पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री और भाजपा के फायरब्रांड नेता शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को एक सार्वजनिक मंच से बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि उनकी सरकार राज्य में जल्द ही धर्मांतरण के खिलाफ सख्त कानून लाएगी। इसके साथ ही उन्होंने बंगाल की सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए समान नागरिक संहिता (UCC) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को भी लागू करने की प्रतिबद्धता जताई। मुख्यमंत्री के इन बयानों के तुरंत बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने पलटवार करते हुए भाजपा सरकार पर विपक्ष को डराने-धमकाने और दमनकारी नीतियों के जरिए जड़ से उखाड़ने का आरोप लगाया है।
रवींद्र सदन में 'वंदे मातरम' गीत की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सीमा पार से होने वाली घुसपैठ को राज्य की जनसांख्यिकी में बदलाव और लव जिहाद का मुख्य कारण बताया।
उन्होंने कहा, "हमें थोड़ा समय दीजिए। बंगाल में धर्मांतरण के खिलाफ एक कड़ा कानून, समान नागरिक संहिता (UCC) और एनआरसी (NRC) को निश्चित रूप से पेश किया जाएगा। जो लोग अवैध रूप से प्रवेश कर रहे हैं और भारत की संस्कृति तथा राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पहुंचा रहे हैं उन्हें वापस भेजा जाएगा।"
मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि धार्मिक उत्पीड़न का सामना करने के बाद भारत आए हिंदू शरणार्थी हैं और उन्हें नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत नागरिकता दी जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने घोषणा की कि आपातकाल (1975) का विरोध करने वाले लोकतंत्र सेनानियों को 9 अगस्त को राज्य स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र भवानीपुर में एक नए भाजपा कार्यालय का भी उद्घाटन किया।
महुआ मोइत्रा का तीखा पलटवार
मुख्यमंत्री के बयानों और विधानसभा में लाए जा रहे नए विधेयकों को लेकर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कालीघाट स्थित ममता बनर्जी के आवास पर हुई बैठक के बाद पत्रकारों को संबोधित किया। महुआ मोइत्रा ने सरकार की नीतियों की तुलना आपातकाल के काले दौर से करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को डराया जा रहा है, लेकिन लाखों मतदाताओं की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। महुआ मोइत्रा ने विशेष रूप से प्रस्तावित बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल, 2026 की प्रतियों को दिखाते हुए इसे बेहद खतरनाक बताया।
मुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया कि इस कानून के तहत किसी भी व्यक्ति को महज संदेह के आधार पर बिना किसी अदालती सुनवाई के एक साल तक हिरासत में रखा जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि यह प्रस्तावित कानून आपातकाल के समय के मीसा (MISA) और वर्तमान यूएपीए (UAPA) से भी अधिक कठोर है, जिसमें पर्याप्त न्यायिक सुरक्षा उपाय शामिल नहीं हैं।
भाजपा का भी जवाब
टीएमसी के इन आरोपों को खारिज करते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि विपक्ष सत्ता गंवाने के बाद जनता के बीच डर का माहौल पैदा कर रहा है। भाजपा का तर्क है कि एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल, 2026 का उद्देश्य गुजरात और उत्तर प्रदेश की तर्ज पर संगठित अपराध, जबरन वसूली (सिंडिकेट राज) और राजनीतिक हिंसा पर लगाम लगाना है, जो पिछली सरकार के दौरान फल-फूल रहे थे। इस कानून के तहत दंगों या हिंसक प्रदर्शनों के दौरान सरकारी और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने वालों से ही नुकसान की भरपाई भी की जाएगी।