शिमला जिला के एक सरकारी जीएनएम स्कूल में छात्राओं के टीबी से संक्रमित होने का मामला सामने आया है। ये घटना रामपुर के खनेरी अस्पताल के नर्सिंग स्कूल की है। यहां पढ़ रही आधा दर्जन बेटियों को टीबी होने की पुष्टि एसडीएम रामपुर की जांच रिपोर्ट में भी हो गई थी। इसके बावजूद अब तक स्थितियों में सुधार नहीं किया गया। इस जीएनएम स्कूल को निदेशक चिकित्सा शिक्षा चला रहे हैं, जो आजकल विदेश दौरे पर हैं। एसडीएम रामपुर हर्ष अमरेंद्र नेगी ने एक बेनाम ई-मेल में आई शिकायत के बाद इस संस्थान में छापा मारा था। इसके बाद इसकी कार्यवाहक प्रिंसीपल से जवाब मांगा गया था और इसकी रिपोर्ट स्वास्थ्य निदेशालय और स्वास्थ्य शिक्षा निदेशालय को भी भेजी थी। एसडीएम ने जब छात्रों से बात की थी, तो भी दो से चार छात्रों में इस तरह के संक्रमण की बात सामने आई थी। इन छात्राओं के लिए दवाई शुरू कर दी गई थी।
इसके बाद कुछ और छात्राओं में संक्रमण हुआ। इसकी एक वजह यह थी कि एक कमरे में 10-10 बेड लगाए गए हैं और उनके चलने के लिए भी स्थान नहीं है। जांच में कई अनियमित्ताएं सामने आने के बाद भी प्रबंधन ने इस मामले को दबाने का कोशिश की। अब प्रशिक्षु नर्सों के परिजनों का आरोप है कि संस्थान में पौष्टिक भोजन की कमी और अत्यधिक मानसिक दबाव के कारण छात्राएं बीमार हुर्ईं हैं। प्रबंधन ने छात्राओं के बीमार होने पर परिजनों को जानकारी नहीं दी। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि टीबी जैसी गंभीर बीमारी की जानकारी उन्हें समय पर नहीं दी गई। परिजनों को इस मामले की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिलीए जिसके बाद वे रामपुर पहुंचे। शनिवार को बहुत से लोग इस नियम स्कूल में आए थे। इन्होंने कनेरी अस्पताल के एमएस डॉ. रोशन कौंडल से भी बात की। अस्पताल प्रभारी डा. रोशन कौंडल ने बताया कि नर्सिंग संस्थान में कुछ प्रशिक्षु नर्सों के टीबी सक्रमित होने की बात सामने आई थी, जिनकी दवाई शुरू कर दी गई है।
अलग से इंक्वारी की जरूरत
एसडीएम हर्ष अमरेंद्र नेगी ने भी बताया कि उन्होंने एक बार प्रारंभिक जांच कर रिपोर्ट भेज दी थी। इस मामले में विस्तृत तौर पर अलग से इंक्वारी की जरूरत है। अस्पताल में इलाज को आए टीबी रोगियों
के डाटा से मिलान के बाद ही पूरी बात पता चलेगी।