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पंजाब

भगवंत मान सरकार 12 जिलों में 21,850 शिक्षकों को नशों के खिलाफ लड़ाई और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए देगी प्रशिक्षण

11 अगस्त, 2026 07:48 PM
चंडीगढ़ : नशे के दुरुपयोग के खिलाफ अपनी लड़ाई को और मजबूत करने और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने अपने प्रमुख नशा विरोधी अभियान 'युद्ध नशेयां विरुद्ध' के तहत पिछले सप्ताह 12 जिलों में शिक्षकों के लिए जागरूकता और क्षमता निर्माण कार्यक्रम शुरू किया।

इस पहल का उद्देश्य 21,850 से अधिक शिक्षकों को छात्रों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं और नशे के दुरुपयोग के शुरुआती संकेतों की पहचान करने और समय पर आवश्यक कदम उठाने के लिए आवश्यक सक्षमता और व्यावहारिक कौशल से लैस करना है। इस अभियान की शुरुआत सोमवार को फाजिल्का और तरन तारन से की गई, जहां पिछले सप्ताह 800 से अधिक शिक्षकों ने वर्कशॉप में भाग लिया।

यह कार्यक्रम स्कूलों में सरकार द्वारा चलाए गए जागरूकता कार्यक्रमों की सफलता के बाद शुरू किया गया है। इससे पहले इस वर्ष जनवरी में, नौ जिलों के वरिष्ठ माध्यमिक और उच्च विद्यालयों के प्रिंसिपलों और हेडमास्टरों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस प्रशिक्षण के दौरान राज्य के उन सीमावर्ती जिलों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया था, जो नशे के उपयोग की समस्या के प्रति संवेदनशील हैं।

इसके अलावा, अमृतसर में एक पायलट शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 2,800 से अधिक शिक्षकों ने भाग लिया। 75 प्रतिशत से अधिक प्रतिभागियों ने बताया कि वे स्वस्थ स्कूली वातावरण बनाने में योगदान देने के लिए प्रेरित हुए। इन पहलों की सफलता के आधार पर भगवंत मान सरकार ने अब प्रशिक्षण मॉड्यूल का चरणबद्ध विस्तार शुरू किया है, जिसकी शुरुआत फाजिल्का, तरन तारन, फिरोजपुर, गुरदासपुर, पठानकोट, श्री मुक्तसर साहिब, फरीदकोट, मोहाली, रोपड़, कपूरथला, लुधियाना और पटियाला से की जा रही है।

जब कोई छात्र किसी परेशानी में होता है, तो शिक्षक अक्सर सबसे पहले इसे महसूस करते हैं, लेकिन ऐसे व्यवहार को स्वास्थ्य संबंधी समस्या समझने के बजाय अक्सर अनुशासनहीनता मान लिया जाता है। किशोरों में बढ़ती चिंता, तनाव और नशे के उपयोग को देखते हुए, स्कूल-आधारित रोकथाम शुरुआती पहचान और समय पर सहायता प्रदान करने का एक व्यापक और टिकाऊ साधन है। शिक्षकों को जागरूक करने की यह पहल स्कूल प्रमुखों के लिए पहले चलाए गए जागरूकता कार्यक्रम पर आधारित है, जिसका उद्देश्य छात्रों के कल्याण के लिए पूरे स्कूल को शामिल करने वाली व्यवस्था विकसित करना है।

इस संबंध में पंजाब के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, "हर वह बच्चा जो नशे के अंधेरे में चला जाता है, वह एक ऐसा बच्चा है जिस तक हम पहले पहुंच सकते थे। हमारे शिक्षक बच्चों के साथ सबसे अधिक समय बिताते हैं; वे उनकी खामोशियों, अनुपस्थितियों और उन बदलावों को देखते हैं, जिन्हें कोई और नहीं देख पाता। प्रशिक्षण मॉड्यूल इस तरह तैयार किया गया है कि शिक्षकों को किशोरों से जुड़े मुद्दों, उनके मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक कल्याण की बेहतर समझ मिल सके। शिक्षकों को नशे के दुरुपयोग से जुड़े खतरों के बारे में भी जागरूक किया जाएगा। यह प्रशिक्षण उन्हें आवश्यकता पड़ने पर छात्रों को सहायता प्रदान करने में सक्षम बनाएगा। वे तनाव और नशे की ओर बढ़ने की संभावना के शुरुआती संकेतों को पहचानना, सजा देने के बजाय संवेदनशीलता के साथ प्रतिक्रिया देना और मुश्किल में घिरे छात्रों को बहुत देर होने से पहले सहायता से जोड़ना सीखेंगे। पंजाब में किसी भी बच्चे को अपनी परेशानी चुपचाप सहने के लिए मजबूर न होना पड़े और न ही उसे सामाजिक कलंक का सामना करना पड़े और 'युद्ध नशेयां के विरुद्ध' अभियान के तहत हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि हर ऐसे बच्चे को उचित देखभाल और सहयोग मिले।"

यह एक व्यापक अंतर-विभागीय पहल है, जिसके कार्यान्वयन को राज्य शिक्षा अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), सामाजिक सुरक्षा और महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से सुनिश्चित किया जा रहा है। नशे के उपयोग के खिलाफ व्यापक अभियान का नेतृत्व कर रही राज्य की डेटा इंटेलिजेंस एंड टेक्निकल स्पोर्ट यूनिट (डीआईटीएसयू) कार्यक्रम के कार्यान्वयन में सहयोग देने के साथ-साथ प्रशिक्षण सामग्री तैयार करेगी और पूरे अभियान के दौरान गुणवत्ता सुनिश्चित करेगी। जिला स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है, ताकि सभी वरिष्ठ माध्यमिक और उच्च विद्यालयों के शिक्षक इन सत्रों में भाग ले सकें और इनका लाभ उठा सकें। ये सत्र नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) और राष्ट्रीय कार्य योजना नशीली दवाओं की मांग में कमी (एनएपीडीडीआर) के सहयोग से आयोजित किए जा रहे हैं।

एक दिवसीय जागरूकता-सह-क्षमता निर्माण सत्र अगस्त 2026 से चरणबद्ध तरीके से 12 जिलों में 500 से अधिक बैचों में आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में विशेषज्ञ प्रशिक्षक नशे के उपयोग की समस्या के मानसिक और सामाजिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण देंगे। प्रशिक्षण में प्राप्त शिक्षा को कक्षा में लागू करना सुनिश्चित करने के लिए हर शिक्षक अपने छात्रों को नशे से दूर रखने की जिम्मेदारी निभाने की शपथ लेगा और प्रशिक्षण के बाद के हफ्तों में छात्रों के साथ विभिन्न गतिविधियाँ करेगा। प्रतिभागियों की प्रतिक्रिया और एक सुचारू निगरानी प्रणाली के माध्यम से कार्यक्रम की पहुंच और प्रभावशीलता पर नज़र रखी जाएगी।

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