करतारपुर : किसानों को हाड़ी 2026-27 की फसलों और धान की पराली के सुचारू प्रबंधन संबंधी तकनीकी जानकारी देने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा आत्मा योजना के अंतर्गत जिला स्तरीय किसान प्रशिक्षण कैम्प का आयोजन किया गया।
कैम्प के दौरान मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे क्षेत्र के विधायक बलकार सिंह ने किसानों को धान की पराली को जलाने के बजाय उसका सुचारू प्रबंधन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पराली में आग लगाने से जहां पर्यावरण प्रदूषित होता है, वहीं भूमि की उर्वरा शक्ति का भी नुकसान होता है। उन्होंने किसानों से अपील की कि सरकार द्वारा सब्सिडी पर उपलब्ध कराई जाने वाली कृषि मशीनरी से फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करके पर्यावरण संरक्षण में योगदान दें।
उन्होंने मुख्यमंत्री श्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र के विकास और किसानों के कल्याण की प्रतिबद्धता को भी दोहराया। इस अवसर पर उन्होंने किसानों से कृषि व्यवसाय को लाभदायक बनाने के लिए कृषि विभाग के विशेषज्ञों द्वारा अनुशंसित बीज, खाद और दवाओं का ही उपयोग करने को कहा।
एस्टेट अधिकारी, पुड्डा नवदीप सिंह ने भी पराली के सुचारू प्रबंधन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पराली में आग लगाने से पृथ्वी की ऊपरी परत में मौजूद मित्र कीड़े तथा भूमि में मौजूद तत्व जैसे नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, सल्फर और जैविक पदार्थ नष्ट हो जाते हैं, जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति कम हो जाती है।
संयुक्त निदेशक कृषि इंजीनियर जगदीश सिंह ने कहा कि पंजाब में किसानों द्वारा पराली जलाने को रोकने के लिए सी.आर.एम. योजना के अंतर्गत वर्ष 2026-27 के दौरान विभिन्न मशीनरी सब्सिडी पर देने के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन मांगे गए थे। 930 मशीनों की सब्सिडी 15.75 करोड़ रुपये की राशि किसानों के खातों में डी.बी.टी. के माध्यम से ट्रांसफर की गई है।
मुख्य कृषि अधिकारी डा. रणधीर सिंह ठाकुर ने जिले भर से आए किसानों को संबोधित करते हुए सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए विभाग से निरंतर संपर्क बनाए रखने की अपील की।
उन्होंने बताया कि साउणी सीजन-2026 के दौरान मक्का के अंतर्गत 1350 हेक्टेयर क्षेत्र धान के अंतर्गत से लाया गया है और इन किसानों को 17,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की राशि भी दी जाएगी। उन्होंने बताया कि डी.एस.आर. योजना वर्ष 2026-27 के दौरान जिले में 1971.45 एकड़ क्षेत्र में धान की सीधी बुवाई की गई है।
इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र नूरमहल से पहुंचे विशेषज्ञों द्वारा हाड़ी की फसलों की खेती, कीड़े-मकोड़े और बीमारियों के बारे में तकनीकी जानकारी दी गई। कैम्प में कृषि, बागवानी, पशुपालन, जल एवं भूमि संरक्षण विभाग के अधिकारियों के अलावा विभिन्न ब्लॉकों के 1500 से अधिक किसानों ने भाग लिया।
कैम्प के दौरान किसानों द्वारा अपनी उपज के स्टॉल भी लगाए गए। इसके अलावा कृषि मशीनरी की प्रदर्शनी भी लगाई गई।
मुख्य अतिथियों एवं अन्य अतिथियों द्वारा कृषि विभाग तथा सहयोगी विभागों और स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनियों का भी दौरा किया गया।
इस प्रदर्शनी में उप निदेशक बागवानी डा. नरिंदर कलसी, उप निदेशक (प्रशिक्षण) के.वी.के. डा. संजीव कटारिया, प्रोजेक्ट अधिकारी (गन्ना) डा. रुलदू सिंह, ए.पी.पी.ओ. डा. सुरजीत सिंह, कृषि अधिकारी (सदर मुख्यालय) डा. जसबीर सिंह ने भी किसानों को कृषि संबंधी उपयोगी सुझाव दिए।