चंडीगढ़ : पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब में कथित भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को जांच सौंपने का फैसला दिया है। हाईकोर्ट ने सीबीआई को दो महीने में जांच पूरी करने का भी निर्देश दिया है। यह मामला प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को लिखे गए पत्रों से जुड़ा है। इसको लेकर वकील निखिल सराफ ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की थी, जिस पर हाईकोर्ट ने सोमवार को अपना फैसला सुनाया।
गौरतलब है कि ईडी ने पंजाब के डीजीपी को तीन चिट्ठियां लिखी थीं, जिनमें यह कहा गया था कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के ओएसडी राजबीर सिंह घुम्मन और कुछ अन्य लोग (नितिन गोहल और बीर देविंदर भी शामिल) भ्रष्टाचार में संलिप्त हैं। इन पत्रों में आरोपों के सिलसिले में कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा गया था। मांग की गई थी कि उन लोगों पर एफआईआर दर्ज की जाए।
ईडी के मुख्य आरोपों के अनुसार, मुख्यमंत्री भगवंत मान के ओएसडी राजबीर सिंह घुम्मन कथित तौर पर अधिकारियों, जिनमें आईएएस और आईपीएस अधिकारी भी शामिल हैं, के ट्रांसफर और पोस्टिंग से जुड़े रैकेट को चला रहे थे। एजेंसी ने आरोप लगाया है कि वे प्रशासनिक तबादलों और पोस्टिंग के साथ-साथ सरकारी टेंडरों में भी दखल दे रहे थे।
यह मामला तब हाईकोर्ट पहुंचा, जब पंजाब पुलिस ने कथित तौर पर ईडी की शिकायतों पर कार्रवाई नहीं की थी। वकील निखिल सराफ ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की, जिसमें मामले को सीबीआई को सौंपने की मांग की गई थी।
याचिका में सराफ ने कहा था कि प्रवर्तन निदेशालय के पत्र में पंजाब मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। सराफ ने तर्क दिया कि मामलों को 'निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच' के लिए सीबीआई को सौंपा जाना चाहिए, जो 'पंजाब पुलिस और पंजाब विजिलेंस के प्रभाव से मुक्त' हो। इसके बाद सोमवार को अपने फैसले में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने मामले को जांच के लिए सीबीआई को सौंप दिया।