Saturday, September 05, 2026
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'हाई-फ्रीक्वेंसी इकोनॉमिक बैरोमीटर' से छोटे कारोबारियों को मिलेगी नई ताकत, अर्थव्यवस्था को मिलेगी रफ्तार : सीएआईटी

12 जुलाई, 2026 11:30 AM

नई दिल्ली: अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ 'सीएआईटी' (कैट) ने केंद्र सरकार द्वारा 14 जुलाई को 'हाई-फ्रीक्वेंसी इकोनॉमिक बैरोमीटर' लॉन्च करने के फैसले का स्वागत किया है। कैट का कहना है कि यह पहल छोटे व्यापारियों, खुदरा कारोबारियों, एमएसएमई और उद्यमियों को मजबूत बनाएगी तथा भारत की आर्थिक विकास यात्रा को नई गति देगी। कैट ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में आर्थिक शासन को अधिक आधुनिक, गतिशील और डेटा आधारित बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी कदम बताया।

यह हाई-फ्रीक्वेंसी इकोनॉमिक बैरोमीटर देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति का लगभग वास्तविक समय में आकलन करेगा। इसके लिए जीएसटी संग्रह, यूपीआई लेनदेन, ई-वे बिल, माल ढुलाई, बिजली खपत, बैंकिंग गतिविधियां, डिजिटल कॉमर्स और अन्य महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों को एक साथ जोड़ा जाएगा। इससे सरकार को तेजी और अधिक सटीकता के साथ नीतियां बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही उभरती आर्थिक चुनौतियों की समय रहते पहचान कर आवश्यक कदम उठाए जा सकेंगे।

कैट के महासचिव और सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल इंडिया, जीएसटी, यूपीआई और तकनीक आधारित सुशासन जैसी पहलों के जरिए आर्थिक पारदर्शिता और दक्षता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। 'हाई-फ्रीक्वेंसी इकोनॉमिक बैरोमीटर' इस परिवर्तनकारी यात्रा का अगला महत्वपूर्ण अध्याय है, जो भारत को दुनिया की सबसे उन्नत और डेटा आधारित अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा।

प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि इस पहल का सबसे अधिक लाभ देश के छोटे व्यापारी, रिटेल कारोबारी, एमएसएमई और उद्यमियों को मिलेगा। आर्थिक रुझानों, उपभोक्ताओं के व्यवहार और बाजार की मांग की समय पर जानकारी मिलने से कारोबारी बेहतर फैसले ले सकेंगे और उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ेगी। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं, महंगाई के दबाव और भू-राजनीतिक चुनौतियों के दौर में यह बैरोमीटर एक प्रभावी अर्ली वार्निंग सिस्टम की तरह काम करेगा। इससे सरकार समय रहते सुधारात्मक कदम उठा सकेगी।

कैट के अनुसार, यह पहल भारत की आर्थिक नीति निर्माण प्रणाली में एक नए दौर की शुरुआत करेगी। इससे आर्थिक पूर्वानुमान अधिक सटीक होंगे, निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा, कारोबार को बढ़ावा मिलेगा और 'विकसित भारत' के लक्ष्य को हासिल करने में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

 

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