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Rupee Crash: औंधे मुंह गिरा रुपया, डॉलर के मुकाबले 92 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर, जानिए क्यों आई गिरावट?

29 जनवरी, 2026 07:19 PM

गुरुवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.00 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। रुपया 91.99 के स्तर पर खुला, जबकि पिछले सत्र में यह 91.78 पर बंद हुआ था। डॉलर में रिकवरी और एशियाई करेंसी में व्यापक कमजोरी के बीच रुपए पर दबाव बढ़ गया।

US फेडरल रिजर्व के पॉलिसी फैसले के बाद डॉलर इंडेक्स में मजबूती देखने को मिली। फेड द्वारा महंगाई के ऊंचे बने रहने और लेबर मार्केट के स्थिर रहने के संकेत देने के बाद अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में भी तेजी आई, जिससे उभरती बाजारों की करेंसी दबाव में आ गईं।


रुपया कमजोर क्यों हुआ?
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक कमजोर कैपिटल इनफ्लो और निवेशकों की बढ़ती सतर्कता रुपए पर भारी पड़ रही है। सिंगापुर स्थित एक हेज फंड मैनेजर ने कहा कि बाजार संभावित NDF मैच्योरिटी को पहले ही प्राइस-इन कर रहा है और स्टॉप-लॉस ट्रिगर होने की आशंका बढ़ गई है।


डॉलर को क्या सपोर्ट मिल रहा है?
डॉलर को अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई रिकवरी से मजबूती मिली है। हालांकि फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने रेट कट को लेकर कोई स्पष्ट टाइमलाइन नहीं दी, मॉर्गन स्टेनली के एनालिस्ट्स का मानना है कि ब्याज दरों में ढील डिसइन्फ्लेशन के ठोस संकेतों पर निर्भर करेगी, जो 2026 के अंत तक सामने आ सकते हैं। जून और सितंबर 2026 को संभावित कटौती के समय के रूप में देखा जा रहा है।


एशियाई बाजारों पर असर
रुपए की कमजोरी एशिया में एक बड़े ट्रेंड को दर्शाती है, जहां बढ़ती अमेरिकी यील्ड के कारण अधिकांश एशियाई मुद्राएं दबाव में हैं। निवेशक फिलहाल घरेलू आर्थिक संकेतों और ग्लोबल मैक्रो ट्रेंड्स के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।


भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मायने
कमजोर रुपया आयात को महंगा बना सकता है, जिससे महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका है। वहीं, निर्यातकों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल सकती है। आने वाले दिनों में रुपए की दिशा RBI की रणनीति र वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी।

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