लंबे वक्त से कॉमेडी किंग कपिल शर्मा के शो से जुड़े आर्टिस्ट राजीव ठाकुर का शुरुआती दौर काफी मुश्किल रहा है। राजीव खुद एक इंटरव्यू में यह बता चुके हैं कि उनका बचपन बहुत गरीबी में बीता था और उन दिनों ने उनके जीवन पर बहुत प्रभाव डाला। राजीव ने बताया कि वह कई बार अपने उन दिनों के अनुभवों को अपने जोक्स में डालने की कोशिश करते हैं, लेकिन फिर वह खुद ही भावुक हो जाते हैं। भले ही वह उन तजुर्बों की मदद से लोगों को हंसा देते हैं, लेकिन फिर वह खुद ही भावुक हो जाते हैं, और पर्दे के पीछे जाकर रोते हैं।
फिल्मी लगती है राजीव की कहानी
वैभव मुंजाल के साथ बातचीत में राजीव ने बताया कि उन्हें अपने बचपन के बारे में याद करके बहुत तकलीफ होती है। राजीव ने कहा, "मेरी जर्नी उन हालातों में शुरू हुई थी, जिन्हें मैं याद भी नहीं करना चाहता हूं। अगर मैं आज लोगों को इसके बारे में बताऊं, तो यह आपको किसी काल्पनिक कहानी जैसा लग सकता है। क्योंकि कोई ऐसा नहीं है जो इसकी पुष्टि कर सके।" राजीव ने बताया कि क्यों वह अक्सर अपने बचपन और करियर के शुरुआती दिनों को अपनी कॉमेडी में उतारने से बचते हैं।
ऐसे जोक्स जिन्हें सुनाकर रोते हैं
राजीव ठाकुर ने कहा, "लोग मुझसे अक्सर कहते हैं कि आपको अपने दर्द को स्टैंडअप कॉमेडी में बदल देना चाहिए। मैं कभी-कभी ऐसा करता भी हूं, लेकिन उन जोक्स को सुनाते वक्त मेरा दर्द इतना रियल होता है कि मैं स्टेज के पीछे जाकर रोने लगता हूं। यही वजह है कि मैं अपनी जिंदगी के उस दौर के बारे में बहुत कम बात करता हूं।" राजीव ठाकुर ने अपनी जिंदगी के कुछ शॉकिंग किस्से भी सुनाए कि कैसे उनकी लाइफ में कुछ ऐसी चीजें हुई हैं जो सुनने वालों को किसी फिल्मी कहानी जैसे लग सकते हैं।
लगता था हम टॉयलेट में रहते हैं
राजीव ठाकुर ने कहा, "बिलकुल पुरानी हिंदी फिल्मों की तरह, मेरे माता-पिता की शादी के बाद मेरे पिता को घर से निकाल दिया गया। रातोंरात वो एक आलीशान आरामदायक घर से एक छोटे से कमरे में रहने लगे।" राजीव ठाकुर ने बताया कि जिस कमरे में वह रह रहे थे, वही उनका बेडरूम, ड्रॉइंग रूम, किचन और यहां तक कि बाथरूम भी था। वो तीनों भाई-बहन उसी कमरे में पले। एक नहा रहा है तो बाकियों को बाहर इंतजार करना पड़ेगा। मुझे कई बार ऐसा लगता था कि हमारा घर एक टॉयलेट है।
तीसरी मंजिल पर चढ़ाते थे पानी
राजीव ने बताया कि क्योंकि उनके घर के किराए में बिजली का बिल शामिल था, इसलिए 9 बजे मकान मालिक लाइट बंद कर देता था। वह बताते हैं कि वह तीसरी मंजिल पर रहा करते थे और उस बिल्डिंग में लिफ्ट नहीं थी, इसलिए उन्हें जितना भी पानी चाहिए होता था उनके परिवार के लोग बाल्टियों में भर-भरकर ऊपर ले जाया करते थे। बता दें कि राजीव ठाकुर ने अपने करियर की शुरुआत पंजाबी थिएटर से की थी, जिसके बाद उन्होंने मेनस्ट्रीम टेलीविजन में कदम रखा।