Wednesday, July 01, 2026
BREAKING
अमित शाह ने लॉन्च किए FCRA 2.0 पोर्टल और e-OCI कार्ड, 50 लाख OCI कार्डधारकों को मिलेगा लाभ जनजातीय समाज के नेतृत्व और आत्मविश्वास का केंद्र बने केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय: राष्ट्रपति मुर्मु स्वस्थ भारत के माध्यम से ही विकसित भारत का सपना साकार हो सकता है: जेपी नड्डा साक्ष्य आधारित शिक्षा सुधारों की ओर बढ़ा उत्तर प्रदेश, कक्षा-कक्ष के अनुभवों से तय होगी नई रणनीति पंजाब: सीएम मान ने संगरूर में ओलंपिक स्तर के स्विमिंग पूल का उद्घाटन किया, कहा-भविष्य में ओलंपियनों की नर्सरी बनेगा मानवता की मिसाल: काफिला रुकवाकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डा. अर्चना गुप्ता ने दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को संभाला राज्यपाल घोष का आह्वान: पूर्व छात्र बढ़ाएं सहयोग, आर्थिक तंगी किसी मेधावी की पढ़ाई में न बने बाधा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हरियाणा एफ.पी.ओ. मिशन-2026 का किया शुभारंभ राम मंदिर ट्रस्ट पर सवाल उठाने पर अजय राय को हाउस अरेस्ट करना असंवैधानिक, विपक्ष की आवाज़ दबाने का प्रयास : राव नरेंद्र सिंह सीबीआई ने IDFC First Bank फंड गबन मामले में दो बैंक अधिकारियों को किया गिरफ्तार

धर्म

साल में एक बार खुलता है महाकाल के मंदिर के ऊपर बना ये मंदिर, सर्प दोष के जातकों को दर्शन देने आते हैं ‘नागचंद्रेश्वर’

29 जुलाई, 2025 01:46 PM

देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक महाकाल नगरी उज्जैन में स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट सोमवार रात ठीक 12 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। यह मंदिर महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की तीसरी मंजिल पर स्थित है और खास बात यह है कि इसके पट पूरे वर्ष में केवल एक दिन, नागपंचमी के शुभ अवसर पर ही खोले जाते हैं। मंदिर के खुलने के साथ ही 24 घंटे तक श्रद्धालु यहां दर्शन कर सकेंगे।

हिंदू धर्म में नागों की पूजा का विशेष महत्व है। इन्हें भगवान शिव का आभूषण और उनका रक्षक माना जाता है। नागचंद्रेश्वर मंदिर भी इसी परंपरा का प्रतीक है। ऐसा माना जाता है कि यहां दर्शन मात्र से नागदोष, कालसर्प दोष और अन्य बाधाएं दूर हो जाती हैं। महाकाल मंदिर के गर्भगृह के ऊपर ओंकारेश्वर मंदिर और सबसे ऊपर नागचंद्रेश्वर मंदिर स्थित है, जिसे देखने का दुर्लभ अवसर केवल नागपंचमी पर ही मिलता है।

मंदिर में स्थित प्रतिमा अद्वितीय है, जिसे नेपाल से लाया गया था। इसमें भगवान शिव शेषनाग की शैय्या पर विराजमान हैं और उनके साथ माता पार्वती, गणेश, कार्तिकेय, नंदी, सिंह, सूर्य और चंद्रमा की सुंदर मूर्तियां भी स्थापित हैं। यह दुनिया का एकमात्र ऐसा मंदिर माना जाता है, जहां भोलेनाथ इस रूप में विराजते हैं।

मान्यता के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण 11वीं सदी में परमार वंश के राजा भोज द्वारा करवाया गया था। बाद में 1732 में मराठा सरदार राणोजी सिंधिया ने इसका पुनर्निर्माण कराया। नागचंद्रेश्वर की मूर्ति भी तभी नेपाल से मंगाकर तीसरी मंजिल पर स्थापित की गई थी।

