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पंजाब

पंजाब विधानसभा ने उपभोक्ताओं की चिंताओं के समाधान तक अनिवार्य ई-20 लागू करने के निर्णय को स्थगित करने के लिए केंद्र सरकार से आग्रह करता प्रस्ताव पारित किया

04 अगस्त, 2026 07:27 PM
चंडीगढ़ : पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने आज पंजाब विधानसभा में एक व्यापक प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए केंद्र सरकार द्वारा उपभोक्ताओं, वाहन मालिकों तथा राज्य के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना देशभर में ई-20 पेट्रोल की अनिवार्य आपूर्ति और क्रियान्वयन के निर्णय पर गंभीर चिंता व्यक्त की।

इसके उपरांत पंजाब विधानसभा ने यह प्रस्ताव पारित करते हुए केंद्र सरकार से अपील की कि जिन वाहनों को मूल रूप से ई-20 के अनुरूप डिजाइन अथवा प्रमाणित नहीं किया गया है, उनके लिए ई-20 पेट्रोल के अनिवार्य उपयोग पर तब तक रोक लगाई जाए, जब तक ऐसे वाहनों की अनुकूलता, उपभोक्ता सुरक्षा तथा अन्य सभी संबंधित चिंताओं का व्यापक समाधान नहीं हो जाता।

प्रस्ताव में स्वीकार किया गया कि कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना, ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ बनाना तथा पर्यावरण-अनुकूल ईंधनों को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उद्देश्य हैं। हालांकि इस बात पर बल दिया गया कि ऐसी नीतियों को पारदर्शी, वैज्ञानिक तथा नागरिकों एवं राज्य सरकारों के प्रति उत्तरदायी दृष्टिकोण के साथ लागू किया जाना चाहिए।

सदन ने उल्लेख किया कि पंजाब सहित पूरे देश में बड़ी संख्या में ऐसे वाहन हैं, जिनका निर्माण ई-20 अनुकूल इंजन विकसित होने से पहले किया गया था। प्रस्ताव में कहा गया कि ई-20 के अनिवार्य उपयोग से इंजन की अनुकूलता, फ्यूल सिस्टम के पुर्जों के तेजी से घिसने, ईंधन दक्षता एवं माइलेज में कमी, रखरखाव व्यय में वृद्धि, वारंटी संबंधी विवाद तथा वाहनों के पुनर्विक्रय मूल्य में गिरावट जैसी गंभीर चिंताएं उत्पन्न होती हैं।

प्रस्ताव में आगे कहा गया, "इसके परिणामस्वरूप पड़ने वाला आर्थिक बोझ मध्यम वर्गीय परिवारों, किसानों, परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों, छोटे व्यापारियों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों तथा प्रतिदिन आवागमन करने वाले नागरिकों पर सबसे अधिक पड़ने की संभावना है।"

सदन ने यह भी उल्लेख किया कि ई-20 लागू करने का लक्ष्य वर्ष 2030 की मूल समय-सीमा से पाँच वर्ष पहले कर दिया गया, जिससे वाहन निर्माताओं, नागरिकों तथा किसानों को इस परिवर्तन के लिए पर्याप्त तैयारी का समय नहीं मिल पाया।

व्यापक आर्थिक प्रभावों पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रस्ताव में कहा गया, "उच्च परिचालन एवं परिवहन लागत के कारण कृषि उत्पादन की लागत तथा आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई का खर्च बढ़ सकता है, जिससे आम नागरिकों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।" प्रस्ताव में कहा गया कि जब तक स्वतंत्र वैज्ञानिक मूल्यांकन के माध्यम से माइलेज, इंजन की आयु, रखरखाव आवश्यकताओं तथा स्वामित्व की कुल लागत पर इसके प्रभाव को पूरी तरह पारदर्शी नहीं बनाया जाता, तब तक उपभोक्ताओं को किसी भी विशेष ईंधन का उपयोग करने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए।

पर्यावरण तथा भूजल संबंधी चुनौतियों के बावजूद राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा में पंजाब के महत्वपूर्ण योगदान का उल्लेख करते हुए सदन ने जोर देकर कहा, "अर्थव्यवस्था और पर्यावरण पर दूरगामी प्रभाव डालने वाली नीतियों को लागू करने से पहले पंजाब से समुचित परामर्श किया जाना उसका अधिकार है।"

इसी के अनुरूप पंजाब विधानसभा ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि जिन वाहनों को मूल रूप से ई-20 पेट्रोल के अनुरूप डिजाइन अथवा प्रमाणित नहीं किया गया है, उनके लिए ई-20 पेट्रोल के देशव्यापी अनिवार्य क्रियान्वयन के निर्णय की समीक्षा की जाए तथा इसे तब तक स्थगित रखा जाए, जब तक वाहन अनुकूलता, उपभोक्ता सुरक्षा तथा राज्यों से संबंधित सभी मुद्दों का समाधान नहीं हो जाता।

प्रस्ताव में केंद्र सरकार से यह भी आग्रह किया गया कि उपभोक्ताओं को एथेनॉल-मुक्त पेट्रोल और ई-20 पेट्रोल के बीच अपनी पसंद का विकल्प उपलब्ध कराया जाए। साथ ही, ई-20 की अपेक्षाकृत कम कैलोरी मान (कैलोरिफिक वैल्यू) और कम ईंधन दक्षता को ध्यान में रखते हुए इसकी खुदरा कीमत निर्धारित किए जाने की भी मांग की गई।

