तमिलनाडु में एक बार फिर भाषा विवाद जोर पकड़ सकता है। मुख्यमंत्री सी विजय जोसेफ ने साफ कर दिया है कि राज्य में दो भाषा नीति ही जारी रहेगी। खास बात है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हो रहा है, जब राज्य सरकार और केंद्र के बीच लगातार इस मुद्दे पर तनाव बना हुआ है। खास बात है कि इस मुद्दे को लेकर TVK और विपक्षी दल DMK के बीच भी तनातनी चल रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विधानसभा में राज्यपाल आरवी आर्लेकर के अभिभाषण के बाद सीएम विजय ने दो भाषा नीति का मुद्दा छेड़ दिया। उन्होंने कहा कि छात्रों पर कोई भी भाषा थोपी नहीं जाएगी। साथ ही कहा है कि तमिलनाडु का कल्याण राजनीतिक मतभेदों से अलग है।
क्या है भाषा विवाद
NEP 2020 यानी नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के तहत कहा गया है कि छात्रों को तीन भाषाएं पढ़ना आनिवार्य है। इसपर केंद्र और तमिलनाडु के बीच विवाद जारी था। दरअसल, दक्षिण भारतीय राज्य की सरकार दो भाषा नीति का समर्थन करती है, जिसमें तमिल और अंग्रेजी शामिल है। राज्य सरकार इसका विरोध करती है।
क्या बोले थे राज्यपाल
18 जून को राज्यपाल आर्लेकर ने अपने अभिभाषण में कहा कि सीएन अन्नादुरै के समय से तमिलनाडु में दो-भाषा नीति का पालन किया जा रहा है और जनता द्वारा स्वीकार किए जाने के कारण सरकार आगे भी इस नीति को जारी रखेगी। द्रविड़ आंदोलन के प्रमुख नेता द्रमुक के संस्थापक थे और 1967 से लेकर 1969 तक तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने 1967 में कांग्रेस को सत्ता से हटाया था।
राज्यपाल ने कहा, 'यह सरकार केंद्र सरकार से आग्रह करेगी कि मद्रास उच्च न्यायालय और उसकी मदुरै पीठ में तमिल को वाद-प्रतिवाद की भाषा के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाए तथा चेन्नई में उच्चतम न्यायालय की एक पीठ स्थापित की जाए।'
उन्होंने कहा कि नीट, एनईपी को 'थोपने' और तीन-भाषा सूत्र जैसे मुद्दे इसलिए खड़े हुए हैं क्योंकि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची में शामिल है। उन्होंने कहा, 'इसलिए यह सरकार शिक्षा को संविधान की समवर्ती सूची से हटाकर राज्य सूची में शामिल कराने के लिए सभी आवश्यक प्रयास करेगी।'
भाषा पर टकराव
द्रमुक और अन्नाद्रमुक समेत विपक्षी दलों ने गुरुवार को सत्तारूढ़ टीवीके सरकार पर तीखा हमला बोला और विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण को निराशाजनक बताया। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि अभिभाषण में चुनावी वादों को लागू करने की समय-सीमा का कोई उल्लेख नहीं किया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति, खासकर हाल के दिनों में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों के मुद्दे पर भी कोई बात नहीं की गई। नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन ने सबसे पहले सरकार पर हमला बोलते हुए इस अभिभाषण को पिछले पांच वर्षों में द्रमुक सरकार की उपलब्धियों की 'कट-कॉपी-पेस्ट' बताया।
इन मुद्दों पर घेरा था
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा, 'आज जिन प्रमुख नीतियों का उल्लेख किया गया, जैसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) और नीट का विरोध, दो-भाषा नीति को जारी रखना, केंद्र से शिक्षा के लिए धन प्राप्त करने की मांग, गरीबी-मुक्त तमिलनाडु बनाने की दिशा में काम करना और चेन्नई में उच्चतम न्यायालय की एक पीठ स्थापित करने का प्रयास... ये सभी पहल द्रमुक शासन के दौरान शुरू की गई थीं। इसमें बिल्कुल भी कुछ नया नहीं है।'
उदयनिधि और उनकी पार्टी के विधायकों ने सचिवालय परिसर के अंदर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने काली पट्टी पहनकर टीवीके सरकार के खिलाफ नारे लगाए और राज्य में कानून-व्यवस्था कथित रूप से बिगड़ने को लेकर विरोध जताया।
हाथों में तख्तियां लेकर विपक्षी सदस्यों ने राज्य में यौन उत्पीड़न, हत्या और डकैती की घटनाओं में कथित तेज बढ़ोतरी के खिलाफ प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार में 'महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा गंभीर खतरे में आ गई है।'