नई दिल्ली अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर 50% तक टैरिफ लगाने के बाद, केंद्र सरकार एक्शन मोड में आ गई है। सरकार ने न केवल निर्यातकों (Exporters) को हर संभव मदद का भरोसा दिया है, बल्कि अमेरिकी दबाव को दरकिनार करते हुए रूस से कच्चे तेल का आयात 10-20% तक बढ़ाने का भी फैसला किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि सरकार निर्यातकों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और इस चुनौती से निपटने के लिए हरसंभव कदम उठाए जाएंगे।
सरकार का 'एक्शन प्लान': निर्यातकों को मिलेगी राहत
अमेरिकी टैरिफ से उत्पन्न चुनौतियों पर चर्चा करने के लिए, भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (FIEO) के प्रतिनिधिमंडल ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की। इस बैठक में सरकार ने निर्यातकों को राहत देने के लिए कई बड़े कदमों का आश्वासन दिया:
1. आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी (Emergency Credit Line Guarantee): टैरिफ से प्रभावित क्षेत्रों में MSME निर्यातकों को वित्तीय सहायता देने के लिए इस योजना पर विचार किया जा रहा है।
2. कर्ज पर राहत: निर्यात ऋणों पर मोहलत (Moratorium) देने पर विचार हो रहा है, ताकि कंपनियों को नकदी प्रवाह (Cash Flow) की चुनौतियों से निपटने में मदद मिल सके।
3. ई-कॉमर्स (E-commerce) को बढ़ावा : सरकार ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए निर्यात को बढ़ावा देने पर काम कर रही है, ताकि भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक तेजी से पहुंचाया जा सके।
4. बड़ा वित्तीय पैकेज: बजट में घोषित निर्यात संवर्धन मिशन के तहत, सरकार अगले छह वर्षों के लिए लगभग ₹25,000 करोड़ के सहायता पैकेज पर विचार कर रही है।
वाणिज्य मंत्रालय का मानना है कि अमेरिकी टैरिफ का असर अल्पकालिक होगा और भारतीय अर्थव्यवस्था की GDP पर इसका दीर्घकालिक प्रभाव सीमित रहेगा ।
अमेरिका को दो टूक: नहीं झुकेंगे, रूस से तेल आयात बढ़ेगा
टैरिफ के दबाव के बावजूद, भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों को प्राथमिकता देते हुए एक बड़ा फैसला लिया है. भारत सितंबर में रूस से कच्चे तेल का आयात 10-20% तक बढ़ाएगा। यह बढ़ोतरी प्रतिदिन 1.5 लाख से 3 लाख बैरल तक हो सकती है।
भारत सरकार ने पश्चिमी देशों पर दोहरे मापदंड का आरोप लगाते हुए कहा है कि जब वे खुद रूस से अरबों डॉलर का सामान खरीद रहे हैं, तो भारत पर मुनाफाखोरी का आरोप लगाना गलत है
RBI की चेतावनी और उम्मीद की किरण
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने माना है कि अमेरिकी व्यापार नीतियों से जुड़ी अनिश्चितताएं भारतीय अर्थव्यवस्था की मांग के लिए एक जोखिम पैदा कर रही हैं। हालांकि, RBI ने यह भी कहा है कि S&P द्वारा भारत की सॉवरेन रेटिंग में सुधार एक शुभ संकेत है। अच्छे मानसून और ग्रामीण मजदूरी में वृद्धि से वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में गांवों में मांग बढ़ सकती है, जो अर्थव्यवस्था को सहारा देगी।
व्यापार समझौते पर ब्रेक
वाणिज्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) पर फिलहाल कोई औपचारिक बातचीत नहीं चल रही है। उन्होंने कहा, "बातचीत और जवाबी कार्रवाई साथ-साथ नहीं चल सकती।" किसी भी व्यापार समझौते से पहले अमेरिका को इस 25% अतिरिक्त टैरिफ पर विचार करना होगा।
कुल मिलाकर, भारत अमेरिकी टैरिफ के दबाव में झुकने को तैयार नहीं है और अपनी आर्थिक संप्रभुता की रक्षा के लिए एक बहु-आयामी रणनीति पर काम कर रहा है।