चंडीगढ़ : हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि राखीगढ़ी की मिट्टी में हमारे पुरखों के श्रम, हुनर और एक विकसित सभ्यता की स्मृतियां सुरक्षित हैं। यह ऐतिहासिक स्थल हमारी हजारों वर्ष पुरानी पहचान, आत्मीयता और स्वाभिमान का प्रतीक है। सरकार राखीगढ़ी के संरक्षण, अनुसंधान, पर्यटन और जनभागीदारी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री सोमवार को हांसी जिला के राखीगढ़ी में 7 दिवसीय ‘राखीगढ़ी महोत्सव-2026’ के शुभारंभ अवसर पर संबोधित कर रहे थे। इस वर्ष महोत्सव की थीम ‘माटी से महोत्सव तक’ रखी गई है। इस अवसर पर विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कार्यक्रम के दौरान राखीगढ़ी की ग्राम पंचायत की तरफ से दिए गए मांग पत्र को पूरा करने का आश्वासन भी दिया, साथ ही उन्होंने ग्राम पंचायत को 51 लाख रुपए दिए जाने की घोषणा भी की। इससे पहले मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राखीगढ़ी में बन रहे संग्रहालय का अवलोकन किया। उन्होंने महोत्सव में लगाई गई विभिन्न स्टॉल पर खरीदारी भी की तथा खेल गतिविधियों और साइट पर आयोजित अन्य गतिविधियों का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने पुरातत्व विभाग द्वारा लगाए गए खुदाई के डेमो का भी अवलोकन किया, जिसमें खुदाई की प्रक्रिया को समझाने के साथ उस दौरान मिले अवशेषों को प्रदर्शित किया गया था। इस दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, कैबिनेट मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा तथा हरियाणा के विरासत एवं पर्यटन विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित अग्रवाल ने सील का भी अवलोकन किया।
नायब सिंह सैनी ने अपने संबोधन में कहा कि राखीगढ़ी का यह महोत्सव हमें अपनी जड़ों को जानने और आने वाली पीढ़ियों के प्रति अपना दायित्व समझने का अवसर देगा। ‘माटी से महोत्सव तक’ की थीम में हमारी सभ्यता की यात्रा समाई हुई है। यही माटी किसान के हाथों में अन्न बनती है, कुम्हार के हाथों में आकार लेती है और कलाकार के हाथों में संस्कृति की अभिव्यक्ति बन जाती है। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र ने मानवता को कर्म का संदेश दिया, जबकि राखीगढ़ी ने हजारों वर्ष पहले की सभ्य मानव संस्कृति को उजागर किया है। यहां मानव जीवन, शिल्प, कृषि और सामुदायिक व्यवस्था के विकास की महत्वपूर्ण कहानी धरती की परतों में सुरक्षित है। यहां मिले मिट्टी के बर्तन, मनके, मुहरें और शिल्प से जुड़ी वस्तुएं हमारे पूर्वजों की सृजनशीलता का परिचय देती हैं।
नई पीढ़ी को विरासत से जोड़ना जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास की सार्थकता उससे मिलने वाली सीख में भी है। राखीगढ़ी की सुनियोजित बस्ती हमें यह सोचने का अवसर देती है कि हम अपने गांवों और शहरों को अधिक स्वच्छ, संवेदनशील और प्रकृति के अनुकूल कैसे बनाएं। उन्होंने युवाओं से अपनी विरासत को जानने और उसकी सही जानकारी आगे पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भाषाएं सीखें, संवाद का कौशल बढ़ाएं और डिजिटल माध्यमों पर राखीगढ़ी की प्रामाणिक कहानी पहुंचाएं। विद्यालयों में राखीगढ़ी विषय पर प्रश्नोत्तरी जैसी गतिविधियां भी इस दिशा में उपयोगी पहल हैं।
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों और अभिभावकों से बच्चों को स्थानीय विरासत से परिचित कराने तथा ऐतिहासिक स्थलों और संग्रहालयों तक लेकर जाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जिस बच्चे को अपने आसपास के इतिहास की जानकारी होगी, वह दुनिया में कहीं भी जाकर अपनी धरती की कहानी गर्व और प्रमाणिकता के साथ बता सकेगा।
