ऊना : ऊना के इंदिरा मैदान में आयोजित एंटी-चिट्टा वॉकथॉन में जहां एक ओर 40 हजार की भीड़ ने रिकॉर्ड बनाया, वहीं दूसरी ओर भयंकर गर्मी और उमस के चलते 14 छात्राओं और 2 अध्यापिकाओं की तबीयत अचानक बिगड़ गई। एक साथ 16 मरीजों के अस्पताल पहुंचने से वहां अफरा-तफरी मच गई। जानकारी के अनुसार वॉकथॉन के दौरान तेज धूप और भयंकर उमस के कारण एक के बाद एक 14 छात्राएं और 2 अध्यापिकाएं बेसुध होकर गिर पड़ीं। सभी को तुरंत क्षेत्रीय अस्पताल ऊना पहुंचाया गया। अचानक मरीजों की संख्या बढ़ने से अस्पताल का इमरजेंसी वार्ड पूरी तरह पैक हो गया। हालात ये हो गए कि पीछे बने इमरजैंसी रूम और नवनिर्मित वार्ड में भी छात्राओं को शिफ्ट करना पड़ा। अस्पताल में भारी भीड़ जुट गई, जिसके बाद मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. संजय मनकोटिया ने खुद कमान संभाली और अपने स्टाफ के साथ सभी का त्वरित उपचार शुरू किया। तहसीलदार ऊना विपिन ठाकुर ने भी मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया।
सीएम के सामने स्टाफ नर्सों ने उठाया स्टाफ की कमी का मुद्दा
इतनी बड़ी संख्या में छात्राओं के बीमार होने की खबर मिलते ही मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू तुरंत अपना काफिला लेकर अस्पताल पहुंच गए। उनके साथ उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, विधायक विवेक शर्मा, सुदर्शन बबलू और पूर्व विधायक सतपाल रायजादा भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने खुद छात्राओं से बातचीत कर उनका हौसला बढ़ाया। इसी बीच, मौके पर मौजूद स्टाफ नर्सों ने मुख्यमंत्री के समक्ष अस्पताल में स्टाफ की भारी कमी का मुद्दा बेबाकी से उठाया। मुख्यमंत्री ने उनकी समस्या को गंभीरता से सुनते हुए सीएमओ डॉ. एसके वर्मा और एमएस डॉ. मनकोटिया से पूरी रिपोर्ट ली और जल्द ही अस्पताल में नए चिकित्सकों व स्टाफ की तैनाती का आश्वासन दिया।
मुहिम अच्छी, लेकिन रैली के लिए उपयुक्त नहीं था मौसम : सतपाल सत्ती
ऊना सदर से भाजपा विधायक सतपाल सिंह सत्ती भी सूचना मिलते ही क्षेत्रीय अस्पताल पहुंचे। उन्होंने भी मुख्यमंत्री सुक्खू के साथ इमरजैंसी वार्ड में जाकर बीमार बच्चों का हाल जाना। हालांकि, मुख्यमंत्री के जाने के बाद सत्ती ने सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए। मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ मुहिम चलाना एक बेहद सराहनीय कदम है, लेकिन भयंकर गर्मी के इस मौसम में छोटे बच्चों और छात्राओं को रैली में बुलाना बिल्कुल भी उपयुक्त नहीं था। प्रशासन और सरकार को बच्चों की सेहत का ध्यान रखना चाहिए था। फिलहाल, अस्पताल में उपचाराधीन सभी छात्राओं और अध्यापिकाओं की हालत स्थिर बताई जा रही है।