जालंधर : पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोमवार को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव को निर्देश दिया कि वे फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी का दौरा कर स्थिति का जायजा लें। इसके साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं। यह कदम एक छात्रा से जुड़े अपुष्ट दावों को लेकर भड़के हिंसक विरोध-प्रदर्शनों के बीच उठाया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने डीजीपी से कहा कि वे यूनिवर्सिटी में हालात का खुद जायजा लें और पक्का करें कि मामले की अच्छी तरह से जांच हो। यह निर्देश यूनिवर्सिटी में विरोध-प्रदर्शन के हिंसक होने के दो दिन बाद आया है, जिसमें आरोप है कि छात्रों ने संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और कैंपस के कुछ हिस्सों में आग लगा दी। प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली-अमृतसर नेशनल हाईवे को भी जाम कर दिया था, जिससे 15 घंटे से अधिक समय तक यातायात रुका रहा। हालांकि, पुलिस नेशनल हाईवे-44 पर यातायात बहाल करने में कामयाब रही। वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन ने 10 दिन के लिए विश्वविद्यालय बंद करने और परीक्षाएं टालने का आदेश दिया है।
यह अशांति सोशल मीडिया पर आए उन दावों के बाद शुरू हुई जिनमें कहा गया था कि एक छात्रा के साथ कथित तौर पर रेप हुआ और बाद में उसने आत्महत्या कर ली। एलपीयू ने इन आरोपों को झूठा और मनगढ़ंत बताया है जबकि पुलिस का कहना है कि वे इन दावों की जांच कर रहे हैं और प्रदर्शनकारी छात्रों के बयान के आधार पर एफआईआर दर्ज की है।
जालंधर रेंज के डीआईजी नवीन सिंगला ने बताया कि मामले की जांच के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेटिंग टीम (एसआईटी) बनाई गई है और हॉस्टल के सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है। हालांकि एफआईआर में अभी तक किसी का नाम नहीं लिया गया है।
विश्वविद्यालय ने एक बयान में कहा, "जो छात्र रुके हुए हैं, उन्हें सलाह दी जाती है कि वे अपने हॉस्टल या रहने की जगहों के अंदर ही रहें और अपनी सुरक्षा के लिए बिना वजह बाहर निकलने या किसी भी तरह के हंगामे या अशांति वाली गतिविधियों में शामिल होने से बचें।"
पुलिस ने एलपीयू और चिटकारा यूनिवर्सिटी में अचानक हुई अशांति की भी बड़े पैमाने पर जांच शुरू कर दी है, जहां एक दिन पहले ही विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए थे।
स्पेशल डीजीपी (कानून-व्यवस्था) परवीन कुमार सिन्हा ने कहा कि जांच करने वाले अधिकारी इन घटनाओं के कारणों और क्या इनके बीच कोई संबंध है, इसकी जांच कर रहे हैं। राज्य सरकार ने पुलिस को कानून-व्यवस्था बनाए रखने का निर्देश दिया है और साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा है कि एलपीयू की घटना से जुड़े आरोपों की जांच सबूतों के आधार पर की जाए।