धार्मिक कथा के अनुसार, नागराज तक्षक ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें अमरत्व का वरदान दिया। इसके बाद तक्षक देव ने शिवजी के साथ ही रहना शुरू किया, लेकिन शिवजी को यह प्रिय नहीं था, क्योंकि वह एकांत और ध्यान के प्रेमी थे। तक्षक ने शिव की भावना को समझा और तभी से तय किया कि वह साल में सिर्फ एक बार नागपंचमी के दिन ही उनके दर्शन करने आएंगे। इसी परंपरा के कारण मंदिर के कपाट केवल इसी दिन खोले जाते हैं।

प्रशासन की ओर से अनुमान है कि इस एक दिन में करीब 10 लाख श्रद्धालु नागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन करेंगे। हर श्रद्धालु को लगभग 40 मिनट के भीतर दर्शन कराने की योजना बनाई गई है। दर्शन व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए विशेष सुरक्षा और मार्गदर्शन की व्यवस्था की गई है।

 

Have something to say? Post your comment

और धर्म खबरें

मोरक्को से आया धमाकों का ईमेल, केदारनाथ-बदरीनाथ समेत पूरे उत्तराखंड को दहलाने की थी धमकी

मोरक्को से आया धमाकों का ईमेल, केदारनाथ-बदरीनाथ समेत पूरे उत्तराखंड को दहलाने की थी धमकी

वाराणसी की मस्जिद को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाने की कोशिश, पाकिस्तानी राष्ट्रपति जरदारी की हरकत

वाराणसी की मस्जिद को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाने की कोशिश, पाकिस्तानी राष्ट्रपति जरदारी की हरकत

मंगल का वृषभ राशि में गोचर, इन राशियों को होगा लाभ, कुछ रहें सावधान

मंगल का वृषभ राशि में गोचर, इन राशियों को होगा लाभ, कुछ रहें सावधान

9 जून 2026 का पंचांग: भूलकर भी इस समय शुरू न करें कोई नया काम, मीन राशि में रहेगा चंद्रमा का प्रभाव

9 जून 2026 का पंचांग: भूलकर भी इस समय शुरू न करें कोई नया काम, मीन राशि में रहेगा चंद्रमा का प्रभाव

अचानक बीच में ही रोकी गई केदारनाथ यात्रा, आखिर क्या वजह? सुरक्षित स्थानों पर रोके गए श्रद्धालु

अचानक बीच में ही रोकी गई केदारनाथ यात्रा, आखिर क्या वजह? सुरक्षित स्थानों पर रोके गए श्रद्धालु

बिहार: सज-धज कर तैयार राजगीर का कुंड क्षेत्र, 17 मई से शुरू होगा ऐतिहासिक मलमास मेला

बिहार: सज-धज कर तैयार राजगीर का कुंड क्षेत्र, 17 मई से शुरू होगा ऐतिहासिक मलमास मेला

वट सावित्री व्रत : भारतीय संस्कृति में प्रेम, प्रकृति और आध्यात्मिक चेतना की महागाथा

वट सावित्री व्रत : भारतीय संस्कृति में प्रेम, प्रकृति और आध्यात्मिक चेतना की महागाथा

26 अप्रैल का पंचांग : बैशाख शुक्ल की दशमी तिथि पर अभिजित व विजय मुहूर्त, नोट कर लें राहुकाल

26 अप्रैल का पंचांग : बैशाख शुक्ल की दशमी तिथि पर अभिजित व विजय मुहूर्त, नोट कर लें राहुकाल

31 मार्च का पंचांग : त्रयोदशी तिथि पर रवि योग, अमृतकाल व अभिजित मुहूर्त, नोट कर लें राहुकाल

31 मार्च का पंचांग : त्रयोदशी तिथि पर रवि योग, अमृतकाल व अभिजित मुहूर्त, नोट कर लें राहुकाल

धर्म के आधार पर ओबीसी आरक्षण के कथित दुरुपयोग पर राज्यसभा से विपक्ष का बहिर्गमन

धर्म के आधार पर ओबीसी आरक्षण के कथित दुरुपयोग पर राज्यसभा से विपक्ष का बहिर्गमन