Wednesday, October 21, 2026
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हिमाचल

तीन साल में 3823 बार धधके हिमाचल के जंगल, कांगड़ा-शिमला सबसे ज्यादा प्रभावित

26 अप्रैल, 2026 06:48 PM

प्रदेश के जंगलों में आग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन वर्षों में 31 जनवरी 2026 तक प्रदेश में 3823 बार जंगलों में आग लगी। जिससे 48,947.335 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ। जंगलों को बचाने के भरसक प्रयासों के बाद भी जंगलों में आग की घटनाएं चिंता बढ़ा रही हैं। जिसके चलते विभाग ने बड़े पैमाने पर लोगों को जागरूक करने का अभियान भी छेड़ रखा है और फील्ड स्टाफ गांव-गांव पहुंच कर इसके प्रभावों से भी जनता को अवगत करवा रहा है। विभागीय आंकड़ों के तहत तीन वर्षों में सबसे ज्यादा नुकसान वर्ष 2024-25 में हुआ। इस दौरान प्रदेश में 2608 आग की घटनाएं दर्ज की गई और 30,993.785 हेक्टेयर वन क्षेत्र आग की चपेट में आया।

यह तीन साल का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इससे पहले वर्ष 2023-24 में 685 घटनाएं हुई थीं, जिनमें 10,576 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ था, वहीं वर्ष 2025-26 में 31 जनवरी तक ही 530 घटनाएं दर्ज हुई और 7377.55 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ। लिहाजा अब प्रदेश में फायर सीजन आरंभ हो चुका है और राज्य के अलग-अलग हिस्सों से जंगलों में आग लगने की घटनाएं भी सामने आ रही है। जिला वार आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2024-25 में कांगड़ा जिला सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में शामिल है। यहां पर 640 घटनाएं हुईं। धर्मशाला, पालमपुर, देहरा और नूरपुर वन मंडलों में सबसे ज्यादा आग लगी। इसी तरह शिमला जिला में 309 घटनाएं दर्ज हुईं। रोहड़ू, चौपाल, ठियोग और शिमला क्षेत्र में सबसे अधिक नुकसान हुआ।

वर्ष 2024-25 में मंडी जिला भी आग की घटनाओं से अछूता नहीं रहा। यहां 2024-25 में 374 घटनाएं दर्ज हुई। मंडी, जोगिंद्रनगर, करसोग और सुकेत क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। चंबा में 281 घटनाएं हुईं, जहां डलहौजी, चंबा और चुराह मंडलों में आग ज्यादा लगी। सोलन जिला में 316 घटनाएं सामने आईं, जिनमें नालागढ़, कुनिहार और सोलन वन मंडल प्रमुख रहे। जंगलों में आग की बजह से वन्य प्राणियों को भी भारी नुक्सान पहुंचा है। लेकिन इसका आंकलन संभव नहीं है कि वन्यजीवों को कितना नुकसान हुआ। जंगलों की आग में पक्षी, छोटे जानवर, सरीसृप और कई जीव-जंतु जलकर मर जाते हैं। इसके अलावा पेड़-पौधों, नई वनस्पति और मिट्टी की गुणवत्ता पर भी असर पड़ता है। हालांकि वन विभाग की मुस्तैदी के चलते वर्ष 2025-26 में जंगलों में आग की घटनाएं कम हुई है। वन विभाग का कहना है कि जंगलों में आग रोकने के लिए फॉरेस्ट सर्वे आफ इंडिया के फायर अलर्ट सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान भी चला रखे है।

उधर, प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट डा. संजय सूद का कहना है कि फायर सीजन के मध्यनजर वन विभाग जंगलों में आग की घटनाओं को रोकने के लिए पूरी तरह से मुस्तैद है। फायर सीजन के मध्यनजर सभी वन मंडलों को दिशा-निर्देश पूर्व में ही जारी कर दिए है। उन्होंने लोगों से भी अपील की है कि वह विभाग के सहयोग करें और जंगल में आग की स्थिति में तुरंत सूचना दें और इस पर नियंत्रण पाने के लिए विभाग का पूरा सहयोग करें।

 

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