नई दिल्ली: पंजाब कांग्रेस में मची भयंकर गुटबाजी के बीच हाईकमान ने 66 नेताओं को दिल्ली तलब किया है। अजय माकन की अगुवाई में बनी कमेटी के सामने चन्नी और राजा वड़िंग के गुटों की लड़ाई और 'जट्ट सिख' सीएम फेस की मांग उठ रही है। पंजाब कांग्रेस में आने वाला है भूचाल? हाईकमान ने 66 नेताओं को दिल्ली बुलाया; जानें अंदर की बात पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस हाईकमान अपनी राज्य इकाई को दुरुस्त करने की बड़ी कवायद में जुट गया है। पार्टी के भीतर मची गुटबाजी के बीच 66 कांग्रेसी नेताओं को दिल्ली तलब किया गया है। इसका मकसद यह तय करना है कि क्या चुनाव से पहले राज्य इकाई के पुनर्गठन यानी फेरबदल की जरूरत है।
अजय माकन की अगुवाई में 3 सदस्यीय कमेटी गठित
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब के मौजूदा राजनीतिक हालात, गुटबाजी और विधानसभा चुनाव की रणनीति पर रिपोर्ट तैयार करने के लिए एक तीन सदस्यीय पैनल बनाया है।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के कोषाध्यक्ष अजय माकन इस कमेटी के प्रमुख हैं। उनके साथ मीनाक्षी नटराजन और भजन लाल जाटव इस पैनल का हिस्सा हैं। उम्मीद है कि कमेटी शनिवार तक अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप देगी। इस रिपोर्ट के आधार पर पंजाब कांग्रेस के नेतृत्व और चुनावी रणनीति में संभावित बदलाव को लेकर फैसले लिए जा सकते हैं।
पहले दिन 33 दिग्गजों से हुई मुलाकात
अजय माकन के पैनल ने मंगलवार को दो दिवसीय समीक्षा के पहले दिन 33 प्रमुख नेताओं से मुलाकात कर उनकी राय जानी। इनमें कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) के सदस्य अंबिका सोनी, चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा और विजय इंदर सिंगला शामिल थे।
इसके अलावा पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजिंदर कौर भट्ठल और शमशेर सिंह डुल्लो, कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रताप सिंह बाजवा समेत कई सांसद और विधायक भी मौजूद रहे। बुधवार को यह पैनल पूर्व राज्य मंत्रियों और जिला कांग्रेस अध्यक्षों से मुलाकात करेगा।
चन्नी और वड़िंग के बीच गुटबाजी चरम पर
पंजाब कांग्रेस में फिलहाल पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के बीच मुख्य रूप से खींचतान देखने को मिल रही है।
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी का एक धड़ा चाहता है कि हाईकमान राजा वड़िंग की जगह चन्नी को प्रदेश अध्यक्ष बनाए। हाईकमान भी नेतृत्व परिवर्तन पर नेताओं की राय मांग रहा है।
हाल ही में पिछले महीने दिल्ली में हुई एक बैठक में दोनों नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई थी। तब चन्नी ने सीधा सवाल उठाया था कि जब राजा वड़िंग के गृह क्षेत्र 'गिद्दड़बाहा' में निकाय चुनावों में आम आदमी पार्टी (AAP) ने क्लीन स्वीप कर लिया, तो ऐसे में कांग्रेस विधानसभा चुनाव के लिए कैसे कमर कस सकती है।
'जट्ट सिख' को सीएम फेस बनाने की मांग
पार्टी सूत्रों ने बताया कि कुछ नेताओं ने पैनल से मांग की है कि आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को किसी 'जट्ट सिख' को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करना चाहिए। हालांकि विपक्ष में रहते हुए सीएम का चेहरा घोषित करना कांग्रेस की परंपरा नहीं रही है। 2017 में पार्टी ने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की कंपनी IPAC के कहने पर कैप्टन अमरिंदर सिंह को सीएम फेस बनाकर इस परंपरा को तोड़ा था।
समय से पहले चुनाव की अटकलें!
पार्टी के अंदर यह चर्चा भी तेज है कि विधानसभा चुनाव समय से पहले हो सकते हैं। एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने पर्यवेक्षकों से कहा कि चुनाव जल्दी होने की पूरी संभावना है, इसलिए हाईकमान को जल्द से जल्द नेतृत्व पर फैसला लेना होगा।
बता दें कि भाजपा ने भी फरवरी 2027 में होने वाली जनगणना की वजह से पंजाब, यूपी, उत्तराखंड और गोवा में अपनी इकाइयों को संभावित रूप से एक महीने पहले चुनाव के लिए तैयार रहने को कहा है, ताकि तारीखों का टकराव न हो।
क्या दोहराया जाएगा 2021 का इतिहास?
साल 2021 में भी कांग्रेस ने तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच की गुटबाजी को सुलझाने के लिए मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अगुवाई में 3 सदस्यीय पैनल बनाया था। हालांकि, उस कलह का खामियाजा पार्टी को 2022 के विधानसभा चुनाव में करारी हार के रूप में भुगतना पड़ा था। अब देखना होगा कि पार्टी अपनी पुरानी गलतियों से कितना सबक लेती है।