है। एक तरफ जहां बचाव दल जिंदगी बचाने की जद्दोजहद में जुटे हैं, वहीं मौसम विभाग की भारी बारिश की चेतावनी ने रही-सही उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया है। यह पंजाब के हौसले, जज्बे और सहनशीलता का सबसे बड़ा इम्तिहान है, जहां हर कोई एक ही सवाल पूछ रहा है - आखिर यह तबाही कब थमेगी?
तबाही के आंकड़े: जो अब तक सामने आया
यह बाढ़ सिर्फ पानी का सैलाब नहीं, बल्कि अपने पीछे तबाही का एक विशाल मंजर छोड़ गई है। प्रारंभिक सरकारी आंकड़ों के अनुसार:
1. 7 जिले प्रभावित: गुरदासपुर, पठानकोट, होशियारपुर, कपूरथला, अमृतसर, तरनतारन और फिरोजपुर सबसे ज्यादा प्रभावित हैं ।
2. 500 से ज्यादा गांव डूबे: इन जिलों के 500 से अधिक गांव बाढ़ की सीधी चपेट में हैं, जहां हजारों लोग फंसे हुए हैं और राहत का इंतजार कर रहे हैं ।
3. 3 लाख एकड़ फसल बर्बाद: राज्य में करीब 3 लाख एकड़ में लगी धान की फसल पूरी तरह से पानी में डूब गई है, जिससे किसानों पर आजीविका का संकट खड़ा हो गया है ।
4. 300 सरकारी स्कूल प्रभावित: 300 से अधिक सरकारी स्कूलों के परिसरों में पानी भर गया है, जिससे शिक्षा व्यवस्था पर भी गहरा असर पड़ा है ।
रावी ने तोड़ा 37 साल पुराना रिकॉर्ड
इस बाढ़ की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसने 1988 की बाढ़ के रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया है।
1. 26 अगस्त, 2025: रावी नदी में पानी का बहाव 14.11 लाख क्यूसेक दर्ज किया गया।
2. 1988 की बाढ़: तब रावी में सबसे ज्यादा 11.20 लाख क्यूसेक पानी का बहाव दर्ज किया गया था।
यह आंकड़ा दिखाता है कि इस बार प्रकृति का प्रकोप कितना विकराल है। पुराने लोग भी इस बाढ़ को 1988 से कहीं ज्यादा विनाशकारी बता रहे हैं ।
आगे क्या? दोहरी मार का खतरा
एक तरफ राज्य बाढ़ से जूझ रहा है, तो दूसरी तरफ मौसम विभाग ने 30 और 31 अगस्त के लिए भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। यह 'दोहरी मार' स्थिति को और भी बदतर कर सकती है, क्योंकि उफनती नदियां और बारिश का पानी मिलकर तबाही को कई गुना बढ़ा सकते हैं।
सरकार और बचाव दल (NDRF, SDRF और सेना) दिन-रात राहत कार्यों में जुटे हैं, लेकिन हर गुजरते पल के साथ पंजाब के लोगों के लिए चुनौती बड़ी होती जा रही है। यह सिर्फ एक बाढ़ नहीं, बल्कि पंजाब के हौसले और जज्बे का सबसे बड़ा इम्तिहान है।