चीन और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों की तल्खी एक बार फिर चरम पर है। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि वह ईरानी तेल खरीदने वाली चीनी कंपनियों पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों को स्वीकार नहीं करेगा। यह बयान उस समय आया है जब वैश्विक राजनीति की नजरें इसी महीने होने वाली राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात पर टिकी हैं।
चीन का कड़ा रुख : "एकतरफा पाबंदियां अस्वीकार्य"
चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने शनिवार को जारी एक आधिकारिक बयान में अमेरिका के इस कदम को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया है। चीन के मुख्य तर्क निम्नलिखित हैं:
अवैध हस्तक्षेप: चीन का मानना है कि ये पाबंदियां अन्य देशों के साथ सामान्य आर्थिक और व्यापारिक कामकाज करने के संप्रभु अधिकार को रोकती हैं।
संयुक्त राष्ट्र की अनदेखी : चीन ने स्पष्ट किया कि वह केवल उन पाबंदियों का समर्थन करता है जो संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा अनुमोदित हों। बिना वैश्विक सहमति के लगाई गई 'एकतरफा पाबंदियां' अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों के खिलाफ हैं।
कंपनियों को निर्देश : मंत्रालय ने अपनी कंपनियों और संस्थानों को इन अमेरिकी पाबंदियों को लागू न करने की हिदायत दी है।
विवाद की जड़ : 'लाखों बैरल' ईरानी तेल का आयात
अमेरिका ने हाल ही में एक और चीनी कंपनी को प्रतिबंधित किया है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि इस कंपनी ने ईरान से "लाखों बैरल" कच्चा तेल आयात कर ईरानी अर्थव्यवस्था को अरबों डॉलर की मजबूती प्रदान की है। हालांकि, चीन ने अपने बयान में संबंधित कंपनी के नाम का खुलासा नहीं किया है, लेकिन इसे चीनी संप्रभुता पर हमला करार दिया है।
कूटनीतिक समय: मुलाक़ात से पहले शह-मात का खेल
यह घटनाक्रम कूटनीतिक रूप से काफी संवेदनशील समय पर सामने आया है।
ट्रंप-जिनपिंग शिखर सम्मेलन: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसी महीने चीन की यात्रा पर जाने वाले हैं।
दबाव की राजनीति: विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका इन प्रतिबंधों के जरिए व्यापार वार्ता से पहले चीन पर दबाव बनाना चाहता है, जबकि चीन ने सख्त रुख अपनाकर यह जता दिया है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों और व्यापारिक स्वायत्तता से समझौता नहीं करेगा।
चीन के इस इनकार से वैश्विक तेल बाजार और दोनों देशों के बीच होने वाली आगामी वार्ताओं पर असर पड़ना तय है। यदि चीन अमेरिकी प्रतिबंधों की अवहेलना जारी रखता है, तो अमेरिका आने वाले समय में और अधिक कड़े वित्तीय कदम उठा सकता है, जिससे 'ट्रेड वॉर' की स्थिति और विकराल हो सकती है।