जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में शुक्रवार को हुए आतंकी हमले में 2 प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई। इन टारगेटेड हत्याओं के पीछे लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के कमांडर लतीफ भट और उसके सहयोगी का हाथ होने की आशंका है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, भट के शागिर्द वारिस शाह ने इन हमलों के लिए रसद मुहैया कराई और रेकी की थी। शुरुआती जांच में सामने आया है कि दोनों हमलों में एके-47 राइफल के बजाय छोटे कैलिबर के हथियार का इस्तेमाल किया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, यह तरीका हाइब्रिड आतंकवादियों का रहा है। ये ऐसे ओवर ग्राउंड वर्कर्स होते हैं, जिन्हें स्थानीय स्तर पर भर्ती किया जाता है। वे हमला करने के बाद आम नागरिकों के बीच छिप जाते हैं, जिससे उन्हें पकड़ना मुश्किल हो जाता है। अधिकारियों का कहना है कि हमले का तरीका द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) से मेल खाता है, जिसे लश्कर-ए-तैयबा का सहयोगी संगठन माना जाता है। एक अफसर ने बताया, 'टीआरएफ की पहचान पिस्तौल से हमला करने और फिर भीड़ में गायब हो जाने की रणनीति है। वे बड़े हथियारों का इस्तेमाल नहीं करते और अपने पीछे सुराग नहीं छोड़ते, जिससे सुरक्षा एजेंसियों के लिए उनका पता लगाना कठिन हो जाता है।'
लतीफ भट कौन है?
लतीफ भट लश्कर-ए-तैयबा का एक कमांडर है, जो शोपियां मुठभेड़ के बाद चर्चा में आया था। उस एनकाउंटर में वह लश्कर के टॉप कमांडर जाकिर गनई के साथ सुरक्षा बलों से घिर गया था। करीब पांच दिनों तक चली मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने जाकिर गनई को मार गिराया, लेकिन लतीफ भट वहां से भाग निकला था। जांच एजेंसियों को संदेह है कि इसके बाद उसने सीमा पार बैठे अपने आकाओं के निर्देश पर स्लीपर सेल को एक्टिव किया। लतीफ भट ने गैर-स्थानीय लोगों और सुरक्षा बलों को निशाना बनाने वाली टारगेटेड हत्याओं की साजिश रची।
छत्तीसगढ़ के 2 मजदूरों की मौत
कुलगाम जिले में ईंट-भट्ठे पर हुए आतंकवादी हमले में छत्तीसगढ़ के 2 मजदूरों की मौत हो गई। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। हमलावरों ने शुक्रवार देर शाम दक्षिण कश्मीर के केलम इलाके में स्थित ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे मजदूरों को निशाना बनाया। हमले में दोनों मजदूर घायल हो गए। इनमें से एक दीपक रात्रे ने अस्पताल ले जाए जाने से पहले ही दम तोड़ दिया। दूसरे घायल मजदूर बोपिंदर को पहले जीएमसी अनंतनाग ले जाया गया, जहां से बाद में उसे सौरा स्थित SKIMS अस्पताल रेफर किया गया। इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई।
अधिकारियों ने बताया कि दोनों मजदूर 20 से 30 वर्ष की आयु के थे और छत्तीसगढ़ के रहने वाले थे। इस हमले से करीब 10 दिन पहले अनंतनाग शहर में भी आतंकवादियों ने एक पुलिस अधिकारी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इससे पहले 2024 में जम्मू कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में भी दो मजदूरों की आतंकियों ने हत्या कर दी थी। 7 फरवरी 2024 को पंजाब के दो मजदूरों अमृतपाल सिंह और रोहित मसीह की श्रीनगर के शहीद गंज इलाके में आतंकवादी ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।