एस.ए.एस. नगर (मोहाली) : पंजाब सरकार के चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग द्वारा राष्ट्रीय दंत आयोग के सहयोग से चिकित्सा शिक्षा भवन, सेक्टर-69, मोहाली में दंत शिक्षा में क्षमता निर्माण एवं सुधारों पर केंद्रित दो दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसके अंतर्गत 24 सितंबर को नव-नियुक्त दंत शिक्षकों के लिए क्षमता निर्माण कार्यशाला तथा 25 सितंबर को दंत शिक्षा सुधारों पर क्षेत्रीय हितधारक परामर्श बैठक आयोजित की गई।
नव-नियुक्त दंत शिक्षकों के लिए क्षमता निर्माण कार्यशाला
कार्यक्रम का पहला दिन पंजाब के सरकारी दंत चिकित्सा महाविद्यालयों में नव-नियुक्त दंत शिक्षकों को समर्पित रहा।
सरकारी दंत चिकित्सा महाविद्यालय, अमृतसर के पूर्व प्राचार्य डॉ. विमल सिकरी ने ‘व्यावसायिक पवित्रता’ विषय पर संबोधन के साथ तकनीकी सत्रों की शुरुआत की। भारतीय खिलाड़ी एवं भारतीय पैरालंपिक समिति की पूर्व अध्यक्ष सुश्री दीपा मलिक ने अपने संघर्ष, दृढ़ संकल्प और उत्कृष्टता की यात्रा साझा करते हुए प्रतिभागियों को प्रेरित किया।
शूलिनी विश्वविद्यालय, सोलन के प्राध्यापक कर्नल डी.एस. चीमा ने ‘संगठनात्मक उत्कृष्टता के लिए व्यक्तिगत विकास’, जबकि पूर्व आई.ए.एस. अधिकारी, वक्ता, लेखक एवं मार्गदर्शक श्री विवेक अत्रे ने ‘पेशेवरों के लिए भावनात्मक बुद्धिमत्ता’ विषय पर संबोधित किया।
पहले दिन का समापन जी.जी.एस. इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के कुलपति डॉ. महेश वर्मा द्वारा ‘शिक्षक का सर्वांगीण विकास: उत्कृष्टता के दस सिद्धांत’ विषय पर आयोजित सत्र के साथ हुआ।
दंत शिक्षा सुधारों पर क्षेत्रीय हितधारक परामर्श बैठक
दूसरे दिन आयोजित क्षेत्रीय परामर्श बैठक में राष्ट्रीय दंत आयोग के वरिष्ठ पदाधिकारियों, दंत शिक्षा विशेषज्ञों तथा विभिन्न राज्यों के हितधारकों ने भाग लिया।
बैठक का उद्घाटन डॉ. संजय तेवारी, अध्यक्ष, राष्ट्रीय दंत आयोग; डॉ. चंद्रशेखर जानकीरमण, अध्यक्ष, दंत शिक्षा बोर्ड; लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ. नंदा किशोर साहू, अध्यक्ष, दंत मूल्यांकन एवं श्रेणी निर्धारण बोर्ड; तथा लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ. तपस कुमार बंद्योपाध्याय, पूर्णकालिक सदस्य, नैतिकता एवं दंत पंजीकरण बोर्ड, ने डॉ. अवनीश कुमार, निदेशक, अनुसंधान एवं चिकित्सा शिक्षा, पंजाब की उपस्थिति में किया।
इस अवसर पर पंजाब दंत परिषद के कागज-रहित पंजीकरण एवं नवीनीकरण के लिए ऑनलाइन पोर्टल भी आरंभ किया गया। इस पोर्टल के माध्यम से दंत चिकित्सा पेशेवर पंजीकरण एवं उसके नवीनीकरण के लिए घर बैठे आवेदन कर सकेंगे, जिससे कागजी कार्यवाही तथा परिषद कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से जाने की आवश्यकता कम होगी।
कार्यक्रम के दौरान पंजाब के सरकारी दंत चिकित्सा महाविद्यालयों के पूर्व विद्यार्थियों द्वारा विशेष प्रस्तुति दी गई तथा उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों को सम्मानित किया गया।
बैठक में पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़ और उत्तराखंड के लगभग 40 दंत चिकित्सा संस्थानों के प्राचार्यों के अलावा सरकारी दंत चिकित्सा महाविद्यालय, अमृतसर एवं पटियाला के लगभग 50 प्राध्यापकों, सह-प्राध्यापकों और सहायक प्राध्यापकों ने भाग लिया।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. संजय तेवारी ने देश में दंत शिक्षा को और सुदृढ़ एवं बेहतर बनाने के प्रति राष्ट्रीय दंत आयोग की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
डॉ. चंद्रशेखर जानकीरमण ने ‘राष्ट्रीय दंत आयोग अधिनियम, 2023—दृष्टि, संरचना एवं सुधारों की रूपरेखा’ विषय पर प्रस्तुति दी। लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ. नंदा किशोर साहू और लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ. तपस कुमार बंद्योपाध्याय ने क्रमशः संस्थागत मूल्यांकन एवं श्रेणी निर्धारण तथा व्यावसायिक नैतिकता एवं दंत पंजीकरण से संबंधित विषयों पर संबोधित किया।
इसके बाद आयोजित खुली विचार-चर्चा के दौरान प्राचार्यों एवं अन्य हितधारकों ने दंत चिकित्सा की स्नातक एवं स्नातकोत्तर शिक्षा, व्यावसायिक नैतिकता एवं पंजीकरण, संस्थागत मूल्यांकन एवं श्रेणी निर्धारण, नियामकीय सुधार, मानव संसाधन नियोजन तथा मुख एवं दंत स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने से संबंधित सुझाव साझा किए।
क्षेत्रीय परामर्श से प्राप्त सिफारिशों को संकलित कर भविष्य की नीति निर्माण प्रक्रिया, पाठ्यक्रम सुधारों तथा दंत शिक्षा एवं मुख एवं दंत स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने संबंधी रणनीतिक पहलों के लिए विचारार्थ राष्ट्रीय दंत आयोग के समक्ष रखा जाएगा।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. पुनीत गिरधर, संयुक्त निदेशक, चिकित्सा शिक्षा, पंजाब एवं रजिस्ट्रार, पंजाब दंत परिषद द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया तथा समापन टिप्पणी के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।