मुंबई : हॉरर जॉनर में जहां ज्यादातर फिल्में आपको डर के मारे उछलने और पल भर के रोमांच पर टिकी होती हैं, वहीं हॉरर को सामाजिक मुद्दों को सामने लाने के एक माध्यम के रूप में इस्तेमाल करते हुए 'छोरी' फ्रेंचाइज़ी ने चुपचाप अपनी एक अलग पहचान बनाई।
नुशरत भरुचा के शानदार अभिनय से सजी फिल्में, 'छोरी' और 'छोरी 2', पारंपरिक कहानी कहने के तरीके से आगे बढ़ती हैं। ये फिल्में समाज में गहराई से जड़े मुद्दों को न सिर्फ छूती हैं, बल्कि उन्हें इस तरह पेश करती हैं, जो एक साथ दिलचस्प और असहज दोनों लगते हैं।
गौरतलब है कि पहली फिल्म 'छोरी' जहां लैंगिक भेदभाव और लड़कों को प्राथमिकता देने जैसी मानसिकता पर निर्भर रहते हुए अपनी मजबूत सामाजिक बात के लिए अलग नजर आई, वहीं 'छोरी 2' ने कहानी को और आगे बढ़ाते हुए एक ज्यादा डार्क और जटिल इमोशनल स्पेस में प्रवेश किया।
इन दोनों फिल्मों ने इन सामाजिक मुद्दों को किसी उपदेश की तरह नहीं दिखाया, बल्कि हॉरर के जरिए इन प्रथाओं के डर और परिणामों को और प्रभावी बनाया। विशेष रूप से 'छोरी 2' ने डर, मातृत्व और संघर्ष जैसे विषयों को और गहराई से एक्सप्लोर करने के साथ-साथ सामाजिक वास्तविकताओं से अपना जुड़ाव भी बनाए रखा।
इसने अपने मूल संदेश को छोड़ा नहीं, बल्कि उसे और आगे बढ़ाया, जिससे कहानी में दोहराव नहीं बल्कि एक निरंतरता महसूस हो। इस फ्रेंचाइज़ी की सबसे बड़ी खासियत इसका संतुलन है। इसमें हॉरर मौजूद है, लेकिन वह कहानी पर हावी नहीं होता। बल्कि वह कहानी को सपोर्ट करता है, जिससे सामाजिक संदेश ज्यादा प्रभावशाली और सहज तरीके से सामने आता है, न कि उपदेशात्मक ढंग से।
यही बात 'छोरी' को उस जॉनर में अलग बनाती है जहां अक्सर कहानी पीछे छूट जाती है। हालांकि दोनों ही फिल्मों में नुशरत भरुचा की मौजूदगी एक निरंतरता और भावनात्मक जुड़ाव देती है। उनके किरदार का सफर पूरी कहानी को जोड़ता है, जिससे दर्शक सिर्फ डर ही नहीं, बल्कि कहानी में भी विश्वास करते हैं। आज के बदलते कंटेंट माहौल में, जहां दर्शक गहराई वाली कहानियों के लिए ज्यादा खुले हैं, वहां 'छोरी' और 'छोरी 2' प्रासंगिक महसूस होती है।
यह दिखाती है कि हॉरर को सिर्फ मनोरंजन के रूप में नहीं, बल्कि असहज सच्चाइयों को उजागर करने के एक माध्यम के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि वर्तमान परिवेश में देखें तो जिस तरह 'छोरी' और 'छोरी 2' ने अपनी दुनिया को आकार दिया है, उससे साफ है कि कहानी आगे भी बढ़ सकती है।
अगर 'छोरी 3' बनती है, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि यह कहानी किस दिशा में जाती है और किन नए पहलुओं को सामने लाती है। फिलहाल, 'छोरी 2' के एक साल बाद, यह फ्रेंचाइज़ी इस बात की मिसाल है कि जब हॉरर के पीछे एक मजबूत उद्देश्य हो, तो उसका असर सिर्फ डर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह लंबे समय तक याद भी रहता है।