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राष्ट्रीय

संयुक्त राष्ट्र मंच का राजनीतिकरण करने पर भारत ने पाकिस्तान को घेरा

24 जून, 2026 02:21 PM

भारत ने पाकिस्तान की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि उसने संयुक्त राष्ट्र के एक मंच के सह-अध्यक्ष के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का निष्पक्ष रूप से निर्वहन करने के बजाय अपने पद का दुरुपयोग कर मंच का राजनीतिकरण किया। भारत ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और आंतरिक हिस्सा है तथा इस विषय पर किसी भी प्रकार की बाहरी टिप्पणी स्वीकार्य नहीं है।

सह-अध्यक्ष की भूमिका पर उठाए सवाल
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने मंगलवार को सुरक्षा परिषद की एक अनौपचारिक बैठक में कहा, “जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश भारत का पूर्णतः आंतरिक मामला है। यह हमेशा भारत का हिस्सा था, है और रहेगा।” उन्होंने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि एक सह-अध्यक्ष, जिससे संतुलित और निष्पक्ष आचरण की अपेक्षा की जाती है, उसने इस मंच का राजनीतिकरण करने का विकल्प चुना।

चीन और पाकिस्तान ने किया था बैठक का आयोजन
“कार्यान्वयन की खाई को पाटना : सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव और अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा का संरक्षण” विषय पर आयोजित इस बैठक का संयुक्त रूप से आयोजन चीन और पाकिस्तान ने किया था। दोनों देशों के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि इसकी सह-अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक के दौरान पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद ने कश्मीर मुद्दा उठाया, जैसा कि पाकिस्तान अक्सर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर करता रहा है।

सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों पर पाकिस्तान को घेरा
भारत ने कहा कि सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के क्रियान्वयन में सबसे बड़ी बाधा स्वयं पाकिस्तान रहा है। भारत का कहना है कि पाकिस्तान ने अप्रैल 1948 के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 47 का पालन नहीं किया, जिसमें उससे कश्मीर के उन क्षेत्रों से अपनी सेना, सुरक्षा बलों और नागरिकों को हटाने को कहा गया था, जिन पर उसने कब्जा किया था।

पीओके में विरोध प्रदर्शनों का भी किया उल्लेख
भारत ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के नियंत्रण वाले कश्मीर क्षेत्रों में लोगों के विरोध प्रदर्शनों को उसकी सुरक्षा एजेंसियां बलपूर्वक दबाने का प्रयास कर रही हैं। भारत ने संकेत दिया कि मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर पाकिस्तान का रिकॉर्ड गंभीर सवालों के घेरे में है।

आरिया फॉर्मूला के तहत हुई थी बैठक
यह बैठक तथाकथित ‘आरिया फॉर्मूला’ (Arria Formula) के तहत आयोजित की गई थी, जो सुरक्षा परिषद की एक अनौपचारिक बैठक व्यवस्था है। इसका नाम वेनेजुएला के राजनयिक डिएगो आरिया के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने परिषद की औपचारिक प्रक्रियाओं से इतर संवाद के लिए यह प्रारूप शुरू किया था।

सुरक्षा परिषद के जनादेशों की समीक्षा की वकालत
पी. हरीश ने संयुक्त राष्ट्र की 80वीं वर्षगांठ के अवसर पर चल रही यूएन-80 समीक्षा प्रक्रिया के तहत सुरक्षा परिषद के जनादेशों की समीक्षा की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि जब महासभा के सभी जनादेशों की समीक्षा की जा रही है, तो सुरक्षा परिषद के जनादेशों को इससे बाहर रखने का कोई कारण नहीं है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय-6 के अंतर्गत मध्यस्थता और वार्ता संबंधी प्रावधानों की समीक्षा का सुझाव देते हुए कहा कि ऐसे उपाय उस समय की परिस्थितियों के अनुरूप बनाए जाते हैं और उनकी वैधता अनिश्चितकालीन नहीं मानी जा सकती।

फिलिस्तीन का उदाहरण देकर रखा पक्ष
हरीश ने फिलिस्तीन का उदाहरण देते हुए कहा कि दशकों से विभिन्न मध्यस्थता प्रयासों के बावजूद समाधान नहीं निकल सका है। उन्होंने कहा कि पुराने और अप्रासंगिक मध्यस्थता ढांचों की समीक्षा के लिए एक मजबूत आधार मौजूद है। उनके अनुसार, यह मान लेना उचित नहीं है कि अध्याय-6 के तहत कोई मध्यस्थता व्यवस्था हमेशा लागू रहेगी, क्योंकि बदलती परिस्थितियों के अनुरूप उसकी समीक्षा आवश्यक है।

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