बिहार में विभिन्न नदियों के जलस्तर में वृद्धि के कारण बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य के 11 जिलों के 61 प्रखंडों में 300 ग्राम पंचायतों के अंतर्गत करीब 16.85 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है। प्रशासन की ओर से राहत एवं बचाव कार्य लगातार चलाए जा रहे हैं। बाढ़ प्रभावित जिलों में 80 सामुदायिक रसोई केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जहां अब तक करीब 1.21 लाख लोगों को भोजन उपलब्ध कराया गया है।
इसके अलावा एक राहत शिविर भी चलाया जा रहा है, जहां 326 बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए आवासन, भोजन और चिकित्सा समेत अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। बाढ़ प्रभावित आबादी को तत्काल राहत पहुंचाने के लिए अब तक करीब 45,900 पॉलीथिन शीट और 11,700 ड्राई राशन पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। लोगों के निष्क्रमण और आवागमन को सुगम बनाने के लिए राज्य में कुल 1,158 नावों का परिचालन कराया जा रहा है।
संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए त्वरित राहत एवं बचाव कार्य के लिए एसडीआरएफ की 27 और एनडीआरएफ की 7 टीमों को विभिन्न जिलों में तैनात किया गया है। जल संसाधन विभाग के रविवार की सुबह 8-9 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार गंगा के कई प्रमुख स्थलों पर जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है। बक्सर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 0.08 मीटर ऊपर दर्ज किया गया, हालांकि यहां जलस्तर गिर रहा है।
पटना के दीघा घाट में जलस्तर 1.54 मीटर, गांधी घाट में 1.96 मीटर और हाथीदह में 1.74 मीटर खतरे के स्तर से ऊपर दर्ज किया गया। गांधी घाट पर जलस्तर स्थिर है, जबकि हाथीदह में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मुंगेर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 0.51 मीटर ऊपर और बढ़ते रुझान में है। सुल्तानगंज में यह 2.01 मीटर और भागलपुर में 0.65 मीटर ऊपर दर्ज किया गया है। कहलगांव में भी जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है।
दूसरी ओर, प्रयागराज और वाराणसी में गंगा का जलस्तर क्रमश: चेतावनी स्तर से नीचे है। प्रयागराज में जलस्तर बढ़ रहा है, जबकि वाराणसी में गिरावट दर्ज की गई है। बैराज डिस्चार्ज के आंकड़ों के अनुसार 6 सितंबर सुबह 9 बजे सोन बराज, इंद्रपुरी से 2,27,739 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। यहां जल प्रवाह गिरते रुझान में है। कोसी बराज, वीरपुर से 1,68,400 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया, जो स्थिर है। वहीं गंडक बराज, वाल्मीकिनगर से 1,29,000 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया और इसका रुझान भी स्थिर बताया गया है।
इस बीच, बिहार मौसम सेवा केंद्र ने अगले दो दिनों के दौरान राज्य के अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा होने का पूर्वानुमान जताया है। कुछ स्थानों पर भारी वर्षा भी हो सकती है। बारिश और नदियों के जलस्तर में संभावित वृद्धि को देखते हुए प्रशासन को राहत एवं बचाव कार्य के लिए अलर्ट पर रखा गया है। राज्य सरकार और जिला प्रशासन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं तथा आवश्यकता के अनुसार राहत सामग्री, नावों और बचाव दलों की तैनाती की जा रही है।