हिंदी सिनेमा के लिए 1960 का दशक बेहद खास था। इस साल आई मुगल-ए आजम, चौदहवीं का चांद, बरसात की रात समेत कई शानदार फिल्में रिलीज हुई थीं। इन फिल्मों की कहानी, गीतों और एक्टर्स की परफॉरमेंस ने छाप छोड़ दी। लेकिन मुगल-ए आजम सब पर भारी पड़ी। कमाई के मामले में इस फिल्म सबसे आगे रही। कई अवॉर्ड भी अपने नाम किए। सलीम के किरदार के लिए दिलीप कुमार बेस्ट एक्टर बने, लेकिन अनारकली से दुनियाभर में अलग पहचान बनाने वाली उस साल का अवॉर्ड हार गई।
मधुबाला अवॉर्ड हार गई
ये यकीन करना मुश्किल है कि मुगल-ए आजम में अनारकली के किरदार के लिए मधुबाला बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड एक दूसरी हीरोइन से हार गई थीं। मधुबाला के करियर को नई पहचान देने वाला किरदार अनारकली अवॉर्ड सेरेमनी वाले दिन हार गया। और जिस एक्ट्रेस ने मधुबाला को अनारकली के लिए हराया था वो थीं एक्ट्रेस बीना राय।
इस एक्ट्रेस ने अपने किरदार से अनारकली को पीछे छोड़ा
1960 में आई फिल्मों को 1961 में 8वें में फिल्मफेयर अवॉर्ड से सम्मानित किया जाना था। इस अवॉर्ड सेरेमनी में हर तरफ मुगल-ए आजम की अनारकली और सलीम की चर्चा हो रही थी। अवॉर्ड के विनर का एलान हुआ। बेस्ट फिल्म बनी मुगल-ए आजम, बेस्ट एक्टर बने इसी फिल्म में सलीम का किरदार निभाने वाले दिलीप कुमार। उन्होंने देव आनंद को उनकी फिल्म काला बाजार और राज कपूर को फिल्म छलिया के लिए हराया था। जब बेस्ट एक्ट्रेस की विनर के नाम का एलान हुआ तो नॉमिनेशन में मधुबाला फिल्म मुगल-ए आजम के लिए थीं। नूतन को फिल्म छलिया के लिए नॉमिनेशन मिला था। लेकिन इस रात फिल्म घुंघट के लिए एक्ट्रेस बीना राय विनर बनी। ये हैरानी वाली बात थी। अनारकली हार गई थी।
बीना राय जिससे हार गई मधुबाला
बीना राय की बात करें तो वो गुजरे जमाने में वो हिंदी सिनेमा की सबसे शानदार एक्ट्रेस में से एक मानी जाती थी। उन्होंने 1953 में अनारकली नाम की फिल्म लीड रोल निभाया था। इसके बाद 1960 में आई घूंघट के लिए उन्होंने मधुबाला को हराकर अवार्ड जीता। फिल्म ताज महल के लिए भी वो याद की जाती हैं। बीना ने एक्टर प्रेमनाथ से शादी की थी। वही प्रेमनाथ जिनकी बहन कृष्णा राज कपूर थीं। यानी राज कपूर की पत्नी और रणबीर कपूर की दादी। बीना राय के बेटे प्रेम किशन भी फिल्मों में एक्टिव रहे।
उस साल के अवॉर्ड
इस अवॉर्ड सेरेमनी में फिल्म मुगल-ए आजम में को कुल 11 नॉमिनेशन मिले थे। मुगल-ए आजम को डायरेक्ट करने वाले K आसिफ भी बेस्ट डायरेक्टर का अवॉर्ड हार गए थे। उस साल बेस्ट डायरेक्टर बिमल रॉय अपनी फोल्म परख के लिए जीते थे। म्यूजिक डायरेक्टर शंकर-जयकिशन ने मुगल-ए आजम का संगीत बनाने वाले नौशाद को पीछे छोड़ दिया था। शकील बदायुनी ने गाने चौदहवीं का चांद लिखने के लिए अवॉर्ड जीता था। चौदहवीं का चांद गाना गाने के लिए मोहम्मद रफी बेस्ट मेल सिंगर, वहीं लता मंगेशकर ने दिल अपना और प्रीत परे के लिए बेस्ट फीमेल सिंगर का अवॉर्ड जीता था। ये वो साल था जब इन कलाकारों को बिना किसी भेदभाव के इनके काम के लिए सम्मानित किया था।