तेहरान ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच हालात और तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। रविवार को ईरान ने अमरीका और इजरायल को सीधी चेतावनी दी है कि अगर अमरीका ने उस पर सैन्य हमला किया, तो जवाब में इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमरीकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा। यह बयान ऐसे समय आया है, जब इजरायली सूत्रों ने दावा किया है कि किसी भी अमरीकी दखल की आशंका को देखते हुए इजरायल हाई अलर्ट पर है। ईरानी संसद में स्पीकर मोहम्मद बाकिर क़ालिबाफ ने कहा कि अगर ईरान पर हमला हुआ तो कब्जे वाले इलाके यानी इजरायल, अमरीकी सैन्य अड्डे और युद्धपोत हमारे वैध निशाने होंगे। क़ालिबाफ ईरान की रिवोल्यूशनरी गाड्र्स से जुड़े रहे हैं और उनका यह बयान बेहद अहम माना जा रहा है।
ईरान इस वक्त 2022 के बाद सबसे बड़े सरकार विरोधी प्रदर्शनों का सामना कर रहा है। ये प्रदर्शन 28 दिसंबर से शुरू हुए थे, जिनकी वजह बढ़ती महंगाई बताई जा रही है। बाद में ये आंदोलन सीधे खामेनेई शासन के खिलाफ हो गया। इजरायल और ईरान के बीच पहले से ही तनाव बना हुआ है, खासतौर पर ईरान के न्यूक्लियर और मिसाइल कार्यक्रम को लेकर। ऐसे में अमरीका की संभावित दखलअंदाजी और ईरान की धमकी ने पूरे पश्चिम एशिया में हालात और गंभीर कर दिए हैं।
प्रदर्शनकारियों को फांसी की धमकी
ईरान में बीते दो हफ्ते से सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी हैं। इन प्रदर्शनों में हिंसा लगातार बढ़ रही है और 217 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, इनमें ज़्यादातर प्रदर्शनकारी शामिल हैं। पूरे ईरान में सौ से ज़्यादा शहरों में ये प्रदर्शन फैल चुके हैं। इस बीच सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपना लिया है। ईरान के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवाहेदी आजाद ने चेतावनी दी है कि प्रदर्शन में शामिल लोगों को ‘खुदा का दुश्मन’ माना जाएगा, जिसके तहत मौत की सजा दी जा सकती है।
हमले की आशंका से इजरायल हाई अलर्ट पर
ईरान पर अमरीकी हमले की आशंका को लेकर इजरायल हाई अलर्ट पर है। रिपोर्ट में इजरायली सूत्रों के हवाले से बताया है कि हालात को देखते हुए इजरायली सुरक्षा एजेंसियां सतर्कता बढ़ाए हुए हैं। इजरायल और ईरान जून में 12 दिन की जंग लड़ चुके हैं, जिसमें अमरीका ने इजराइल के साथ मिलकर हवाई हमले किए थे। शनिवार को इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमरीकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच फोन पर बातचीत हुई। रिपोर्ट के मुताबिक इस बातचीत में ईरान में अमरीकी दखल की संभावना पर चर्चा हुई। अमरीकी अधिकारी ने कॉल की पुष्टि की, लेकिन बातचीत के मुद्दों का खुलासा नहीं किया।