चण्डीगढ़ : विश्व पंजाबी प्रचार सभा, चंडीगढ़ की ओर से आज सैनी भवन सेक्टर 24 में प्रिंसिपल ( रि.) बहादुर सिंह गोसल के दो पंजाबी पुस्तकें आ नी चिड़िए पानी पी' और 'कलम अते कला का सुमेल 'का विमोचन, चर्चा और काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन अवतार सिंह मेहतपुरी ने किया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, डॉ. बलवीर सिंह ढोल ,पूर्व डी. पी.आई. पंजाब ,विशेष अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार प्रेम विज और अध्यक्षता डॉ. मनोहर सिंह, अध्यक्ष इंटक फेडरेशन ने की।
पुस्तक पर बोलते हुए साहित्यकार प्रेम विज ने कहा की पहली बार किसी पक्षी को साहित्य का विषय बनाया गया है। चिड़िया हमारे घर का घरेलू पक्षी है।'कलम अते कला' में कविता और गायन का मेल है ।कविताएं प्रिंसिपल गोसल की हैं लेकिन इसका गायन जगतार सिंह जोग ने किया है।
पुस्तक पर पर्चा जसविंदर सिंह कायनौर और राजकुमार साहू वालिया ने प्रस्तुत किया। कविता प्रस्तुत करते हुए प्यारा सिंह राही ने कहा- नशे अते हथियार जवानी खाई जांदे ने /हीरे पुत्र जो भंग के भाड़े जाई जांदे ने। डॉ. संगीत शर्मा कुंद्रा 'गीत' ने मौसम का मिज़ाज देखते हुए कहा,'सावन दी जदों लगी झड़ी।मन दी पीड़ वद गई बड़ी।'
जगतार जोग ने गोसल जी का गीत प्रस्तुत करते हुए कहा - कि सिफत करां बाबा नानक दी /कहंदे मक्का जिना ने फेर दिता। प्रेम विज ने कहा - सिलाई मशीन /मशीन नहीं होती /कई लोगों के लिए /पूरा जीवन होती है।
काव्य गोष्ठी में तीन दर्जन से अधिक कवियों ने अपनी कविताएं प्रस्तुत की। जिन में प्यारा सिंह राही, जसपाल सिंह, डॉ. विनोद शर्मा, हरेंद्र सिन्हा, मनजीत सिंह मजाल, डॉ. संगीता शर्मा कुंद्रा 'गीत', पन्नालाल मुस्तफाबादी, मंजू शारदा, तेजा सिंह थूहा, रणजोध राणा, नीलम नारंग आदि शामिल थे।