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में राखीगढ़ी पर होगा विचार-विमर्श
मुख्यमंत्री ने कहा कि महोत्सव के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें देश-विदेश के विद्वान राखीगढ़ी से प्राप्त साक्ष्यों, नवीन खोजों और भविष्य के शोध की संभावनाओं पर विचार करेंगे। इससे नई शोध योजनाओं, संस्थागत सहयोग और ज्ञान के व्यापक प्रसार का आधार तैयार होगा। उन्होंने विद्वानों और पुरातत्वविदों के परिश्रम को नमन करते हुए कहा कि वे धरती की परतों को पढ़कर बिखरे हुए साक्ष्यों को जोड़ते हैं और मानव सभ्यता के अनकहे अध्याय सामने लाते हैं।
राखीगढ़ी के विकास पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘विकास भी, विरासत भी’ का विजन हमारे सामने रखा है। आधुनिक भारत का निर्माण अपनी सांस्कृतिक जड़ों से शक्ति लेकर हो, यही उनकी सोच है। केंद्र सरकार द्वारा जिन पांच पुरातात्विक स्थलों को ‘आइकॉनिक साइट’ के रूप में विकसित करने की घोषणा की गई थी, उनमें राखीगढ़ी भी शामिल है। उन्होंने कहा कि राखीगढ़ी को पर्यटन के मानचित्र पर प्रमुख स्थान देने के लिए कई ठोस कदम उठाए गए हैं। राखीगढ़ी को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने का प्रयास किया जा रहा है। यहां के अवशेषों पर गहन शोध के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां संग्रहालय एवं इंटरप्रिटेशन सेंटर के निर्माण का सिविल कार्य लगभग पूरा हो चुका है। अगले चरण में लगभग 188 करोड़ रुपये की लागत से इसे विश्वस्तरीय बनाया जा रहा है।
सरस्वती-सिंधु सभ्यता कॉरिडोर विकसित करने की परिकल्पना
उन्होंने कहा कि सरकार ने सरस्वती-सिंधु सभ्यता कॉरिडोर विकसित करने की परिकल्पना भी की है। इसके माध्यम से महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों के बीच पर्यटन की दृष्टि से बेहतर संपर्क और समन्वय विकसित करने का प्रयास होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राखीगढ़ी के अलावा प्रदेश के अन्य पुरातात्विक महत्व के स्थलों के विकास के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। पुरानी तहसील बिल्डिंग नूंह, लोहारू के किले और तावडू के मकबरा परिसर को राज्य संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है। पंचकूला के सेक्टर-5 में स्टेट ऑफ आर्ट पुरातात्विक संग्रहालय स्थापित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्राचीन संस्कृति के संरक्षण और उसकी पहचान के लिए सभी राज्य संरक्षित स्मारकों की योजना और बाहरी डिजाइन की रूपरेखा तैयार करने की परियोजना शुरू की गई है। हरियाणा की कला एवं सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षा, संरक्षण, बढ़ावा और प्रोत्साहन देने के लिए राज्य कला एवं संस्कृति नीति ‘कलश’ बनाई गई है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि भारतीय संस्कृति की धरोहरों को संरक्षित कर आने वाली पीढ़ियों को अपनी परंपराओं से अवगत कराना सरकार की प्रतिबद्धता है। इसी दिशा में कुरुक्षेत्र की धरा पर अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव का आयोजन किया जाता है।
उन्होंने कहा कि सरकार अपनी विरासत और धरोहर को सहेजकर उसके आधार पर आधुनिक हरियाणा के निर्माण में लगी है। राखीगढ़ी महोत्सव भी इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाता है और ऐतिहासिक धरोहर को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा। मुख्यमंत्री ने लोगों से आह्वान किया कि वे इस महोत्सव से अपनी माटी को जानने, अपनी विरासत को सहेजने और उससे मिली प्रेरणा से बेहतर भविष्य बनाने का संकल्प लेकर जाएं।