हिमाचल प्रदेश में होने वाले पंचायत चुनावों को लेकर तस्वीर अब पूरी तरह साफ हो गई है। पंचायत चुनाव में अपनी दावेदारी को मजबूत करने के लिए राज्य केा अधिकांश इलाकों में ग्रामीण स्तर पर उम्मीदवारों ने दस्तक देना श्ुारू कर दिया है। हालांकि पंचायत चुनाव को लेकर शेडयूल जरूर तय हो गया है, लेकिन नामांकन भरने से पहले ही राज्य भर में कई उम्मीदवार टोलियां बनाकर चुनाव प्रचार के लिए भी निकल रहे हैं। इस बार पंचायत चुनाव राज्य भर में बड़ा ही दिलचस्प रहने वाला है। राज्य में पहली बार 31 हजार 182 पदों के लिए चुनाव हो रहे हैं। प्रत्येक पंचायत में प्रत्येक व्यक्ति को पांच वोट देने हैं। इस बार के चुनाव में उम्मीदवारों की संख्या में भी इजाफा देखने को मिलेगा। सामान्य व्यक्ति से लेकर एक एचएएस अधिकारी स्तर तक के उम्मीदवार भी इस बार के पंचायत चुनाव में अपनी चुनावी ताल ठोंकने को तैयार हैं। ऐसे में चुनावी मुकाबला दिलचस्प रहने के साथ ही कड़ा भी होने वाला है।
उम्मीदवार अपनी जान-पहचान बढ़ाने के लिए मतदाताओं की नब्ज टटोल रहे हैं और अपनी उम्मीदवारी को पक्का करने के लिए दिन-रात एक कर मतदाता को अपने पक्ष में मतदान करने के लिए उन्हें मना रहे हैं। राज्य में इस बार कुल 3758 पंचायतों में चुनाव करवाए जा रहे हैं । प्रदेश में इस बार 21678 वार्डों में वार्ड सदस्य के लिए मतदान होगा। ब्लॉक समिति चुनावों की बात करें तो इस बार 1769 सीटों पर चुनाव होंगे। जिला परिषद चुनावों में इस बार 251 जिला परिषद सीटों पर चुनाव होंगे। कुल मिलाकर इस बार पंचायत चुनावों का दायरा पहले के मुकाबले और व्यापक हो गया है, जिससे स्थानीय लोकतंत्र में भागीदारी और प्रतिनिधित्व बढऩे की उम्मीद है। चुनावों को लेकर प्रशासनिक तैयारियां भी तेज हो गई हैं।
आउटसोर्स और डिपो होल्डर उतर सकते हैं मैदान में
राज्य में इस बार कुछ वर्गों के लिए चुनावी रास्ता पूरी तरह खुला रखा गया है, जिससे ग्रामीण स्तर पर राजनीतिक भागीदारी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। नियमों के अनुसार, आउटसोर्स कर्मचारी, डिपो होल्डर, कृषक मित्र, होम गार्ड और लंबरदार पंचायत चुनाव लडऩे के लिए पात्र माने गए हैं। इसके साथ ही वनाधिकार कानून 2006, एफआरए के तहत नियमितीकरण के लिए आवेदन करने वाले लोगों को भी राहत दी गई है और उन्हें चुनाव लडऩे की अनुमति दी गई है। इन श्रेणियों के लिए स्पष्ट किया गया है कि वे बिना किसी बाधा के चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा ले सकते हैं।
ये नहीं लड़ सकेंगे चुनाव
जमीन से जुड़े मामलों में नियम और सख्त हैं। जो लोग सरकारी जमीन पर कब्जा कर उसे नियमित करने के लिए आवेदन कर चुके हैं, वे चुनाव लडऩे के पात्र नहीं होंगे। इसके अलावा जिन लोगों के खिलाफ मिसल कब्जा नाजायज तैयार की गई है या जिनके मामलों में अदालत में अपील या पुनरीक्षण लंबित है, उन्हें भी अयोग्य माना जाएगा। अगर कोई अतिक्रमण छोड़ देता है, तब भी उसे राहत नहीं मिलेगी।
तीन चरणों में इलेक्शन
हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव तीन चरणों में कराए जाएंगे। प्रदेश भर की 3,754 ग्राम पंचायतों में मतदान 26 मई, 28 मई और 30 मई को तीन चरणों में होगा। इसके लिए नामांकन का दौर शुरु सात मई से शुरू होगा। चुनावी प्रक्रिया के करीब आते ही उम्मीदवारों के बीच हलचल तेज हो गई है। जरूरी है कि चुनाव लडऩे के इच्छुक लोग नामांकन से पहले अपनी पात्रता को इन नियमों के अनुसार अच्छी तरह जांच लें।