प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर एक वैदिक सुभाषित साझा कर सामाजिक सौहार्द, प्रेम और मानवीय मूल्यों का संदेश दिया है। इस वैदिक मंत्र के माध्यम से उन्होंने लोगों से अपील की कि ऐसे कर्म करें जो हृदयों में प्रेम, सौहार्द्र और सद्भाव बढ़ाएं तथा आपसी भाईचारे को मजबूत करें।
एक्स पर शेयर किया गया वैदिक मंत्र
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने एक्स अकाउंट पर अथर्ववेद का यह मंत्र पोस्ट किया:
“सहृदयं सांमनस्यमविद्वेषं कृणोमि वः।
अन्यो अन्यमभि हर्यत वत्सं जातमिवाघ्न्या॥”
इसका सरल हिंदी अर्थ है—मनुष्य को ऐसे कर्म करने चाहिए जो हृदय में प्रेम, सौहार्द्र और सद्भाव को बढ़ाएं। सभी को एक-दूसरे के प्रति उसी प्रकार स्नेह और आत्मीयता रखनी चाहिए, जैसे गाय अपने नवजात बछड़े से प्रेम करती है।
अथर्ववेद का यह मंत्र क्या कहता है?
यह मंत्र अथर्ववेद के तीसरे कांड के 30वें सूक्त का पहला मंत्र है। इसमें ईश्वर मनुष्यों से कहते हैं, “हे मनुष्यों! मैं तुम्हारे बीच ऐसे वचन और कर्म स्थापित करता हूं जिससे तुम सहृदय (एक जैसा हृदय रखने वाले), सांमनस्य (समान मन वाले) और अविद्वेष (द्वेष व ईर्ष्या से रहित) बनो। तुम एक-दूसरे से उसी तरह प्रेम करो, जैसे गाय अपने नवजात बछड़े से अगाध स्नेह करती है।”
परिवार, समाज और राष्ट्र के लिए संदेश
यह वैदिक मंत्र परिवार, समाज और राष्ट्र के लोगों के बीच मतभेद मिटाकर उन्हें एक सूत्र में बांधने की प्रेरणा देता है। गाय और बछड़े का उदाहरण बताता है कि जैसे गाय बिना किसी स्वार्थ और शर्त के अपने बच्चे से प्रेम करती है, वैसे ही मनुष्यों को भी एक-दूसरे से निःस्वार्थ प्रेम करना चाहिए। मंत्र का मूल सार यही है कि सबका उद्देश्य और विचार एक-दूसरे के हित में हो। यही वैदिक प्रार्थना का मूल संदेश है।