प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक के मैसूर में श्री रामकृष्ण आश्रम में स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक युवा केंद्र 'विवेक स्मारक' का उद्घाटन किया। इस मौके पर राज्य के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी मौजूद रहे। उन्होंने पीएम मोदी से सहयोग की अपील करते हुए कहा, 'पूरा कर्नाटक आपके साथ खड़ा है। हम मिलकर काम करना चाहते हैं। मैं आपसे आग्रह करता हूं कि हम सभी साथ मिलकर आगे बढ़ें। यह एक महान राज्य है। भारत की प्रगति में कर्नाटक की अहम भूमिका है और कर्नाटक हमेशा आपके साथ रहेगा। आइए, मिलकर इस देश को और गौरवान्वित बनाएं।'
डीके शिवकुमार ने कहा, 'मेरे पास कहने के लिए बहुत कुछ है, लेकिन मुझे केवल पांच मिनट का समय दिया गया है। मैं आपका समय बर्बाद नहीं करना चाहता। प्रधानमंत्री का संदेश देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।' उन्होंने कहा कि आज मुझे गर्व है कि हमारे माननीय प्रधानमंत्री इस महान आयोजन में शामिल होने के लिए यहां आए हैं। यह देश के युवा आंदोलन के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है।
वहीं, पीएम मोदी ने इस मौके पर कहा कि करीब 130 वर्ष पहले स्वामी विवेकानंद एक युवा सन्यासी के रूप में भ्रमण करते हुए मैसूर आए थे तब उनकी प्रसिद्धि वैसी नहीं थी लेकिन विचार उतने ही ऊंचे थे। उनमें से एक प्रमुख नाम मैसूर के तत्कालीन महाराजा का भी था। प्रधानमंत्री ने कहा, 'जब स्वामी विवेकानंद अमेरिका में थे तब उन्होंने वहां से मैसूर के तत्कालीन महाराजा को एक पत्र लिखा था जिसमें उन्होंने स्वयं महाराजा के सहयोग का उल्लेख किया था। स्वामी विवेकानंद ने शास्त्रों को आत्मसात किया था जो कहते हैं कि वास्तव में वही जीता है जो दूसरों के लिए जीता है।'
पीएम मोदी ने कहा, 'श्री रामकृष्ण आश्रम और स्वामी विवेकानंद की स्मृतियां भी मैसूर की विरासत का एक समृद्ध हिस्सा हैं। स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक युवा केंद्र यानी 'विवेक स्मारक' के उद्घाटन के जरिए हम इस मिशन को एक नया विस्तार दे रहे हैं। इसके लिए मैं श्री रामकृष्ण आश्रम और इससे जुड़े सभी विद्वानों को हार्दिक बधाई देता हूं।'
पीएम मोदी ने कहा, 'स्वामी विवेकानंद का मानना था कि राष्ट्र के उत्थान के लिए शिक्षा जितनी आवश्यक है, उतनी ही महत्वपूर्ण समानता भी है। शिक्षा और अवसरों में किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो, यह अब राष्ट्र का संकल्प बन चुका है।' उन्होंने कहा कि अब मेडिसिन और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों की पढ़ाई भी मातृभाषा में करने की सुविधा उपलब्ध है। इससे भाषा के आधार पर अवसरों में होने वाले भेदभाव को कम करने में मदद मिल रही है।