सदन ने ऑटोमोटिव इंजीनियरों, पेट्रोलियम विशेषज्ञों, पर्यावरण वैज्ञानिकों, उपभोक्ता संगठनों तथा राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए एक स्वतंत्र समिति गठित करने की भी सिफारिश की, जो ई-20 के क्रियान्वयन के तकनीकी एवं वित्तीय प्रभावों का समग्र मूल्यांकन कर अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से जारी करे।

इसके अतिरिक्त, प्रस्ताव में केंद्र सरकार से आग्रह किया गया कि ई-20 से संबंधित सभी वैज्ञानिक एवं तकनीकी आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं, वित्तीय अथवा यांत्रिक नुकसान झेलने वाले उपभोक्ताओं के लिए निष्पक्ष मुआवजा व्यवस्था स्थापित की जाए तथा इस प्रस्ताव की प्रतियां भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, संबंधित केंद्रीय मंत्रियों और नीति आयोग के उपाध्यक्ष को भेजी जाएं।

ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरणीय स्थिरता तथा तकनीकी प्रगति के प्रति पंजाब की प्रतिबद्धता दोहराते हुए सदन ने निष्कर्ष निकाला कि इन उद्देश्यों को इस प्रकार आगे बढ़ाया जाना चाहिए कि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा हो, संविधान की संघीय भावना कायम रहे तथा नागरिकों को अनावश्यक वित्तीय और यांत्रिक बोझ से बचाया जा सके।
पंजाब विधानसभा द्वारा पारित प्रस्ताव:

1.भारत सरकार से आग्रह किया जाए कि जिन वाहनों को मूल रूप से ई-20 ईंधन के लिए डिजाइन अथवा प्रमाणित नहीं किया गया है, उनके लिए ई-20 पेट्रोल के देशव्यापी अनिवार्य क्रियान्वयन की समीक्षा की जाए तथा इसे तब तक स्थगित रखा जाए, जब तक वाहन अनुकूलता, उपभोक्ता सुरक्षा, वैज्ञानिक मूल्यांकन तथा राज्य-विशिष्ट प्रभावों से संबंधित सभी चिंताओं का समग्र समाधान नहीं हो जाता।

2.उपभोक्ताओं को एथेनॉल-मुक्त पेट्रोल और ई-20 पेट्रोल के बीच अपनी पसंद का ईंधन चुनने का विकल्प दिया जाए तथा जिन वाहनों को मूल रूप से ई-20 के लिए डिजाइन अथवा प्रमाणित नहीं किया गया है, उनके मालिकों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ई-20 का उपयोग करने के लिए बाध्य न किया जाए, जब तक यह प्रमाणित न हो जाए कि उनके वाहन उच्च एथेनॉल मिश्रण के साथ पूरी तरह अनुकूल हैं।

3.केंद्र सरकार यह सुनिश्चित करे कि ई-20 पेट्रोल की अपेक्षाकृत कम कैलोरी मान (कैलोरिफिक वैल्यू) तथा कम ईंधन दक्षता को ध्यान में रखते हुए उसकी खुदरा कीमत उचित रूप से निर्धारित की जाए, ताकि उपभोक्ताओं को कम माइलेज और कम उपयोगी ऊर्जा प्रदान करने वाले ईंधन के लिए समान कीमत न चुकानी पड़े।

4.केंद्र सरकार वाहन इंजीनियरों, पेट्रोलियम विशेषज्ञों, पर्यावरण वैज्ञानिकों, उपभोक्ता संगठनों तथा राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए एक स्वतंत्र समिति का गठन करे, जो वाहन अनुकूलता, ईंधन दक्षता, रखरखाव लागत, उपभोक्ताओं पर वित्तीय प्रभाव, पर्यावरणीय प्रभाव तथा राज्य-विशिष्ट चिंताओं का समग्र मूल्यांकन कर अपनी सिफारिशें सार्वजनिक रूप से जारी करे।

5.केंद्र सरकार ई-20 के इंजन प्रदर्शन, माइलेज, उत्सर्जन (एमिशन), रखरखाव लागत, उपभोक्ता सुरक्षा तथा स्वामित्व की कुल लागत पर पड़ने वाले प्रभावों से संबंधित सभी वैज्ञानिक, तकनीकी एवं आर्थिक अध्ययन, तकनीकी मूल्यांकन तथा आंकड़े पूर्ण पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराए।

6.यदि यह सिद्ध होता है कि मूल रूप से ई-20 के लिए डिजाइन नहीं किए गए वाहनों में ई-20 के अनिवार्य उपयोग के कारण किसी प्रकार की वित्तीय हानि अथवा यांत्रिक खराबी हुई है, तो प्रभावित उपभोक्ताओं के लिए उपयुक्त मुआवजा व्यवस्था स्थापित की जाए।

7.इस प्रस्ताव की एक प्रति माननीय राष्ट्रपति, माननीय प्रधानमंत्री, केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री तथा नीति आयोग के उपाध्यक्ष को आवश्यक विचारार्थ प्रेषित की जाए।

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